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Wednesday ,15 Jul 2020

राज्य

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आरोपी विकास दुबे की मां बोलीं- पकड़कर कर दें एनकाउंटर

कानपुर कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की मां ने कहा है कि मेरे बेटे ने बहुत बुरा किया है। पुलिस उसे पकड़कर एनकाउंटर कर दे। Knews से बातचीत में विकास दुबे की मां सरला देवी ने कहा, 'अच्छा होगा कि अगर वह खुद सरेंडर कर दे। धोखे से भागता रहा तो पुलिस उसे एनकाउंटर में मार देगी। मैं तो कहती हूं कि पुलिस पहले पकड़ ले और फिर एनकाउंटर कर दे। उसने बहुत बुरा किया है।' इससे पहले विकास दुबे के भाई दीपू के लखनऊ स्थित आवास पर जब पुलिस ने दबिश दी तो वहां उसकी मां सरला देवी ने दो टूक कहा कि उनका बेटा अपराधी है। उसे बहुत समझाया कि यह रास्ता छोड़ दो, लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी। सरला देवी ने बताया कि लॉकडाउन के पहले उससे मुलाकात हुई थी। वह अपने पत्नी व बच्चों के साथ दूसरे घर में रहता है। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की मां अक्सर बीमार रहती हैं। उन्हें इस बात का दुख है कि बेटे की वजह से उनके पूरे परिवार की बदनामी होती है।

पकड़कर कर दें एनकाउंटर

Knews से बातचीत में विकास दुबे की मां सरला देवी ने कहा, 'अच्छा होगा कि अगर वह खुद सरेंडर कर दे। धोखे से भागता रहा तो पुलिस उसे एनकाउंटर में मार देगी। मैं तो कहती हूं कि पुलिस पहले पकड़ ले और फिर एनकाउंटर कर दे। उसने बहुत बुरा किया है।' इससे पहले विकास दुबे के भाई दीपू के लखनऊ स्थित आवास पर जब पुलिस ने दबिश दी तो वहां उसकी मां सरला देवी ने दो टूक कहा कि उनका बेटा अपराधी है।

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KNEWS !1 week ago

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कानपुर में बदमाश को पकड़ने गई पुलिस टीम पर फायरिंग, DSP समेत 8 जवान शहीद

कानपुर में एक हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गई पुलिस टीम पर बदमाशों ने गोलियां बरसा दी. इसमें एक क्षेत्राधिकारी यानी डिप्टी एसपी समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं. हमले में सात पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं. कानपुर के चौबेपुर थाना इलाके में पुलिस ने बिकरू गांव में दबिश दी थी. पुलिस यहां हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने गई थी. दबिश के दौरान बदमाशों ने पुलिस को घेरकर फायरिंग कर दी. इसमें आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए.

मुठभेड़ में शहीद हुए पुलिसकर्मियों के नाम

1-देवेंद्र कुमार मिश्र,सीओ बिल्हौर

2-महेश यादव,एसओ शिवराजपुर

3-अनूप कुमार,चौकी इंचार्ज मंधना

4-नेबूलाल, सब इंस्पेक्टर शिवराजपुर

5-सुल्तान सिंह कांस्टेबल थाना चौबेपुर

6-राहुल ,कांस्टेबल बिठूर

7-जितेंद्र,कांस्टेबल बिठूर

8-बबलू कांस्टेबल बिठूर

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KNEWS !1 week ago

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UP Board Result 2020: हाईस्कूल और इंटर में लड़कियों ने मारी बाजी

यूपी बोर्ड के इतिहास में पहली बार  हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा का लखनऊ से जारी किया गया है. यूपी के डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने लखनऊ के लोकभवन से रिजल्ट जारी करते बताया कि पिछले साल से बेहतर रिजल्ट रहा है. बता दें कि इससे पहले तक यूपी बोर्ड के 10वीं और 12वीं के रिजल्ट प्रयागराज स्थित माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से ही जारी होते थे.

लड़कियों ने मारी बाजी

इस बार हाईस्कूल का रिजल्ट 83.31 फीसदी रहा.  हाईस्कूल में 89.88  फीसदी लड़की और 87.29 फीसदी लड़के पास हुए हैं. 12वीं में 74.63 फीसदी परीक्षार्थी पास हुए. 68.88 फीसदी लड़कों और 81.26 फीसदी लड़कियां पास हुई.

हाईस्कूल टॉपर

बागपत के श्रीराम एसएम अंतर कॉलेज बड़ौत की रिया जैन ने हाईस्कूल में टॉप किया है. रिया ने 96.67% नंबरों के साथ राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया है. हाई लखपेड़ाबाग बाराबंकी के अभिमन्यु वर्मा 95.83% अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे. वो श्री साईं इंटर कॉलेज के छात्र हैं. बाराबंकी के सद्भावना इंटर कॉलेज के योगेश प्रताप सिंह 95.33% अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे.

इंटरमीडिएट टॉपर
श्रीराम एसएम अंतर कॉलेज बड़ौत बागपत के अनुराग मलिक 97% अंकों के साथ 12वीं में टॉप पर रहे. प्रयागराज के एसपी इंटर क़लेज सिकरो की  प्रांजल सिंह 96% अंकों के साथ दूसरे और श्री गोपाल इंटर कॉलेज औरैया के उत्कर्ष शुक्ला 94.80 फीसदी अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे.

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KNEWS !2 weeks ago

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यादव कुल में एकता के अंकुर की अकुलाहट

पूरे देश में चल रही मोदी की आंधी का असर कहे या लोकसभा चुनाव के बाद बसपा सुप्रीमों मायावती से मिले कड़वे सबक का नतीजा कि अब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और संप्रग अध्यक्ष शिवपाल यादव को फिर पारिवारिक एकता याद आने लगी है. कल तक एक-दूसरे को फूंटी आंख न सुहाने वाले चाचा-भतीजे को एक बार फिर परिवार की एकता की फिक्र होने लगी है.चाचा शिवपाल ने जहां मैनपुरी में कहा कि कुछ षड़यंत्रकारी लोग परिवार की एकता में बाधक है और उनकी तरफ से सुलह की पूरी गुंजाइश है. तो इधर लखनऊ में भतीजे अखिलेश ने भी चाचा को निराश नहीं किया. अखिलेश ने कहा कि सबके लिए दरवाजे खुले है, जो आना चाहे, आ सकता है. आंख बंद करके पार्टी में शामिल कर लेंगे.

दरअसल पूरे देश में चल रही बीजेपी की प्रचंड आंधी का मुकाबला करने के लिए अब विपक्षी दलों ने अपनी रणनीतियां बदलनी शुरू कर दी है. यूपी में आगामी विधानसभा उपचुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए ही अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल ने एक बार फिर साथ आने के संकेत दिए है. लोकसभा चुनाव के बाद अखिलेश यादव और शिवपाल यादव दोनों के सामने अपने-अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने की चुनौती है. यही वजह है कि दोनों के बीच जमी कड़वाहट की बर्फ पिघलनी शुरू हो गई है. हालांकि खुलकर न तो अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव का नाम लिया और न ही शिवपाल ने षड्यंत्रकारी के तौर पर किसी का नाम लिया. ऐसे में अब देखना यह है कि क्या चाचा-भतीजे अपने-अपने सारे गिले शिकवे भुलाकर एक होंगे? या नहीं.

कानपुर से ऋषभ कांत छाबड़ा की रिपोर्ट

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KNEWS !9 months ago

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कौन होगा सबसे बड़ा लड़ईया?

लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कौन चुनौती देगा? इसकी वजह ये है कि लोकसभा चुनाव में 64 सीटें जीतने वाली बीजेपी का वोट प्रतिशत करीब 50 फीसदी है. जबकि बसपा के खाते में 10 सीटें आई है और उसका वोट प्रतिशत 19.3 है. वहीं, पांच सीटें जीतने वाली सपा को 17 फीसदी वोट मिले हैं. एक सीटों पर सिमटी कांग्रेस का वोट प्रतिशत 6 फीसदी है. तीनों पार्टियों के वोट प्रतिशत को मिला भी लें तो बीजेपी के को मिले वोट प्रतिशत से काफी दूर नजर आते हैं. बीजेपी का मजबूत संगठन और शानदार बूथ मैनेजमेंट ने सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के जातिगत अंकगणित को लोकसभा चुनाव में चारों खाने चित कर दिया. इतना ही नहीं तीनों ही पार्टियां अपने पारम्परिक वोट बैंक को बचाए रखने में भी नाकामयाब रही हैं. बीजेपी द्वारा विपक्षी दलों के कोर वोटबैंक में सेंधमारी तीनों ही पार्टियों के लिए चिंता का विषय है और चिंतन का भी.

हालांकि लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद अभी यह कहना कि आगामी विधानसभा चुनाव में सपा-बसपा और कांग्रेस अपने मतभेदों को भुलाकर एक साथ आएंगे बहुत जल्दबाजी होगी. इसकी वजह यह है कि तीनों ही दलों की अपनी-अपनी मजबूरियां हैं. चुनाव जीतने के अलावा पार्टी के वोटबैंक को बचाए रखना भी एक अहम मुद्दा है. लोकसभा चुनाव में यह देखने को मिला कि सपा-बसपा इस बात को लेकर असमंजस में थे कि वे बीजेपी से लड़ रहे हैं या कांग्रेस से या फिर दोनों से.

इसी तरह कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश में पिछले 30 सालों से अपनी खोई जड़ें तलाश रही है और हर चुनाव के बाद उसका प्रदर्शन गिर रहा है. 1989 के बाद से कांग्रेस यूपी की सत्ता से दूर है.  कमजोर संगठन और जमीन से जुड़े नेताओं की कमी कांग्रेस को बहुत ज्यादा खल रही है. हालांकि बसपा और सपा के पास आज भी अपना कोर वोटबैंक है, लेकिन कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसके पास फिलहाल कोई वोटबैंक नहीं है जो पार्टी की मदद कर सके.इस बार राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारकर कार्यकर्ताओं में जोश फूंकने की कोशिश जरूर की लेकिन परिणाम उत्साहवर्धक नहीं रहा. यहां तक की पार्टी अपनी पारम्परिक सीट अमेठी भी हार गई. कांग्रेस यूपी में महज एक सीट जीतने में कामयाब रही. ऐसे में अपनी जमीन खो चुकी सपा-बसपा समेत कांग्रेस में से 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कौन देगा चुनौती ?

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KNEWS !9 months ago

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MP

MP MEH CONGRESS RAAJ

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KNEWS !9 months ago

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नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत जुर्माने में 50 फीसदी कटौती

केंद्र सरकार के नए मोटर व्हीकल एक्ट को लेकर भारत के कई जगहों पर विरोध किया जा रहा है. अब इस एक्ट में उत्तराखंड सरकार ने आंशिक संशोधन किया है. राज्य सरकार ने केंद्र के नए मोटर व्हीकल एक्ट के कुछ नियमों की जुर्माना राशि में करीब 50 फीसदी तक की कटौती की है. वहीं कुछ नियमों में जुर्माना राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है. उत्तराखंड में नए नियम कुछ संशोधन के साथ लागू किए जाएंगे. धारा 177 के मुताबिक भारत सरकार के नए कानूनों के प्रावधानों के मुताबिक ही राज्य सरकार जुर्माना वसूलेगी...

अपराधों के लिए जुर्माने में संशोधन नहीं किया गया है. वहीं बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाने पर जुर्माने की राशि 5000 की जगह घटाकर 2500 रुपये कर दी गई है.देहरादून में किसी भी गाड़ी को मॉडिफाई करने पर 5000 रुपये का जुर्मान लगाया जाएगा, वहीं गलत नंबर प्लेट लगाने पर भी 5000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. ओवर स्पीडिंग करने पर 2000 रुपये का जुर्माना देना होगा, वहीं गलत तरीके से गाड़ी चलाने पर 2000 रुपये का जुर्माना देना होगा.

अब देखना होगा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा वाहन चालकों को दी गई राहत कहां तक सफल होती है....और लोग इस राहत का गलत फायदा तो नहीं उठाएंगे....

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KNEWS !10 months ago

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ऐसा बदलाव जिसकी कल्पना तक नहीं !

अगर इंसान के मन में कुछ करने का जज्बा हो और मंजिल को पाने की चाह हो तो कोई भी राह मुश्किल नही होती....क्यूंकि इसको सही साबित कर दिखाया है मुरादाबाद के गांव लालपुर गंगबारी के रहने वाले स्कूल संचालक शिक्षक मोहम्मद जावेद ने जिनके एक अनूठे प्रयास के चलते गाँव के ज्यादातर निरक्षर बुजुर्ग साक्षर हो रहे है.. आखिर शिक्षक ने गाँव मे ये मुहिम क्यों शुरू की और इसके पीछे क्या कारण रहे आपको यह भी बताते है....

शिक्षक मोहम्मद जावेद मुरादाबाद में अपने गांव लालपुर गंगवारी में एक स्कूल चलाते है..उन्हें पढ़ने वाले वाले बच्चों को लेकर एक परेशानी सामने आई कि स्कूल के बच्चों को जब होमवर्क दिया जाता था... तो बच्चे कभी होमवर्क करके ही नही लाते थे... फिर क्या था... इसका जब उन्होंने कारण खोजना शुरू किया तो पता चला कि गाँव के अधिकतर बुजुर्ग और परिजन निरक्षर है... जिस कारण बच्चे अपना होमवर्क पूरा नही कर पाते थे.... फिर क्या था बुलंद हौसले वाले जावेद ने गाँव मे नई मुहिम की शुरुआत की... जहां... गाँव के निरक्षर बुजुर्गों को साक्षर करने का बीड़ा उठा लिया...और इनकी शुरुआत अपने ही स्कूल में बुजुर्गों के लिये विशेष कक्षाएं संचालित कराकर शुरू की..और बच्चों के साथ घर की महिलायें को भी पढ़ाना और शिक्षा के लिए समझाना शुरू कर दिया..

इतना ही नही स्कूल के बच्चों से भी निरक्षर दादी-दादा मम्मी-पापा को घर पर भी पढ़ाने को कहा गया...स्कूल के बच्चों ने भी इस काम मे अपनी दिलचस्पी दिखाते हुये हर रोज घर पर होमवर्क करने के दौरान अपनी कॉपी किताबों से ही दादा-दादी मम्मी-पापा को पढ़ाना शुरू किया...वहीं अब बह अपनी इस मुहिम से अपने इलाके अन्य विद्यालयों को जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं...

कुछ समय के बाद ऐसे बदलाव आए जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी,,,, स्कूल के बच्चों को अब ना सिर्फ अपने बुजुर्ग दादी-दादा सहित परिवार को पढ़ाने में मजा आ रहा है... वहीं बुजुर्ग भी क्लास में अपने बच्चों के साथ बेझिझक होकर शिक्षा ले रहे है.

लालपुर गंगवारी की महिला ग्राम प्रधान भी इस मुहीम का हिस्सा हैं जो पहले निरक्षर थीं और इसी स्कूल में बच्चों के बीच बैठकर परीक्षा भी पास की है...जिनका कहना है कि बदलाव आ गया....कुछ समय के बाद अब ऐसे बदलाव आ गए हैं...  जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी.. जो निरक्षर थे वो अब साक्षर हो गए हैं... दिन ब दिन लोग आगे बढ़ रहे हैं...और इस मुहिम का हिस्सा बन रहे हैं..

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KNEWS !10 months ago

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बीमार पोते को पीठ पर लाद कर अस्पताल ले गया बुजुर्ग ?

योगी सरकार भले ही रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा करे..पर गाहे बगाहे इसकी पोल खुल ही जाती है..सरकार है.सरकारी सिस्टम है..जो कुछ है. बस चलने दो ... काम तो होते ही रहते है..लापरवाही तो सामने आती ही रहती है,उसमें क्या है.ये सब तो चलता रहता है.अधिकारी मस्त हैं.मौज में हैं.जो कुछ है झेलना तो आम आदमी को ही है..

जी हां. एक वृद्ध दादा अपने बीमार पोते को पीठ पर लादकर ले जाना पड़ता है बुलंदशहर में खबर सरकारी सिस्टम पर तमाचा मार रही है... वृद्ध दादा का आरोप है कि अस्पताल के गेट पर उसे स्ट्रेचर नहीं मिला. इसीलिए मजबूर होकर कमर पर ही लादकर अस्पताल में लाना पड़ा..इसके बावजूद मौके पर कोई डॉक्टर भी मौजूद नहीं मिले...काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी इलाज नहीं मिला...

इस खबर ने खुर्जा के सरकारी अस्पताल में मिलने वाली सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल कर रख दी है..अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में स्ट्रेचर होने के बाद भी ये देखने को मिला..खुर्जा के सीएमएस को अस्पताल एवं इमरजेंसी के गेट पर स्टेचर सहित वार्ड बॉय तैनात रखने के निर्देश देने का दावा किया जा रहा है....फिलहाल मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं.. अब ऐसे में देखना होगा क्या कुछ कार्रवाई की जाएगी...

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KNEWS !10 months ago

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सुप्रीम कोर्ट का 'सुप्रीम' आदेश, फुटपाथ हों खाली

फुटपाथ पर अतिक्रमण और बदहाल पार्किंग व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त रुख अपना लिया है. साथ ही ये भी कहा कि फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए बने हैं न कि दुकानदारों और पार्किंग के लिए बताते चलें कि राजधानी में फुटपाथ पर अतिक्रमण व बदहाल पार्किंग व्यवस्था को लेकर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 15 दिन में अतिक्रमण हटाया जाना चाहिए. साथ ही राजधानी में पार्किंग व्यवस्था में सुधार के लिए अदालत ने एक माह के भीतर नियम लागू किया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि सरकारें और संबंधित एजेंसियां आम लोगों को सार्वजनिक परिवहन मुहैया कराने में विफल रही हैं, जिसके कारण पार्किंग की समस्या बढ़ी है.

वाहनों की बढ़ती संख्या से प्रदूषण और पार्किंग की समस्या बढ़ी है. सिर्फ पार्किंग की बात करें तो समस्या बढ़ती जा रही है. लोगों के चलने के लिए बने फुटपाथ पर गाड़ियां खड़ी रहती हैं. पड़ोसी से पार्किंग को लेकर रोज झगड़ा होता है. यूनिवर्सिटी, स्कूल, अस्पताल या अदालत जैसे संस्थान जब बनाए जाते हैं, तो पार्किंग की तरफ ध्यान कम ही दिया जाता है. जो पहले एक फ्लोर का घर था उस घर में एक गाड़ी होती थी. अब घर आठ फ्लोर का हो गया है और गाड़ियों की संख्या 16 हो गई है लेकिन पार्किंग की जगह कहां है? जिन घरों में पहले गैराज बना था. अब उसे कमरे में तब्दील कर दिया गया है और गाड़ियां सड़क पर खड़ी की जा रही हैं. इस व्यवस्था में सुधार की जरूरत है.

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सभी निगम और कैंट बोर्ड तय करें कि सभी फुटपाथ से अतिक्रमण हटाया जाए. फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए बने हैं और उनपर किसी तरह का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए.  जिसने भी फुटपाथ पर कब्जा कर रखा है. उसे 15 दिन का नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने को कहा जाए यदि ऐसा नहीं होता है, तो निगम खुद कब्जा हटाए और इसका खर्च अतिक्रमण करने वाले से वसूला जाए. देखा जाए तो देश के 80 प्रतिशत फुटपाथ पर है कहीं दुकानदारों का तो कहीं पार्किंग का कब्जा है. दिल्ली में अतिक्रमण पर डंडा चलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो चुकी है. जिसे देखते हुए सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या पूरे देश की सड़कों पर चलना चाहिए अतिक्रमण पर डंडा? बार-बार बढ़ते अतिक्रमण का आखिर कौन है जिम्मेदार?

कानपुर से नीतिका श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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KNEWS !10 months ago

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जोश-ए-जवानी

भारत में ऐसे लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जिनमें सेक्स के प्रति इच्छा में कमी देखी जा रही है और ज्यादातर लोग अपराधबोध की वजह से इस बारे में खुलकर बात भी नहीं कर पाते हैं लेकिन क्या आप जानते है कैसे सेक्स आपकी कैलोरी बर्न करने में मदद करता है, दरअसल कुछ वक्त पहले एक स्टडी सामने आई थी, जिसमें कहा गया कि सेक्स से कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती