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Saturday ,19 Oct 2019

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थायराइड को कैसें करें कट्रोल

नई दिल्ली : थायराइड एक ऐसी समस्या है जो कि आजकल लोगों में आम देखने को मिलती है। थायराइड में वजन बढ़ने के साथ हार्मोन असंतुलन भी हो जाते हैं. थायराइड हार्मोन शरीर के अंगों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होते हैं. मगर पुरूषों की तुलना में महिलाओं में थायराइड की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में थायराइड का खतरा भी बढ़ जाता है।  ऐसे में उन्हें इसके बारे में पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है।  आइए आपको बताते है क्या है थायराइड, इसके लक्ष्ण और कासे घर बैठे आप कर  सकती उसकी इलाज

 

क्या है थायरायड

थायरायड ग्रंथि गले में सांस नली के ऊपर, वोकल कॉर्ड के दोनों ओर दो भागों में होती है। इसका आकार तितली जैसा होता है। ये ग्रंथि थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाती है। इस हार्मोन से शरीर की एनर्जी, प्रोटीन उत्पादन एवं अन्य हार्मोन्स के प्रति होने वाली संवेदनशीलता कंट्रोल होती है। थायराइड की वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है इसलिए इसकी वजह से शरीर में कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं।

 

कितने तरह का होता हैं थाइराइड 

मुख्य रूप से थायराइड के छह प्रकार माने गए हैं, 

हाइपो थायराइड : जब थायराइड ग्रंथि जरूरत से कम मात्रा में हार्मोंस का निर्माण नहीं करती है

हाइपर थायराइड : जब थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोंस का निर्माण करती है

थायराइडिटिस : जब थायराइड ग्रंथि में सूजन आती है

गॉइटर : भोजन में आयोडीन की कमी होने पर ऐसा होता है, जिससे गले में सूजन और गांठ जैसी नजर आती है।

थायराइड नोड्यूल : इसमें थायराइड ग्रंथि के एक हिस्से में सूजन आ जाती है। ये सूजन कठोर या तरल पदार्थ से भरी हुई हो सकती है

थायराइड कैंसर : जब थायराइड ग्रंथि में मौजूद टिशू में कैंसर के सेल बनने लगते हैं।

 

थायराइड होने के कारण 

ज्यादा नमक या सी फूड खाना

शरीर में आयोडीन और विटामिन बी12 की कमी होना

ऑटो इम्यून डिजीज - एक विशेष सूजन संबंधी विकार जिसे हाशिमोटो थायराइड सिस कहा जाता है,

थायराइड सर्जरी - थायराइड ग्रंथि के सभी हिस्से को हटाने से हार्मोन उत्पादन कम हो जाता है ऐसे में जीवनभर आपको थायराइड की समस्या हो सकती है।

 दवाएं- कई दवाओं के सेवन जैसे लीथियम आदि थायराइड का कारण बनती हैं।

पिट्यूटरी ग्रंथि - पिट्यूटरी ग्रंथि की समस्या से हो सकता हैं।

आयोडीन की कमी - आयोडीन की कमी या बहुत ज्यादा आयोडीन से हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है।

 

ये पढ़े : कैसे दूर करें रक्त की कमी

 

थायराइड होने पर क्या क्या लक्ष्ण दिखाई देते है

तेजी से वजन बढ़ना

कमजोरी और थकान होना

महिलाओं में पीरियड्स की अनियमितता शुरू हो जाती है

थायराइड की बीमारी के कारण आपको डिप्रेशन भी हो सकता है

सर्दी या गर्मी बर्दाश्त न होना

थायराइड होने पर पेट की गड़बड़ियां जैसे कब्ज होना

 

थायराइड के लिए क्या करें घरेलू उपचार 

 

हल्दी वाला दूध-  रोजाना हल्दी वाला दूध पीने से भी थायराइड कंट्रोल में रहता है। अगर आप हल्दी वाला दूध नहीं पीना चाहती तो आप हल्की को भून कर भी खा सकती हैं। इससे भी थायराइड को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

 

मुलेठी का सेवन- थायराइड के मरीज जल्दी थक जाते हैं। एेसे में मुलेठी का सेवन आपके लिए बेहद फायदेमंद होगा। इसमें मौजूद तत्व थायराइड ग्रंथी को संतुलित करके थकान को उर्जा में बदल देते हैं।

 

प्याज से करें मसाज- थायराइड को कंट्रोल करने के लिए सबसे अच्छा तरीका है प्याज। इसके लिए प्याज को दो हिस्सों में काटकर सोने से पहले थायराइड ग्‍लैंड के आस-पास क्‍लॉक वाइज मसाज करें। मसाज के बाद गर्दन को धोने की बजाए रातभर के लिए ऐसे ही छोड़ दें। कुछ दिन लगातार ऐसे करने से आपको इसके नतीजे दिखने शुरू हो जाएंगें।

 

गेहूं और ज्वार- गेहूं और ज्वार आयुर्वेद में थायराइड की समस्या को दूर करने का बेहतर और सरल प्राकृतिक उपाय है। इसके अलावा यह साइनस, उच्च रक्तचाप और खून की कमी जैसी समस्याओं को रोकने में भी प्रभावी रूप से काम करता है।

 

हरा धनिया- थाइराइड का घरेलू इलाज करने के लिए हरा धनिया को पीसकर उसकी चटनी बना लें। इसे 1 गिलास पानी में घोलकर रोजाना पीने से थायराइड कंट्रोल में रहेगा। आप चाहे तो चटनी का सेवन खाने के साथ भी कर सकती हैं।

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KNEWS !1 month ago

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घरेलु उपचार से डार्क सर्कल को करें दूर

नई दिल्ली : डार्क सर्कल्स आजकल अधिकतर लोगों की समस्या है. इसकी एक अहम वजह तनाव है. काम के अधिक प्रेशर और तनाव के चलते लोग ठीक तरह से सो नहीं पाते हैं, जिस कारण लोगों की आंखों के नीचें काले घेरे पड़ जाते हैं.

डार्क सर्कल्स होने के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं. ये काले घेरे आपकी खूबसूरती में ग्रहण लगा देते हैं. हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं, जिन्हें फॉलो कर के आप बिना पैसे खर्च किए ही डार्क सर्कल्स से छुटकारा पा सकते है

 

1. आलू का रस-  डार्क सर्कल्स से छुटकारा पाने के लिए आलू के रस को कॉटन  बॉल्स में भिगो लें. इसके बाद आंखें बंद कर के इसे कम से कम 10 मिनट तक आंखों पर रखें. इसके बाद ताजे पानी से आंखें धो कर लें.

 

2.. . टमाटर- डार्क सर्कल्स की समस्या से छुटकारा पाने के लिए टमाटर भी बहुत लाभकारी होता है. इसके लिए एक चम्मच टमाटर के जूस में कुछ बूंदें नींबू के रस की मिलकर उसे आंखों के नीचे काले घेरे पर लगाएं.

 

3... टी बैग-  ग्रीन टी बैग को पानी में भिगोकर फ्रिज में रख दें. ठंडा होने पर टी बैग को आंखें बंद कर के आंखों के ऊपर रख लें. रोजाना ऐसा करने से आंखों के काले घेरों से जल्दी राहत मिलेगी.

 

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4. संतरे का रस- संतरे के रस में कुछ बूंदें ग्लिसरीन की मिलाकर डार्क सर्कल्स पर लगाएं. इससे डार्क सर्कल्स दूर होने के साथ स्किन में चमक भी आएगी.

 

5. खीरा- ज्यादातर लोगों ने डार्क सर्कल्स की समस्या से राहत पाने के लिए खीरे का इस्तेमाल जरूर किया होगा. डार्क सर्कल्स को दूर करने में खीरे को गोल आकार में काटकर उसे 30 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें.  इसके बाद खीरे के टुकड़ों को 10 मिनट के लिए आंखों पर रखें. डार्क सर्कल्स की समस्या जल्दी खत्म हो जाएगी.

 

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KNEWS !1 month ago

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जानें मेनोपॉज के बारे में

नई दिल्ली : बिमारियो से दूर रहना पंसद है लेकिन महिलाओ मे  कुछ ऐसी बीमारियो जिससे ज्यादातर महिलाओ को गुजरना पडता है उनमें से एक है मोनोपॉज.... मोनोप़ज हर महिला के जीवन का अहम हिस्सा है...माना कि मोनोपॉ कोई बीमारी नही कुदरती प्रक्रिया है... तो आखिरकार क्या है मोनोपॉज. क्या है इसके लक्ष्ण.. और कैसे घर बैठे मोनोपॉज में खुद को रख सकते है ठीक आइए जानते है

 

 मोनोपॉज महिलाओं में एक प्राकृतिक क्रिया है जिसका अनुभव हर महिला को एक उम्र में आकर करना पड़ता है। रजोनिवृत्ति की स्थिति 40-50 वर्ष की उम्र की महिलाओं में पायी जाती है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब लगभग एक साल तक महिला को पीरियड्स या माहवारी ना आयें तब उस स्थिति को रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज कहा जाता है।

 

वैसे तो यह क्रिया 45 वर्ष से ऊपर की महिलाओं में होती है, परन्तु आजकल मेनोपॉज के लक्षण कम उम्र की महिलाओं में भी देखने को मिल रहे है। आजकल कुछ महिलाओं में समय से पहले यह समस्या उत्पन्न हो रही है

शरीर में एस्ट्रोजन की कमी से माहवारी भी अनियमित हो जाती है जिसे प्रीमेनोपॉज कहा जाता है

जब पूरे एक साल तक माहवारी ना आने की स्थिति बनी रहे तो उसे फुल मेनोपॉज कहा जाता है।

 

रजोनिवृत्ति से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य 

 

  • रजोनिवृत्ति होने पर महिला में शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के परिवर्तन आने लगते हैं।
  • रजोनिवृत्ति होने पर सुस्ती आना, नींद न आना, मोटापा बढ़ना इत्यादि समस्याएं भी हो सकती हैं।
  • किसी में अचानक मासिक धर्म आना बंद हो जाता है तो किसी में धीरे-धीरे होता है
  • जो महिलाएं अस्वस्थ हो या फिर हो, उन महिलाओं को माहवारी बंद होते समय कई परेशानियों से गुजरना पड़ सकता है।
  • कई महिलाओं में देरी से मेनोपाज होने के पीछे गंभीर कारण हो सकते हैं जैसे- गर्भाशय में सूजन, गांठ होना, कैंसर  होना या उसका खतरा होना आदि।
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रजोनिवृत्ति के लक्षण

  • बहुत अधिक पसीना आना।
  • घबराहट होना।
  • सिर में दर्द, चक्कर आना।
  • स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाना।
  • शारीरिक कमजोरी अधिक होना।
  • पेट से संबंधित समस्या होना।
  • पाचनशक्ति कमजोर हो जाना।
  • जी मिचलाना और उल्टियां आना।
  • लगातार कब्ज की समस्या होना हो सकती है।
  • इस समय में बहुत सी स्त्रियों को मानसिक तनाव होने लगता है।
  • कुछ स्त्रियों को तो इस समय के बाद शरीर पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं।

 

ये पढ़े : घरेलु उपचार से करें डार्क सर्कल का इलाज

 

 

मोनोपॉज के समय अपनाए घरेलु उपचार

 

कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ

रजोनिवृत्ति को जल्दी आने से रोकने का एक अच्छा घरेलू उपाय है। रजोनिवृत्ति या मीनोपॉज के दौरान हार्मोनल परिवर्तन की वजह से हड्डियाँ कमजोर हो सकती है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है। कैल्शियम और विटामिन डी  मजबूत हड्डियों के लिए अच्छे स्रोत होते हैं, इ

 

हरी, पत्तेदार सब्जियाँ

पालक, पत्तागोभी में भी बहुत सारा कैल्शियम होता है तो आप इनका भी सेवन कर सकती है। टोफू, बीन्स जैसे अन्य खाद्य पदार्थों में भी भरपूर मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी होता है

 

विटामिन डी

 

सूर्य का प्रकाश विटामिन डी का मुख्य स्रोत माना जाता है, क्योंकि जब आपकी त्वचा सूर्य के संपर्क में आती है तब वह इसका उत्पादन करती है जिससे हमारे शरीर को विटामिन डी मिलता है। विटामिन डी के समृद्ध आहार स्रोतों में शामिल है ऑयली फिश, अंडे, मशरुम, सोया मिल्क आदि।

 

सही वजन को बनाये रखना

रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के लक्षणों को कम करने का अचूक घरेलू उपाय माना जाता है रजोनिवृत्ति के दौरान वजन बढ़ना एक आम बात है। वजन बढ़ने का कारण बदलते हार्मोन, बढ़ती उम्र, अनियमित जीवन शैली और आनुवांशिक भी हो सकता है।

 

हानिकारक खाद्य पदार्थ का सेवन ना करें

मेनोपॉज के दौरान रात को बहुत पसीना आना, मूड स्विंग्स होना और हॉट फ्लाशेस की समस्या हो सकती है इसलिए ऐसा खाना ना खाए जिससे आपके शरीर को नुकसान हो। हानिकारक खाने में शामिल है कैफीन, अल्कोहल और बहुत ज्यादा मीठा या तीखा खाना। इन सभी खाद्य पदार्थो को अवॉयड करके आप मीनोपॉज से होने वाली समस्याओं को कम कर सकती है।

 

व्यायाम

रजोनिवृत्ति को होने से रोकने का एक अचूक घरेलू उपाय है। मीनोपॉज की स्थिति में व्यायाम करना एक अच्छा और बेहतर घरेलू उपाय हो सकता है जिससे शरीर में उर्जा बनी रहती है और तनाव और अनिद्रा की समस्या में भी आराम मिलता है।

 

 

 

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KNEWS !1 month ago

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किडनी रोग से कैसे करें बचाव

नई दिल्ली :  आज के टाइम में किडनी की बीमारी बड़ी तेजी से बढ़ रही है... किडनी रोग महिलाओं में मृत्यु का आठवां सबसे प्रमुख कारण माना जा रहा है. महिलाओं में किडनी डिसीज पुरुषों के मुकाबले 5 फीसदी ज्यादा होती है.आज हम आपको किडनी के स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी  ऐसी बातें बता रहे हैं जो  हर महिला को जाननी चाहिए।

 

महिलाओं की मौत ज्‍यादा

वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, गंभीर किडनी रोग की वजह से औसतन 6 लाख महिलाओं की मौत उपचार के आभाव में हो जाती है। आमतौर महिलाओं में गंभीर किडनी रोग यूटीआई इंफेक्‍शन (मूत्र मार्ग में संक्रमण) की वजह से होता है। इसकी वजह से ब्‍लैडर और ट़यूब भी प्रभावित होती हैं।

 

किडनी रोग के कारण

महिलओं में गंभीर किडनी रोग का मुख्‍य कारण प्रतिकूल गर्भावस्‍था परिणाम और कम प्रजनन क्षमता भी है। हालांकि, गंभीर किडनी रोग के बावजूद भी महिलाओं को गर्भावस्था और जन्म दोनों के दौरान पूर्व-एक्लम्पसिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है जो रक्तचाप बढ़ाने से गुर्दे पर तनाव पैदा कर सकते हैं। इसी कारण से, सभी गर्भवती महिलाओं के लिए उचित देखभाल महत्वपूर्ण है।

 

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इलाज है मुश्किल

की‍डनी की बीमारी के लक्षण धीरे धीरे विकसित होते हैं। प्रारंभिक लक्षण जैसे कि कम बार पेशाब करना, भूख की कमी, नींद की कमीं, थकान आदि संकेत हैं। वहीं कुछ लक्षण ऐसे हैं जो दिखाई नहीं देते हैं, जिसकी वजह से ये बीमारी गंभीर हो सकती है। ऐसी स्थिति में चिकित्‍सक की सलाह लेनी चाहिए। अगर मरीज खान-पान में संयम बरते, नियमित रूटीन फॉलो करे और समय पर डायलिसिस करवाता रहे तो वह लंबा जीवन जी सकता है।

 

उपाय

किडनी रोग किसी को भी प्रभावित कर सकता है और महिलाओं को को यह खतरा ज्‍यादा है। अगर आप इस समस्‍या से खुद को दूर रखना चा‍हती हैं तो इसके लिए नियमित रूप से व्यायाम करने या शारीरिक रूप से सक्रिय रहने, धूम्रपान न करने, शराब से दूर रहने आदि जैसी आदतों को अपनी लाइफस्‍टाइल में शामिल करेंगी तो इस बीमारी से  बचा जा सकता है... इसके अलावा आपका हाई, मधुमेह, हृदय की समस्याएं, किडनी रोग का पारिवारिक इतिहास रहा है तो आपको यह सुनिश्‍चित करना चाहिए कि आप हर छोटी-बड़ी समस्‍या के दौरान एक्‍सपर्ट की सलाह जरूर लें।

 

हर्बल दवाईंया

यदि आप हर्बल दवाओं का उपयोग कर रहे हैं, यह ध्यान रहे कि आप इसकी ओवर डोज बिल्कुल न लें। हर्बल उपचार किसी भी अन्य दवा की तरह ही है, और इसके भी दुष्प्रभाव हो सकते हैं। हर्बल उपचार बहुत शक्तिशाली हो सकता है। इसलिे बिना डॉक्टर के सुझाव के हर्बल दवाओं को बिल्कुल नहीं लेना चाहिए।

 

खास बातें

मैग्नीशियम किडनी की सही काम करने में मदद करता है, इसलिए ज्यादा मैग्नीशियम वाली चीजें, जैसे कि गहरे रंग की सब्जियां खाएं। 
- खाने में नमक, सोडियम और प्रोटीन की मात्रा घटा दें। 
- 35 साल के बाद साल में कम से कम एक बार ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच जरूर कराएं।
- न्यूट्रिशन से भरपूर खाना

 

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KNEWS !1 month ago

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निमोनिया मे कैसे रखें बच्चे का ख्याल

नई दिल्ली :   निमोनिया छाती या फेफड़ों में होने यह कभी एक तो कभी दोनों फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। इस बीमारी में फेफड़ों में सूजन आ जाती है और तरल भी भर जाता है। इस कारण बच्चे को खांसी आती है और सांस लेने में परेशानी होती है।

 

निमोनिया दो प्रकार का होता हैं

लोबर निमोनिया : लोबर निमोनिया फेफड़ों के एक या अधिक भाग को प्रभावित करता है।

ब्रोंकाइल निमोनिया : यह दोनों फेफड़ों में चकत्ते बना देता है।

 

बच्चों में निमोनिया होने के कारण

निमोनिया होने के तीन कारण हो सकते हैं जैसे- बैक्टीरिया, वायरस और फंगल 

 

दो साल से कम उम्र उम्र के बच्चों में निमोनिया होने का खतरा ज्यादा होता है..

जो बच्चे ज्यादा धुएं और प्रदूषण के संपर्क में आते हैं.. उनमें निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है

डिलीवरी के दौरान ग्रुप बी स्ट्रेप्टोककस के संपर्क में आने के कारण बच्चा निमोनिया का शिकार हो सकता है।

एचआईवी-एड्स या कैंसर के इलाज के कारण जिन बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, उनमें संक्रमण का खतरा अधिक होता है।

जिनके फेफड़ों में पहले से ही संक्रमण हों, उन्हें निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है।

 

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बच्चों में निमोनिया के लक्षण

हर बच्चे में निमोनिया के लक्षण अलग हो सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि निमोनिया किस कारण हुआ है। निमोनिया होने पर शुरुआत में नीचे बताए गए लक्षण नजर आ सकते हैं :

खांसी के साथ बलगम आना।

 खांसते समय छाती में दर्द होना।

 उल्टी या दस्त होना।

  भूख में कमी होना।

  थकान होना।

   बुखार होना।

 

निमोनिया के लिए घरेलू उपचार

कई ऐसे घरेलू उपचार हैं, जिनका इस्तेमाल बच्चे को निमोनिया होने पर किया जा सकता है। नीचे हम इन्हीं घरेलू उपचारों के बारे में बता रहे हैं :

 

हल्दी : बच्चे को निमोनिया में आराम दिलाने के लिए हल्दी काफी फायदेमंद मानी जाती है। हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो कई बीमारियों से दूर रखने में मदद करते हैं। निमोनिया होने पर थोड़ी-सी हल्दी गुनगुने पानी में मिलाएं और बच्चे की छाती पर लगाएं। इससे बच्चे को राहत मिलेगी 

 

लहसुन का पेस्ट : लहसुन को भी निमोनिया के लिए कारगर माना जाता है इसके लिए लहसुन की कुछ कलियों को पीसकर उसका पेस्ट बना लें और रात को सोने से पहले बच्चे की छाती पर लगाएं।

 

तुलसी : तुलसी में एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं  तुलसी की कुछ पत्तियों को पीस कर उसका रस निकाल लें। तुलसी का रस थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में दो बार बच्चे को पिलाने से निमोनिया में राहत मिलती है।

 

च्चे को निमोनिया होने से रोकने के लिए क्या करें

ऐसे कई तरीके हैं, जिनकी मदद से आप बच्चे को निमोनिया होने से रोक सकती हैं। कुछ सावधानियां बरतकर बच्चे को इस बीमारी से बचाया जा सकता है, जैसे :

संपूर्ण टीकाकरण : बच्चे को निमोनिया से बचाने के लिए सबसे जरूरी है कि उसे बचपन में सभी जरूरी टीके लगें। न्यूमोकोकल टीका (पीसीवी) लगाने से निमोनिया, सेप्टिसीमिया (एक प्रकार का संक्रमण), मैनिंजाइटिस (दिमागी संक्रामक रोग, जो ज्यादातर बच्चों को होता है) और रक्त विषाक्तता के कुछ मामलों में सुरक्षा देता है। इसके अलावा, डिप्थीरिया, काली खांसी और एचआईवी के इंजेक्शन निमोनिया से बचाव करने में मदद करते हैं।

साफ-सफाई पर ध्यान दें : बैक्टीरिया न फैले इसके लिए आपको व्यक्तिगत साफ-सफाई पर भी ध्यान देना होगा। छींकते-खांसते समय हमेशा मुंह और नाक को ढक लें। इसके अलावा, समय-समय पर बच्चे के हाथ भी धोती रहें।

 

प्रदूषण से दूर रखें : श्वसन संबंधी समस्या दूर रहे, इसके लिए जरूरी है कि आप अपने बच्चे को धूल-मिट्टी व प्रदूषण वाली जगह से दूर रखें। बच्चे को उस माहौल में न रहने दें, जहां आसपास लोग धूम्रपान करते हों। इससे उन्हें सांस संबंधी परेशानियां जल्दी पकड़ सकती हैं।

पर्याप्त पोषण दें : किसी भी तरह की बीमारी से बचने के लिए जरूरी है कि बच्चे को पर्याप्त पोषण दिया जाए, ताकि उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बने और वो बीमारियों से लड़ सके। अगर बच्चा छह महीने से कम का है, तो उसे नियमित रूप से स्तनपान कराएं, क्योंकि स्तनदूध में एंटीबॉडीज होते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करते हैं। वहीं, अगर बच्चा ठोस आहार खाता है, तो उसे जरूरी पोषक चीजें भरपूर मात्रा में खिलाएं।

भीड-भाड़ वाली जगह से दूर रहें : बच्चे को भीड़-भाड़ वाली जगह से दूर रखें। ऐसी जगहों पर संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा होता है।

बच्चे में निमोनिया के लक्षण नजर आते ही उसका तुरंत इलाज करवाना शुरू कर देना चाहिए। उम्मीद है कि बच्चे को निमोनिया होने से संबंधित सभी जानकारियां इस लेख में आपको मिल गई होंगी। इसलिए, सतर्कता बरतें और लक्षण नजर आने पर ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए बच्चे का इलाज करवाएं

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KNEWS !1 month ago

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कैसे दूर करें रक्त की कमी

नई दिल्ली : एनीमिया यानी आम भाषा में कहा जाए तो खून की कमी....मुख्य तौर पर छोटे बच्चों, महिला खिलाड़ियों, सर्जरी या एक्सीडेंट के मरीजों में एनीमिया का खतरा अधिक होता है। वहीं महिलाओं में माहवारी के दौरान होने वाले रक्त के भाव एवं गर्भावस्था के कारण यह समस्या हो सकती है…आइए आपको बताते है... आप कैसे खूनी की कमी को दूर सकते है....

चुकंदर

शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के साथ चुकंदर पेट के गैस की परेशानी में भी फायदेमंद है। इतना ही नहीं त्वचा को जवां बनाए रखने में चुकंदर बेहद कारगर है। चुकंदर से ज्‍यादा लौह तत्‍व इसकी पत्तियों में होता है।

आंवला

शरीर में खून की कमी दूर करने के लिए आंवला बहुत कारगर है। विटामिन सी होने की वजह से यह सेहत को अच्छा रखता है। आंवले को मुरब्बा, जूस, सलाद औऱ कच्चे फल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

तुलसी

तुलसी भी खून की कमी को दूर करती है। रोज सुबह उठकर तुलसी की ताजा पत्तियां चबाने से रक्त की अम्लता दूर होगी और रक्त बढ़ेगा।

 

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पालक और मेथी

मेथी खून को साफ करने के साथ-साथ हीमोग्लोबिन बढ़ाता है। इसे पालक के साथ मिलाकर खाने से रक्त शुद्धि भी होती है औऱ खून भी बढ़ता है। अगर न खा पाएं तो रोज एक बार इन दोनों का जूस पी लें।

अमरूद

अमरूद ऐसा फल है जो खून की कमी दूर करने के साथ साथ शरीर को जरूरी एंटी-ऑक्सिडेंट भी देता है। खासकर पके हुए अमरूद को खाने से शरीर में ज्यादा खून बनता है।

टमाटर

खून की मात्रा को बढ़ाने में टमाटर फायदेमंद है। ये शरीर की प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है। टमाटर सेवन से कभी भी खून की कमी नहीं रहती है। टमाटर का सूप या टमाटर खाने से खून की मात्रा शरीर में बढ़ती है।

केला

केले से मिलने वाला प्रोटीन, आयरन, और खनिज आपके शरीर में खून को बढ़ाते हैं। इसलिए दूध के साथ हर सुबह केले का सेवन करें।

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KNEWS !5 months ago

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बुखार में डॉक्टर को कहें बॉय-बॉय

नई दिल्ली : जब बच्चे को बुखार आता है...तो हम कैसे घबरा जाते है...डर जाते है... समझ नहीं आता क्या करे और क्या ना करें तुंरत बच्चे को डॉक्टर के पास लेकर भागते है...लेकिन अब घबराने की जरूरत नहीं है.. हम आपको कुछ ऐसे घरेलु नुस्खे बताने जा रहे है... जिसके बाद घर बैठे घरेलु तरीको से बच्चे को बुखार से आराम दिला सकते है......इसके लिए आपको कही भागने की जरूरत नहीं है...

आलू

दो आलू को घिसकर उसका पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को अपने बच्चे की जुराबों में डालें। फिर इन जुराबों को अपने बच्चे को पहनाएं। ये कुछ ही मिनटों में बच्चे के बढ़े हुए तापमान को नीचे ले आएगा।

ब्रांडी और पानी

आधे कप पानी में आधा कप ब्रांडी मिलाएं। अब एक पतला सूती कपड़ा इसमें डुबाएं। अब इस कपड़े को अपने बच्चे की जुराबों में डाल दें। ये तापमान को नियंत्रित करने का एक कारगर उपाय है।

गीला कपड़ा

एक सूती कपड़े को पानी में भिगाएं, अब इसे निचोड़ कर बच्चे के माथे पर रखें। इसे कुछ देर के लिए रखें और इस प्रक्रिया को तब तक करते रहें जब तक बुखार कम ना हो जाए।

 

ये पढे़ :  कामकाजी महिलाओं के लिए फिटनेस टिप्स

आप बच्चे को भरपूर मात्रा में ठंडे पेय पदार्थ दें। ये काफी ज़रूरी उपाय है। आप उसे दही या आइसक्रीम खिला सकते हैं। ये आपके बच्चे को हाईड्रेट रखेगा और उसका शरीर ठंडा करके बुखार कम करेगा।

 

ढीले कपड़े

अगर आपके बच्चे ने बॉडी फिटिंग के हिसाब से कपड़े पहने हैं तो बेहतर होगा आप उन्हें थोड़े ढीले कपडे पहना दें। लूज़ कपड़ों से शरीर को राहत मिलेगी और तापमान कम हो जाएगा। बच्चे ने अगर एक्स्ट्रा कपड़े पहने हैं तो उसे उतर दें। लेकिन यदि आपके बच्चे को ठंड लग रही है और वो कांप रहा हो तो उसे कंबल में लपेट लें।

 

पंखे का इस्तेमाल करें

अपने बच्चे के लिए पंखे का इस्तेमाल करें जिससे उसका बुखार कम हो सके। लेकिन बच्चे को ज़्यादा देर तक पंखे के सामने ना रखें इससे वो ठंड पकड़ सकता है। साथ ही पंखे की स्पीड भी कम पर ही रखें।

 

 

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KNEWS !5 months ago

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पीरियड्स दर्द से मिलेगा छुटकारा

नई दिल्ली : लड़कियों को हर  महीने असहनीय दर्द सहना पड़ता है.. जी हम बात कर रहे है...पीरिडस की ...आप इस दर्द को खत्म करने के लिए पेनकिलर का इस्तेमाल करते है..तो अब आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं हैं क्‍योंकि आज हम आपको कुछ easy tips के बारे में बता रहे हैं जिन्‍हें अपनाकर आप इस पेन को कम कर सकती हैं।

 

बेहद फायदेमंद पानी 

पानी कई तरह की बीमारियों को दूर करता है लेकिन पीरियड्स की बात आने पर पानी जादू की तरह काम करता है। कम से कम 12-15 गिलास पीने से आपकी सूजन में हेल्‍प मिलती है, जिससे आपकी ऐंठन से राहत मिलेगी

 

एक्सरसाइज

वैसे तो माना जाता है कि पीरियड्स में एक्‍सरसाइज नहीं करनी चाहिए, लेकिन यह धारणा गलत हैं.. एक्‍सरसाइज से आप ब्‍लोटिंग को कम कर सकती हैं और ब्‍लोटिंग से ही आपको menstrual cramps होते हैं। थोड़ा बहुत योग भी आपकी मसल्‍स को रिलैक्‍स करने में हेल्‍प करेगा। In fact, हल्‍की वॉकिंग से भी आपको हेल्‍प मिल सकती है।

 

ये पढ़े : पीरियड्स की समस्या से पीसीओडी

 

मसालेदार भोजन

आपको बहुत ज्‍यादा चीजें करने की जरूरत नहीं हैं क्‍योंकि अच्‍छी डाइट पेट को ठीक करने और ऐंठन को कम करने में हेल्‍प करती है। इसलिए ज्‍यादा greasy फूड से बचें और हरी सब्जियों को अपनी डाइट में शमिल करें!

 

नमक

पीरियड्स में ब्लॉटिंग होना आम है। लेकिन अगर आप पीरियड्स से कुछ वक्त पहले से नमक का सेवन कम कर दें तो इससे आपकी किडनी को अत्यधिक पानी निकालने में हेल्‍प और दर्द से राहत मिलेगी।

 

गर्म पानी की थैली

आप hot water bag की help से भी इस पेन को कम कर सकती है इसके लिए जब भी आपको पेन हो hot water bag को उस हिस्से पर रखें जहां आपको पेन हो रहा हो। इससे आपका पेन कम हो जाएगा। गर्माहट मिलने से blood vessels खुल जाती है 

 

तेजपत्‍ता

 menstrual cramps को दूर करने के लिए कई महिलाएं इस्‍तेमाल करती है। यह हार्मोंन balance करने में हेल्‍प करता है जो आमतौर पर periods के दौरान उग्र हो जाते हैं

 

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KNEWS !5 months ago

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पीरियड्स की समस्या से पीसीओडी

नई दिल्ली : पीसीओडी  एक ऐसी कंडीशन है जहाँ महिलाओं की ओवरी बड़ी हो जाती है और फॉलिकल cysts बहुत छोटा हो जाता है । इस वजह से ओवरी में आये एग्स को शरीर से बाहर निकाल पाना असंभव सा हो जाता है...जिन महिलाओं को PCOD होता है उनमे हार्मोनल इमबैलेंस के आसार दिखते हैं।  यहाँ ओवरी एण्ड्रोजन (मेल हॉर्मोन) ज्यादा बनाने लगती हैं। इसकी ज्यादा मात्रा एग्स के विकास और ओवलुशन के दौरान शरीर से बाहर निकलने की प्रक्रीया पर असर डालती है ।

 

इस बीमारी के होने का अबतक कोई कारण पता नहीं चला है...लेकिन चिकित्सकों का मानना है कि यह समस्या महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, मोटापा या तनाव के कारण होती हैं। साथ ही यह जैनेटिकली भी होती है।

 

ये पढ़े :  गंभीर बिमारियों से बचाता है टीकाकरण

 

वर्तमान में देखें तो हर दस में से एक प्रसव उम्र की महिला इसका शिकार हो रही हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जो महिलाएं तनाव भरा जीवन व्यतीत करती हैं उनमें पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम होने की संभावना अधिक होती है।

 

क्या है इसके लक्ष्ण

समय पर मासिक धर्म का न आना-

अचानक वजन बढ़ना-

 अधिक बाल उगना

इमोशनल हो जाना, चिंतित रहना, चिड़चिड़ापन

मुंहासों की शुरुआत

 

पीसीओड़ी से बचने के कुछ घरेलू उपाय... कैसे घर बैठे आप pcod से बच सकते है.. आइए जानते है...कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में..

 

दालचीनी –  ये आपके अनियमित पीरियड की समस्या को दूर करने में बड़ी मददगार होती है। एक टीस्पून दालचीनी का पाउडर गरम पानी में मिला कर पी लें। आप चाहें तो इसे अपने cereal, ओटमील, दही या चाय में मिला कर भी पी या खा सकती हैं। इसका सेवन रोज करें, जब तक आपको रिज़ल्ट ना मिलने लगें।

 

अलसी  1-2 टेब्लस्पून ताज़ी पीसी हुई अलसी को पानी में मिला कर पी लें। इसे रोजाना तब तक पिए, जब तक आपको नतीजे ना मिलने लगें..

 

मेथीदाना –  ये होर्मोंस को संतुलित करने, कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद करता है और साथ ही वज़न कम करने में भी कारगर होता है। तीन टीस्पून मेथीदाने को पानी में 7-8 घंटे के लिए भिगो दें। फिर सुबह खाली पेट एक टीस्पून भीगा हुआ मेथीदाना शहद के साथ मिलाकर खा लें। इसी तरह से एक-एक टीस्पून लंच व डिनर के 10 मिनट पहले खा लें। इस उपाय को कुछ महीने तक करें, जब तक आपको मनचाहे नतीजे ना मिलें।

 

 एपल साइडर विनेगर – ये PCOS PCOD से लड़ने में बहुत असरदार होता है क्योंकि ये ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है, जिससे इंसुलिन कम बनता है और हॉर्मोनल असंतुलन भी नहीं होता है। इसके अलावा ये वज़न कम करने में भी सहायता करता है...apple cider vinegar   दो टीस्पून apple cider vinegar को एक ग्लास पानी में मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट व लंच और डिनर से पहले पिएं। इसे कुछ महीने करें, जब तक आपको बीमारी से छुटकारा ना मिल जाए

 

 

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गंभीर बिमारियों से बचाता है टीकाकरण

नई दिल्ली : बच्चों की सेहत का ख्याल उनेक जन्म से ही शुरू हो जाता है...बच्चो के खान पान के साथ उनका टीकाकरण भी बेहद जरूरी है...उन्हे गंभीर बिमारियों से बचाया जा सके... और संपूर्ण तरीके से इनका शारिरीक और मानसिक विकास हो सके...

  

1/2 माह में शिशु टीकाकरण

 

डी.पी.टी. का तृतीय टीका

हेपेटाईटिस B का तृतीय टीका

पोलियो की तृतीय खुराक

हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) की तृतीय ख़ुराक़

रोटावायरस की तृतीय खुराक

 न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन तृतीय ख़ुराक़

 

12वें माह में शिशु वैक्सीनेशन

 

टाइफ़ाइड कन्जुगेटेड वैक्सीन

हेपेटाइटिस A पहली ख़ुराक़

 

15-18वें महीने में टीकाकरण

खसरा, रूबेला

वेरिसेला की दूसरी खुराक

D.P.T. का पहला बूस्टर डोज़

हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी का बूस्टर डोज़

न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन का बूस्टर डोज़

पोलियो वैक्सीन का चौथा ख़ुराक़

टाइफाइड कन्जुगेटेड वैक्सीन की दूसरी ख़ुराक़

5 वर्ष

खसरा, रूबेला की दूसरी ख़ुराक़

D.P.T. का दूसरा बूस्टर डोज़

पोलियो की पाँचवी ख़ुराक़

10 वर्ष टीडी

टेटनस, डिप्थीरिया

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जोश-ए-जवानी

भारत में ऐसे लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जिनमें सेक्स के प्रति इच्छा में कमी देखी जा रही है और ज्यादातर लोग अपराधबोध की वजह से इस बारे में खुलकर बात भी नहीं कर पाते हैं लेकिन क्या आप जानते है कैसे सेक्स आपकी कैलोरी बर्न करने में मदद करता है, दरअसल कुछ वक्त पहले एक स्टडी सामने आई थी, जिसमें कहा गया कि सेक्स से कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती