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Saturday ,19 Oct 2019

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नौनिहालों की जान से खिलवाड़

गर्मियों की छुट्टी के बाद स्कूलों का नया सत्र शुरू हो चुका है. नई कक्षा में प्रवेश के साथ-साथ बच्चों में स्कूल जाने का उल्लास भी साफ़ देखा जा सकता है. एक ऐसा उल्लास जो हर बच्चे के चेहरे पर है. लेकिन क्या हो जब नौनिहाल आँखों में सपने लिए अपनी जान हथेली में लेकर स्कूल जाएं और किसी अप्रिय दुर्घटना का शिकार हो जाएं. सोचकर भी रूह काँप जाती है. लेकिन जिम्मेदार हैं कि उन्हें इस बात का जरा सा भी अहसास नहीं हैं.

जी हाँ जो तस्वीरें हम आपको दिखा रहे हैं वो बिलकुल सही हैं और लगभग पूरे देश में ही ऐसी तस्वीरें साफ़ देखी जा सकती हैं. नियमों की मानें तो स्कूल की वैनों में सीएनजी की साफ़ मनाही है. लेकिन परिवहन विभाग के नियमों को ताख पर रखकर नौनिहालों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है. एक तरफ नन्हें मासूमों की जिंदगी खतरे में डालने वाले स्कूली प्रशासन की लापरवाही साफ़ तौर पर देखी जा सकती है. जिसका एक प्रत्यक्ष प्रमाण आगरा में देखने को मिला. जहां एक स्कूली वैन LPG से चल रही है. इतना ही नहीं लापरवाही की हद तो तब पार हो गई जब ये मासूम बच्चे LPG टैंक के ऊपर ही बैठे दिखे.लापरवाही का ये कोई पहला मामला नहीं हैं. इससे पहले भी के न्यूज़ अपनी ख़ास मुहीम 'सूबा बोलेगा' के जरिये अपनी आवाज बुलंद कर चुका है.

रही बात RTO की तो वो भी कुम्भकर्णी नींद सोया हुआ है. जब कोई हादसा होता है. तब उनकी आंखें खुलती है. स्कूल की जिन वैनों में नौनिहालों को बैठाकर लाया और ले जाया जाता है. वो किसी ज्वालामुखी से कम नहीं है. योगी सरकार तो लगातार एक्शन मो़ड में दिखती है लेकिन अधिकारियों पर इसकी सख्ती नहीं दिखती है. न्यायालय की गाइड लाइन की बात करें तो किसी भी स्कूली ऑटो में पांच और  वैन में 13 बच्चों से ज्यादा बैठाने पर रोक है लेकिन न्यायालय की गाइड लाइन का पालन ना के बराबर हो रहा है. यहां तक पुलिस थानों के सामने से ये ऑटो और बाकी के स्कूल वाहन फर्राटे भरते हुए निकल जाते हैं लेकिन थाने का सिपाही तक नहीं टोकता है. परिवहन विभाग स्टाफ का रोना रोता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल उठता है तो सिर्फ यही की क्या साशन-प्रसाशन को किसी बड़ी दुर्घटना का इन्तजार है? आखिर क्यों नहीं खुल रही जिम्मेदारों की कुम्भकर्णी नींद?

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KNEWS !4 weeks ago

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मौत के-वे

नई दिल्लीI देश की राजधानी नई दिल्ली से उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले यमुना एक्सप्रेस-वे पर लगातार हो रही दुर्घटनाएं चिंता का विषय बन चुकी हैं. जनवरी से जून महीने में ही यमुना एक्सप्रेस-वे पर छोटी-बड़ी 95 दुर्घटनाएं हो चुकीं हैं. जिसमें लगभग 94 लोगों की जान जा चुकी है. यूपी ट्रैफिक पुलिस निदेशालय की आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जून महीने तक यमुना एक्सप्रेस-वे पर 95 सड़क दुर्घटनाएं हुईं. इनमें 94 लोगों की जान चली गई. ट्रैफिक पुलिस निदेशालय के यह आंकड़े काफी दिल दहलाने वाले हैं. इनमें 120 लोग घायल भी हुए हैं.165 किमी लंबे इस एक्सप्रेस वे की लागत 128.39 अरब रुपये थी.

इसे बनाने का मकसद था दिल्ली और आगरा के बीच की दूरी घटाकर कम समय में लोगों को आनंददायक सफर मुहैया कराना, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, यह एक्सप्रेस वे मौत का हाईवे बनता चला गया. हालात यह हो गए हैं कि लगभग हर दिन ही इस हाईवे पर कोई न कोई अपनी जान गंवा रहा है. अब तक सामने आई सड़क हादसों की घटनाओं पर गौर करें तो सिर्फ 1 जून, 2019 से 8 जुलाई, 2019 के बीच ही इस हाईवे पर कई सड़क हादसे हो चुके हैं. इनमें करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है.

हाइवेस पर लगातार बढ़ती दुर्घटनांए कई मौतों का सबब बन रही हैं. देखा जाए तो पूरे देश में हाइवे में एक्सीडेंट होने की वजह से मौत के आंकड़ों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है. यमुना एक्सप्रेस वे के 165 किमी लंबे सफर में पिछले कई वर्षों में हुए हादसों के आकड़े डरावने हैं. बता दें कि हर साल होने वाले हादसों में से करीब 23 फीसद हादसे ओवरस्पीड में झपकी और 12 फीसद हादसे टायर फटने के कारण होते हैं. इनके लिए सीधे तौर पर खुद हम जिम्मेदार हैं. एक्सप्रेस वे पर चढ़ते ही गाड़ी टॉप गियर में आ जाती है. स्पीडोमीटर की सुई नीचे नहीं उतरती ऐसे में रास्ते में ब्रेक लेने की जरूरत भी नहीं समझते. लगातार हादसे हो रहे हैं. इसके बाद भी हम न गति सीमा का ध्यान रखते हैं और न ही गाड़ी के रखरखाव का जबकि देश का कोई भी एक्सप्रेस वे हो, लेकिन उस पर सुरक्षित सफर करने को सावधानी ही एकमात्र विकल्प है.

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KNEWS !4 weeks ago

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महिला मांगे अधिकार

महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कर रही हैं. जमीन से लेकर आसमान में ही नहीं अंतरिक्ष में भी उनके क़दमों की छाप मौजूद है. जिस तरह से उनका कद बढ़ा है. घर से लेकर दफ्तर में एक महिला के क्या अधिकार होते हैं. महिलाओं के प्रति हम सबकी सोच और नजरिये में पिछले कुछ दशकों में गजब का सकारात्मक बदलाव आया है. पर इन बदलावों का मलतब यह नहीं है कि पुरुष और महिलाएं बराबरी पर पहुंच गए हैं. समानता की यह लड़ाई अभी काफी लंबी चलनी है. दुनिया के कई देशों में आज भी महिलाएं अपने हक और अधिकार की लड़ाई लड़ रही हैं. जिसमें अपना देश भारत भी शामिल है. इससे बड़ा दुख तो यह है कि आज भी अधिकांश महिलाएं अपने अधिकारों और हक के बारे में सही तरीके से जानती तक नहीं हैं, जबकि होना तो यह चाहिए कि महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में पूरी जानकारी रहनी चाहिए. जिसके लिए पूरे देश को जागरूक होना भी जरूरी है.

बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हम एक आर्थिक और राजनीतिक शक्ति पुंज के रूप में उभर रहे हैं. हमारे संविधान ने हमें जो अधिकार और अवसर दिए हैं उन्हें भी प्रमुखता मिल रही है. आज महिलाएं भी मेहनत कर रही हैं और अपने करियर को लेकर गंभीर हैं. हांलाकि, मानसिक, शारीरिक और यौन उत्पीड़न जीवन का हिस्सा बन गई हैं, लेकिन इस सब पर रोक भी जरूरी हो गयी है.

महिलाओं के हित में सरकार ने कई कड़े कानून बनाए हैं, लेकिन उनके हक अधिकार उन तक नहीं पहुंच पाते या यूँ कहा जाए तो महिलाएं अब भी अपने अधिकार के लिए लड़ रही हैं. पिछले कई सालों में महिलाओं से छेड़छाड़ को रोकने के लिए कई कानून पारित हुए हैं. अगर बनाये गए कानूनों को ध्यान में रखकर. इनका पालन होता तो शहरों में महिलाओं से छेड़खानी के मामले खत्म हो जाने चाहिए थे. हालात ये हैं कि छेड़छाड़ और दुष्कर्म के मामले कम होने के बजाए और भी बढ़ गए हैं. ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी है महिलाओं की सुरक्षा को लेकर ना सिर्फ शासन प्रसाशन में जागरूकता हो, बल्कि देश के नागरिकों में भी जागरूकता हो.

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KNEWS !4 weeks ago

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क्या कम होगा नौनिहालों का बोझ?

देश के छोटे बड़े शहरों में भारी-भरकम स्कूल बैग टिफिन बॉक्स, पानी की बोतल लेकर झुकी कमर और  लड़खड़ा कर चलते मासूम स्कूल आते-जाते दिख जाएंगे. इन मासूमों से स्कूली बस्ते सहजता से उठते भी नहीं, लेकिन वो इसे ढोने के लिए मजबूर हैं. हालाँकि सरकार ने नौनिहालों के बस्ते का वजन कम करने के लिए कड़े कानून बनाए हैं, लेकिन उन सभी नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. बस्ते का बढ़ा हुआ बोझ अपने कंधों पर ढ़ोने वाले नौनिहालों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है. देश का भविष्य माने जाने वाले इन नौनिहालों के नाजुक कंधे पर टंगे भारी-भरकम बस्ते से झुका नौनिहालों का शरीर बच्चों का दर्द बयान करने के लिए काफी है.

बता दें कि प्राइवेट स्कूल जिस तरह से बच्चों के कंधों पर कॉपी किताबों से बोझ डाल रहे हैं. उसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने समूचे देश के स्कूलों को गाइडलाइन जारी करते हुए. नौनिहालों के बैगों का वजन निर्धारित करने की बात कही थी, लेकिन पूरे देश के विद्यालयों से इससे उलट तस्वीरें सामने आ रही है. जहां पर बच्चे अपने वजन  से अधिक कंधो पर बैग टांग कर स्कूल जाने को मजबूर है. वहीं अधिकारियों और शिक्षा विभाग की बात करें तो वो कुम्भकर्णी नींद में मस्त हैं.

बच्चों के बैगों के बढ़ते हुए बोझ के कारण लाखों नौनिहालों के स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ रहा है. आमतौर पर भारी वजन  से बच्चों के रीढ़ की हड्डी और बैकबोन में तकलीफ की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं. लेकिन विद्यालयों की मनमानी के चलते किसी की भी ना तो सुनी जा रही है ना ही कोई बात मानी जा रही है. इन स्कूलों के सामने बच्चे और अभिभावक दोनों ही मजबूर हैं. मुश्किलें यहीं नहीं थमती ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर कब तक मासूमों पर पड़ता रहेगा बस्ते का बोझ? आखिर कब तक सरकारी नियमों की उड़ाई जाएंगी धज्जियां?

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KNEWS !4 weeks ago

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झारखंड का रण

झारखंड विधानसभा चुनाव के राजनीतिक गुणा-भाग का दौर शुरू हो गया है. लोकसभा चुनाव के नतीजे की पैमाइश के आधार पर यह कहा जाने लगा है कि विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी दल का पलड़ा फिलहाल भारी दिखता है. इसी के मद्देनजर बीजेपी मिशन 65 प्लस का टारगेट लेकर चल रही है. लोकसभा चुनाव के नतीजों के आधार यह कहा जा रहा है कि झारखंड की 81 सीटों में से बीजेपी-आजसू को 63, विपक्ष को सिर्फ18 सीटें मिल सकती हैं. लोकसभा चुनाव में झारखंड की 14 सीटों में से बीजेपी-आजसू गठबंधन के खाते में 12 सीटें गई थीं. उसी आधार पर सीटों का आकलन किया जा रहा है.

इन चुनावों में विपक्षी महागठबंधन के खाते में सिर्फ 2 सीटें गई थीं. लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 50.96, कांग्रेस को 15.63, झामुमो को 11.51, झाविमो को 5.02 और आजसू को 4.33 फीसदी वोट मिले थे. बीजेपी लोकसभा चुनाव के इसी ट्रेंड को आधार बनाकर विधानसभा चुनावों के लिए 65 सीटों का लक्ष्य तय करते हुए अबकी बार 65 पार का नारा भी दिया है.

हालांकि, इतिहास गवाह है कि झारखंड विधानसभा चुनावों के परिणाम हमेशा से ही लोकसभा चुनावों के परिणामों से अलग रहे हैं. चुनावी जानकारों की मानें तो लोकसभा चुनाव का ट्रेंड भले ही बीजेपी को बढ़त दिखा रहा हो, लेकिन इन चुनावों में जिस तरह से विपक्षी दलों का वोट प्रतिशत बढ़ा है, वह सत्ता पक्ष की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं. ऐसे में बीजेपी-आजसू की जोड़ी विधानसभा चुनावों में इस बार क्या लोकसभा के चुनाव परिणाम दोहरा पाएगी सबकी निगाहें इसी पर लगी हुईं हैं? बीजेपी उत्साहित है, लेकिन देखना यह होगा कि उत्साह परिणाम में कितना तब्दील होंगे? यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा

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KNEWS !4 weeks ago

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क्या 'शामियाना' फार्मूले से जाएगी मंदी?

केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन के पहले देश की जनता को राहत देने की तैयारी कर ली है. इसके तहत अब देश भर के 400 जिलों में लोगों को आसान प्रकिया के तहत लोन बांटा जाएगा ताकि बाजार में अर्थव्यवस्था सुचारु बनी रहे और त्योहार के दौरान रौनक भी कायम रहे. आपको बता दें कि बाजार में मांग बढ़ाने के लिए त्योहारी सीजन में ज्यादा से ज्यादा बैंकिंग कर्ज उपलब्ध कराने के फार्मूले को सरकार इस बार भी आजमाने जा रही है. इसमें सरकारी क्षेत्र के बैंकों की भूमिका सबसे अहम होगी. इन बैंकों के प्रमुखों के साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बैठक हुई और इसमें अगले 20 दिनों के भीतर देश के 400 जिलों में 'शामियाना फार्मूले' के तहत बैंकिंग कर्ज बांटने का फैसला किया गया. कर्ज आम जनता और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को भी को भी बांटा जाएगा.

गौरतलब है कि ''बैंकों से कहा गया है कि वे नए ग्राहकों की तलाश करें...हर एक पुराने ग्राहक पर पांच नए ग्राहक खोजने का काम उन्हें करना होगा. कोशिश यह होगी कि जिन्हें कर्ज की जरुरत है उन्हें बिना किसी देरी के और समस्या के त्योहारी सीजन से पहले कर्ज मिले. बैंकों की तरफ से कई एनबीएफसी की पहचान पहले ही हो चुकी है जिन्हें वह कर्ज उपलब्ध करा सकते हैं.

हालांकि त्योहारी सीजन में सबसे ज्यादा कर्ज ऑटो और आवास के लिए लिया जाता है और इन दोनों सेक्टरों की हालत पिछले कई महीनों से लगातार बिगड़ती जा रही है. नए ग्राहक कई वजहों से सामने नहीं आ रहे हैं. बैंक पहले ही कह चुके हैं कि उनके पास एक लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि है जिसे वह कर्ज के तौर पर दे सकते हैं. हाल के दिनों में कर्ज की दर भी कम हुई है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल उठता है तो सिर्फ यही कि क्या केंद्र सरकार के शामियाना' फार्मूले से ममंदी पर पड़ेगा असर? क्या देश को मंदी से उबार पाएगा शामियाना’ फार्मूला?

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KNEWS !4 weeks ago

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एक देश एक कानून

एक देश एक कानून' यानी समान नागरिक संहिता फिर चर्चा में है. संविधान में समान नागरिक संहिता लागू करने की स्पष्ट मंशा और उद्देश्य के बावजूद राजनैतिक रूप से संवेदनशील इस मुद्दे पर पिछले कई वर्षो से सरकारें सीधे तौर पर कोई कदम उठाने से बचती रही हैं. हिंदुस्तान में एक यूनिफॉर्म सिविल कोड यानि की एक देश, एक कानून की मांग लंबे समय से चल रही है.देश की सर्वोच्च अदालत भी सरकार से यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाने को कह चुकी है. लेकिन अभी तक देश के नागरिकों को यूनिफॉर्म सिविल कोड नहीं मिला है. वहीं, गोवा में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है.

गोवा हिंदुस्तान का एक ऐसा अकेला राज्य है, जहां पर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है. भारतीय संविधान में गोवा को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है साथ ही संसद ने कानून बनाकर गोवा को पुर्तगाली सिविल कोड लागू करने का अधिकार दिया था.यह सिविल कोड आज भी गोवा में लागू है. इसको गोवा सिविल कोड के नाम से भी जाना जाता है.आपको बता दें कि गोवा साल 1961 में भारत में शामिल हुआ था.

गौरतलब है कि गोवा को छोड़कर पूरे देश में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई धर्म के लोगों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं. हिंदुओं की शादी के लिए हिंदू मैरिज एक्ट मुस्लिमों की शादी मुस्लिम पर्सनल लॉ एप्लीकेबल एक्ट और ईसाइयों के लिए इंडियन क्रिश्चियन मैरिज बनाए गए हैं. इसी तरह उत्तराधिकार और तलाक को लेकर भी सभी धर्मों के लिए अलग-अलग कानून हैं. हालांकि एक देश एक कानून को पूरे देश के अन्य राज्यों में लागू करने को लेकर कई लोगों को आपत्ति है. लेकिन कुछ लोग अभी भी इसकी मांग को लेकर अडिग हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है की क्या पूरे देश में लागू होना चाहिए एक सा कानून? देश में लागू हो सामान नागरिक संहिता या नहीं?

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KNEWS !4 weeks ago

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क्या तालमेल से बनेगा मंदिर

अयोध्या विवाद को मध्यस्थता से सुलझाने की पहल एक बार फिर से तेज हो गई है. अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला अगले कुछ महीनों में आने की उम्मीद बढ़ गई है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमें उम्मीद है कि हम अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी कर लेंगे. अयोध्या में राम मंदिर बनने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और मध्यस्थता दोनों साथ साथ चलेगी. अगर पक्ष आपसी बातचीत से मसले का समझौता करना चाहते है तो इसे कोर्ट के समक्ष रखे. आप मध्यस्थता कर सकते हैं. इसकी गोपनीयता बनी रहेगी.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने तमाम पक्षों से कह दिया है कि अयोध्या विवाद में बहस 18 अक्टूबर तक खत्म कर ली जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने तमाम पक्षों से वक्त के बारे में पूछा था. सबके जवाब आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने समय सीमा तय कर दी है. गौरतलब है कि 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए. पहला-सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा- निर्मोही अखाड़ा और तीसरा- रामलला विराजमान लेकिन इस फैसले पर बवाल अब तक कायम है.

जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को इस मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता पैनल बनाया था. हालांकि, पैनल मामले को सुलझाने के लिए किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा होता है कि क्या इस बाद बात चीत और आपसी तालमेल से बनेगी बात?

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KNEWS !4 weeks ago

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व्हाट्सएप का यूज़र्स को नया तोहफा साल के अंत में दे सकता है ये सुविधा

नई दिल्ली : व्हाट्सप्प एक नइ  सुविधा साल के अंत तक अपने यूजर्स को देने वाला है WhatsApp काफी समय से अपने यूजर्स की सुविधा के लिए पैमेंट सर्विस की लॉन्च करने की योजना बना रही है। जो कि यूजर्स और छोटे व्यापारियों के लिए काफी लाभदायक हो सकती है। वॉट्सऐप इंडिया ने कहा है कि कंपनी साल के अंत तक भारत में पेमेंट सर्विस लाने की तैयारी कर रही है। कंपनी इस सर्विस को 2017 से ही इनवाइट-ओनली बेसिस पर टेस्ट कर रही है। हालांकि, दो साल बाद भी वॉट्सऐप की ओर से ऑफिशली इसे इंडियन मार्केट में लॉन्च नहीं किया गया है।

वॉट्सऐप पेमेंट्स सर्विस की ओर से आई पिछली रिपोर्ट्स के करीब दो महीने बाद लॉन्च से जुड़ी यह जानकारी सामने आई है। पिछले अपडेट के करीब दो महीने बाद लॉन्च से जुड़ा अपडेट सामने आने के चलते अभी से कहा नहीं जा सकता कि इस सर्विस के ऑफिशल लॉन्च की टाइमलाइन क्या होगी। हालांकि, वॉट्सऐप इंडिया हेड अभिजीत बोस ने को दिए एक इंटरव्यू में नया अपडेट दिया है। इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि साल के अंत तक हम यह सर्विस यूजर्स को देंगे।' कंपनी अपने इस पेमेंट सिस्टम को वॉट्सऐप फॉर बिजनस ऐप के साथ इंटीग्रेट कर सकती है।

वॉट्सऐप अपने पेमेंट सिस्टम को भी 'एंड-टू-एंड कम्युनिकेशन साइकल' के साथ इनेबल करना चाहता है, जिससे कस्टमर्स और छोटे बिजनस के बीच ऐप की मदद से एनक्रिप्टेड पेमेंट हो सके। इसकी मदद से न सिर्फ छोटे बिजनस की सेल बढ़ेगी, बल्कि पेमेंट एक्सपीरियंस भी कहीं बेहतर हो जाएगा। अभिजीत ने कहा कि वॉट्सऐप फॉर बिजनस एपीआई चैटिंग ऐप की तरह फ्री नहीं है क्योंकि बिजनस एपीआई एक पूरी तरह अलग प्रॉडक्ट है। साथ ही ऐप पर नया पेमेंट सिस्टम छोटे-बड़े सभी बिजनस को आने वाले अपडेट्स के साथ सपॉर्ट करेगा। पिछली रिपोर्ट्स के मुताबिक, वॉट्सऐप ने अपनी डेटा प्रैक्टिसेज के लिए ऑडिट भी शुरू कर दिया है।

बता दें, वॉट्सऐप ने पिछले साल अक्टूबर में कहा था कि उसने भारत में पेमेंट्स से संबंधित डेटा को स्टोर करने के लिए एक सिस्टम डिवेलप किया है। इसकी पेमेंट सर्विस का मुकाबला पेटीएम, फोनपे और गूगल पे से होगा। उसका कहना था कि यह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ऐसे डेटा को देश में स्टोर करने की पॉलिसी के अनुसार है। RBI और NPCI ने कमर्शल डेटा को देश में स्टोर करने को अनिवार्य बनाया है, लेकिन भारत पर्सनल डेटा की सुरक्षा पर भी पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल के जरिए सुनिश्चित करना चाहता है। बताते चलें कि वॉट्सऐप के लिए भारत दुनिया में सबसे बड़ा मार्केट है।

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KNEWS !4 weeks ago

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गूगल का Google for India,दिया भारत को तोहफा , भारत में लॉन्च की कई नई सेवा, जानिये क्या कुछ है खास

नई दिल्ली:गूगल ने ऑर्गनाइज़ किया google for india इवेंट  जिसमे कई  सेवाएं लॉन्च की गई । ये प्रोडक्ट खास भारत को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इस इवेंट में खास ये रहा कि अब वोडाफोन आईडिया कस्टमर्स बिना इंटरनेट के गूगल असिस्टेंट यूज कर पाएंगे। कंपनी ने वोडा आईडिया के साथ मिल कर एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। इस नंबर पर कॉल करके कस्टमर्स फ्री में तमाम तरह की जानकारी पा सकते हैं। गूगल ने कहा है कि Google Assistant अब 30 भाषाओं में 80 देशों में यूज किया जाता है। भारत में दो साल पहले गूगल अस्सिटेंट लॉन्च किया गया था। अब भारत के लिए फोन लाइन गूगल असिस्टेंट लॉन्च किया गया है।

गूगल ने वोडाफोन के साथ मिल कर फोन लाइन असिस्टेंट लॉन्च किया है। इसके लिए आपको कोई पैसे नहीं देने होंगे. इसके लिए किसी तरह के इंटरनेट कनेक्शन की भी जरूरत नहीं होगी  .आप इस नंबर पर कॉल करके जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके लिए गूगल ने वोडाफोन और आईडिया के साथ पार्टनरशिप की है। इसके तहत न्यूज और वेदर फोरकास्ट भी जान सकते हैं। ये हिंदी और इंग्लिश के लिए है। इसे सिर्फ वोडाफोन आईडिया यूजर्स ही यूज कर सकते हैं।

गूगल ने गूगल पे प्लेटफॉर्म पर टोकनाइज्ड कार्ड की शुरूआत भी की है। इसमें आपके कार्ड का वर्चुअल नंबर होगा। आप सिर्फ स्कैन कर और NFC के जरिए पेमेंट कर सकेंगे। 2000 रुपए तक के पेमेंट के लिए आपको पासवर्ड भी नहीं देना होगा। गूगल ने गूगल पे प्लेटफॉर्म पर जॉब्स स्पॉट नाम का टूल लॉन्च किया है। इसके जरिए रिटेल, हॉस्पिटालिटी जैसी इंडस्ट्री में इंट्री लेवल की नौकरी खोजी जा सकेंगी। इसके साथ ही गूगल असिसटेंट में भी बहुत सारी सुविधाएं दी गई हैं। 

इसमें हिंदी को अंग्रेजी में और अंग्रेजी को हिंदी में बोलकर बदला जा सकेगा। मतलब अगर आप हिंदी में कुछ बोलेंगे तो गूगल उसका ट्रांसलेशन अंग्रेजी में कर देगा। गूगल असिसटेंट आपसे हिंदी में भी बात करेगा। गूगल असिसटेंट पर पूरे विश्व में उपयोग की जाने वाली भाषा हिंदी बन गई है। गूगल लेंस के जरिए अब हिंदी शब्द खोजे जा सकते हैं। ये उन्हें पढ़कर सुनाएगा। गूगल ने बच्चों के लिए बोलो ऐप भी लॉन्च किया था। इसके जरिए बच्चे अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं। इसमें अब और भाषाएं जोड़ी गई हैं। इवेंट के दौरान गूगल ने गूगल सर्च को भी लेकर नए बदलावों का ऐलान किया है। कंपनी ने गूगल लेंस में कुछ नए फीचर्स को ऐड किया है। अब यूजर्स किसी बोर्ड पर लिखे कॉन्टेंट को देख कर रियल टाइम ट्रांस्लेट कर सकते हैं। साथ ही ट्रांसलेशन को लाइव सुना भी जा सकता है,  ये फीचर तीन भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगा। 

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KNEWS !4 weeks ago

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जोश-ए-जवानी

भारत में ऐसे लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जिनमें सेक्स के प्रति इच्छा में कमी देखी जा रही है और ज्यादातर लोग अपराधबोध की वजह से इस बारे में खुलकर बात भी नहीं कर पाते हैं लेकिन क्या आप जानते है कैसे सेक्स आपकी कैलोरी बर्न करने में मदद करता है, दरअसल कुछ वक्त पहले एक स्टडी सामने आई थी, जिसमें कहा गया कि सेक्स से कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती