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21 वी. सदी की लक्ष्मी, "लक्ष्मी बाई"

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Reported by Knews

Updated: Apr 25-2019 11:38:50am
luxmi acid attack victim

नई दिल्ली : बहुत चुलबुली,जिंदगी में कुछ करने का सपना रखने वाली लक्ष्मी जब उसकी उम्र 15 साल थी और वो 7वीं कक्षा में पढ़ती थी..उसकी उम्र के दोगुने एक व्‍यक्ति ने उसे शादी के लिये प्रपोज किया। लक्ष्‍मी ने उसे इंकार कर दिया...जिसे युवक बर्दाशत नही कर सका और   जिसके बाद युवक अपने छोटे भाई की गर्लफ्रेंड के साथ आया और उसे धक्‍का दे दिया...धक्‍का लगते ही लक्ष्‍मी सड़क पर गिर गई और उस युवक ने उसके उपर तेजाब फेंक दिया...

 

लक्ष्‍मी ने बताया की मैने अपनी आंखो को तुरन्त हाथ आँखों से ढक दिया था जिसके कारण मेरी आंखे बच पाई और आज मै आप लोगों को देख और समझ पा रही हूं। उसने बताया कि पहले तो मुझे ठंडा सा लगा है फिर मेरा शरीर तेजी से जलने लगा था। कुछ ही सेकण्ड में मेरे चेहरे और कान के हिस्सों से मांस जलकर जमीन पर गिरने लगा एसिड बहुत तेज था जिसकी वजह से चमड़ी के साथ-साथ मेरी हड्डियां भी गलनी शुरू हो गई थीं... लक्ष्मी 2 महीने से ज्‍यादा समय तक राम मनोहर लोहिया अस्‍पताल में भर्ती रहीं। अस्‍पताल से निकलने के बाद घर आकर जब उन्‍होंने शीशा देखा तो उन्‍हें अहसास हो गया कि उनकी जिंदगी अब  बर्बाद हो चुकी है...

 

आलोक दीक्षित कानपुर के रहने वाले हैं और पत्रकार रह चुके हैं। उनकी मुलाकात लक्ष्मी से तेजाब हमलों को रोकने की एक मुहिम के दौरान हुई और फिर उन्हें एक दूसरे से प्यार हो गया.. और अब इन दोनों की एक बेटी पीहू भी है...दोनो अपने  अपने छोटे से दफ्तर से मिल कर तेजाब हमलों के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं। उनकी इस मुहिम से तेजाब हमलों की लगभग 50 पीड़ित जुड़ी हुई हैं।

 

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लक्ष्मी इस मुहिम का चेहरा है जो एसिड अटैक की पीड़ितों को मदद और आर्थिक सहायता मुहैया कराती है... आलोक दीक्षित बताते हैं कि लक्ष्‍मी ने दूसरी पीड़ित महिलाओं को भी आत्मविश्वास दिया है जो उन्हें उम्मीद की किरण के तौर पर देखती हैं। लक्ष्मी ने इन महिलाओं को घर से बाहर निकलने की ताकत दी है...
 

जीवन जीने की उसकी हिम्मत और इच्छाशक्ति निश्चित रूप से सराहना के लायक है। लक्ष्मी ने एक कारण के साथ जीने की चुनौती उठाई सर्वोच्च न्यायालय को केंद्र और राज्य सरकारों को एसिड की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया...

 

दिल्ली में एक कैंटीन खोली, जिसके सभी कर्मचारी एसिड अटैक पीड़ित हैं।

लक्ष्मी अब एक एनजीओ, छांव फाउंडेशन चलाती हैं, जहां लक्ष्मी निदेशक हैं और यह भारत में एसिड हमलों से बचे लोगों की मदद करता है...

2014 में यूएस फर्स्ट लेडी मिशेल ओबामा द्वारा लक्ष्मी को इंटरनेशनल वीर ऑफ करेज अवार्ड भी मिला..

फैशन ब्रांड चिरायु एन दिवा का एक नया अभियान 'फेस ऑफ करेज' अब लक्ष्मी के रूप में उनका प्रवक्ता बन गया है, जो उन्हें एक फैशन ब्रांड के राजदूत के रूप में सेवा देने वाला पहला एसिड अटैक पीड़ित बना।

कुदोस टू वीवा एन दिवा इस साहसी और सहायक कदम के लिए जो कई अन्य लोगों को जीवन में हार न मानने के लिए प्रेरित करेगा...