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लोकसभा चुनाव: जानिए प्रयागराज की दो सीटों के सियासी मायने और समीकरण

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Reported by Knews

Updated: May 07-2019 03:33:28pm
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लोकसभा चुनाव के पांच चरण संपन्न हो चुके हैं और शेष दो चरणों के लिए प्रत्याशियों ने कमर कस ली है. 2014 के लोकसभा चुनाव में जहां मोदी रथ पर सवार भाजपा ने एक तरफा माहौल बना दिया था, वहीं 2019 लोकसभा चुनाव में कई सियासी सूरमाओं की प्रतिष्ठा दांव पर है. इस बीच अगर प्रयागराज की दो सीटों की बात करें तो यहां 12 मई को छठवें चरण में मतदान होना है. नेहरु गांधी खानदान का पैतृक शहर होने और प्रियंका गांधी के प्रयागराज से चुनावी आगाज करने के चलते कांग्रेस के लिए दोनों ही सीटें नाक का सवाल बनी हुई हैं. वहीं सपा और बसपा गठबंधन के लिए भी फूलपुर सीट को बचाए रखने और इलाहाबाद संसदीय सीट जीतने के खास मायने हैं. जबकि भाजपा के लिए भी ये दोनों सीटें प्रतिष्ठा का सबब बनी हुई हैं.

बीते लोकसभा चुनाव में प्रयागराज जिले की दोनों संसदीय सीटों इलाहाबाद और फूलपुर पर भारतीय जनता पार्टी ने अपना परचम लहराया था. लेकिन फूलपुर उपचुनाव में इस संसदीय सीट पर सपा का कब्जा हो गया. लेकिन बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में महागठबंधन के सामने आने और मोदी की एयर स्ट्राइक के बाद दोनों ही लोकसभा सीटों पर रोचक मुकाबला होने की उम्मीद है. इलाहाबाद संसदीय सीट के लिए बीजेपी ने अपना उम्मीदवार उत्तर-प्रदेश सरकार में पर्यटन मंत्री रही रीता बहुगुणा जोशी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि सपा बसपा गठबंधन से राजेन्द्र पटेल, कांग्रेस से योगेश शुक्ला और आम आदमी पार्टी ने भवानी मां को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. आइए जानते हैं  इलाहाबाद संसदीय सीट के असल मायने और मुद्दे क्या है?  

दरअसल इलाहाबाद लोकसभा सीट से देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी, बसपा संस्थापक काशी राम, अमिताभ बच्चन, पूर्व सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा और सपा नेता रेवती रमण जैसे दिग्गज चुनाव लड़ चुके हैं, जिससे यह सीट हमेशा से ही एक हाईप्रोफाइल सीट रही है. इस सीट पर 2014 में श्यामाचरण गुप्ता ने लंबे समय बाद भाजपा को जीत दिलाई.

इससे पहले डॉ. मुरली मनोहर जोशी को हराकर लगातार दो बार इलाहाबाद संसदीय सीट पर सपा के रेवती रमण सिंह जीते थे. 2014 में सपा ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और मैदान में उतारा. लेकिन भाजपा की लहर में कुंवर रेवती रमण सिंह को हार का सामना करना पड़ा. भाजपा के टिकट पर श्यामाचरण गुप्ता मैदान में उतरे और 3,13,772  वोट जीतकर सांसद चुने गए, जबकि सपा के रेवती रमण सिंह को 2,51,763 वोट मिले थे.

वहीं इसी सीट पर बसपा से केशरी देवी पटेल 1,62,073  वोट पाकर तीसरे नंबर पर रही. उस वक्त कांग्रेस उम्मीदवार रहे नंद गोपाल गुप्ता नंदी को चौथे स्थान पर थे. लेकिन अब परिस्थतियां बदली हैं. भाजपा सांसद रहे श्यामाचरण पार्टी छोड़ बांदा से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं. वहीं इलाहाबाद संसदीय सीट के मुद्दों की बात करें तो औद्योगिक क्षेत्र नैनी बंदी के कगार पर है जो कि चुनाव में बड़ा मुद्दा होगा. यमुनापार इलाके में पेयजल संकट और सिंचाई का संकट भी सालों से बना हुआ है. कई औद्योगिक इकाइयों के बंद होने से बढ़ी बेरोजगारी भी इस सीट का बड़ा मुद्दा होगा. साथ ही यमुनापार को अलग जिला घोषित करने की भी मांग को भी राजनीतिक पार्टियां चुनावी मुद्दा बना सकती हैं.