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Saturday ,19 Oct 2019

किस ओर देश की शिक्षा?

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Reported by Knews

Updated: Sep 19-2019 03:45:23pm

एक तरफ देश की केंद्र और राज्य सरकार शिक्षा को लेकर नए-नए अभियान छेड़ती है. लेकिन शिक्षा की तस्वीर है कि बदलने का नाम नहीं ले रही.ये तस्वीर सुधरने के बजाय दिन-पर दिन बिगड़ती नजर आ रही है.कहते हैं शिक्षा की बुनियाद मजबूत हो तो, आगे का स्तर अच्छा होता है. लेकिन क्या किया जाए जब बुनियादी शिक्षा के आभाव में मासूमों का भविष्य अँधेरे में डूब रहा है. सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद शिक्षा के प्रति कोई खास सुधार देश में देखने को नहीं मिल रहा .ये तो बात हुई बुनियादी शिक्षा की.

अब जरा नजर डालते हैं हायर एजुकेशन पर.. इसके हालात तो बुनियादी शिक्षा से भी ज्यादा गए बीते हैं. अगर हम कहें कि शिक्षा के मामले में भारत को जोरदार झटका लगा है तो ये बात बिलकुल भी गलत नहीं होगी..क्योंकि दुनिया भर की 100 तो छोड़िये 300 युनिवर्सिटी में एक भी भारतीय युनिवर्सिटी नहीं है. ऐसा 2012 के बाद पहली बार हुआ है.

रैंकिंग सर्वे के मुताबिक बात करें तो भारतीय संस्थान अंतराष्ट्रीय दृष्टिकोण के मामले में पिछड़ रहे हैं. जबकि सरकार की कोशिश है कि कम आय और विकासशील देशों के लिए भारत एक बेहतर देश बने लेकिन ऐसा होना आसान नहीं दिखता. यह काफ़ी निराशाजनक है कि इस साल भारत को टॉप 300 रैंकिंग में भी जगह नहीं मिली है. याद दिला दें कि इस साल आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उच्च शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर जोर दिया था. साथ ही उच्च शिक्षा के लिए 400 करोड़ रुपये खर्च करने की भी बात कही थी. जिसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि सरकार तो कोशिशें कर रही है, फिर ये कोशिशें रंग क्यों नहीं ला रहीं? आखिर कहां रह जा रही है कमी? आखिर किस ओर जा रहा देश का भविष्य? ये सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब मिलना सबसे ज्यादा जरूरी है

कानपुर से नीतिका श्रीवास्तव की रिपोर्ट