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मौत के-वे

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Reported by Knews

Updated: Sep 21-2019 03:53:14pm

नई दिल्लीI देश की राजधानी नई दिल्ली से उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले यमुना एक्सप्रेस-वे पर लगातार हो रही दुर्घटनाएं चिंता का विषय बन चुकी हैं. जनवरी से जून महीने में ही यमुना एक्सप्रेस-वे पर छोटी-बड़ी 95 दुर्घटनाएं हो चुकीं हैं. जिसमें लगभग 94 लोगों की जान जा चुकी है. यूपी ट्रैफिक पुलिस निदेशालय की आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जून महीने तक यमुना एक्सप्रेस-वे पर 95 सड़क दुर्घटनाएं हुईं. इनमें 94 लोगों की जान चली गई. ट्रैफिक पुलिस निदेशालय के यह आंकड़े काफी दिल दहलाने वाले हैं. इनमें 120 लोग घायल भी हुए हैं.165 किमी लंबे इस एक्सप्रेस वे की लागत 128.39 अरब रुपये थी.

इसे बनाने का मकसद था दिल्ली और आगरा के बीच की दूरी घटाकर कम समय में लोगों को आनंददायक सफर मुहैया कराना, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, यह एक्सप्रेस वे मौत का हाईवे बनता चला गया. हालात यह हो गए हैं कि लगभग हर दिन ही इस हाईवे पर कोई न कोई अपनी जान गंवा रहा है. अब तक सामने आई सड़क हादसों की घटनाओं पर गौर करें तो सिर्फ 1 जून, 2019 से 8 जुलाई, 2019 के बीच ही इस हाईवे पर कई सड़क हादसे हो चुके हैं. इनमें करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है.

हाइवेस पर लगातार बढ़ती दुर्घटनांए कई मौतों का सबब बन रही हैं. देखा जाए तो पूरे देश में हाइवे में एक्सीडेंट होने की वजह से मौत के आंकड़ों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है. यमुना एक्सप्रेस वे के 165 किमी लंबे सफर में पिछले कई वर्षों में हुए हादसों के आकड़े डरावने हैं. बता दें कि हर साल होने वाले हादसों में से करीब 23 फीसद हादसे ओवरस्पीड में झपकी और 12 फीसद हादसे टायर फटने के कारण होते हैं. इनके लिए सीधे तौर पर खुद हम जिम्मेदार हैं. एक्सप्रेस वे पर चढ़ते ही गाड़ी टॉप गियर में आ जाती है. स्पीडोमीटर की सुई नीचे नहीं उतरती ऐसे में रास्ते में ब्रेक लेने की जरूरत भी नहीं समझते. लगातार हादसे हो रहे हैं. इसके बाद भी हम न गति सीमा का ध्यान रखते हैं और न ही गाड़ी के रखरखाव का जबकि देश का कोई भी एक्सप्रेस वे हो, लेकिन उस पर सुरक्षित सफर करने को सावधानी ही एकमात्र विकल्प है.