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हुमायूँ मकबरे को राष्ट्र धरोहर की सूची से हटाने की मांग : शिया सेंण्ट्रल वक्फ बोर्ड

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Reported by Knews

Updated: Oct 25-2017 09:25:35am

 

उत्तर प्रदेश शिया सेंण्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसींम रिज़वी ने बादशाह हुमायूँ के मकबरे को राष्ट्र धरोहर की सूची से हटाने के लिये देश के प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि दिल्ली में पुराने कब्रिस्तानों में जगह खत्म हो जाने के कारण वर्तमान में मुसलमानों को कब्रों के लिये जगह उपलब्ध करायी जाये।

 

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रिजवी ने कहा है कि दिल्ली में रहने वाले लाखों मुसलमानों को मरने के बाद कब्र की जगह पाने के लिये बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़  रहा है। इनका कहना है कि पुराने कब्रिस्ताने पूरी तरह से भर चुके है और वहां अब जगह नही है कि किसी और को नयी कब्र बनायी जायें। वक्फ बोर्ड द्वारा दिल्ली से सटे शहरों की सूची का अवलोकन करने के बाद ये पता चला है कि उत्तर प्रदेश सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड के पास दिल्ली के पास किसी जगह पर कब्रिस्तान बनाने के लिये संपत्ति उपलब्ध नही है।

 

और ये मुसलमान समुदाय की सबसे बड़ी गंभीर समस्या है जिसका निषकर्ष जल्द ही होना चाहिये। इसलिय वसीम रिजवी में जगह के अभाव को देखते हुये पीएम मोदी से दिल्ली में बने हुमायूँ का मकबरा दरगाह जो कि निजामुद्दीन मथुरा रोड नई दिल्ली में है। इसमे कब्र बनाने की रिजवी ने  लिय बोर्ड के अध्यक्ष ने अनुरोध किया है। तर्क देते हुये रिजवी ने बताया कि मकबरा इतना बड़ा है जिसका क्षेत्र लगभग 35 एकड़ और ये कोई धार्मिक स्थल भी नही। जिससे किसी को कोई मेरे ख्याल से होनी चाहिए।

 

वैसे भी ये एक कब्र ही है जो कि कब्रितान की श्रेणी में आता है। वैस भी मुग ल  दूसरे देशों से भारत को लूटने आये थे। मुगलों ने भारत में बहुत राज किया है यहां तक की भारतीय राजाओं से उनकी राज गद्दी, उनका राज्य सबकुछ इन लुटेरों ने छीन लिया था। मुगलों ने भारतीयों की खून पसीने की कमाई से लगान वसूल कर कितने सालों तक भारत में हुकूमत।

 

भारतीय संस्कृतियों को मुगलों ने बहुत नुकसान पहुँचाया है। इतिहास कारों का कहना है कि मुगलों द्वारा एक धर्म विशेष के द्वारा तीन हज़ार मंदिरों को अपनी ताकत का नाजायज़ फायदा उठाते हुये ध्वस्त किया गया। रिजवी ने कहा मुगल बादशाह न तो मुस्लिम धर्म के प्रचारक थे और नही भारत के अच्छे बादशाह इस कारण हिन्दुस्तान में बने उनके अनेक भव्य मकबरे राष्ट्र को धरोहर नही हो सकते।     

 

बोर्ड ने बादशाहहुमायूँ के मकबरे को राष्ट्र धरोहर की सूची से हटाने के साथ कहा कि हुमॉयु के कब्र पर बनी इमारत को गिरा दिया जाये और पूरी जगह दिल्ली के मुसलमानों को कब्रिस्तान के लिये दे दी जाये। इन्होने कहा कि हुमॉयु का मकबरा ध्वस्त करने मे कोई इस्लामिक बाध्यता नही है क्योंकि वो जिस मुसलमान फिरके से संबंधित था वहां किसी के मकबरे को मान्यता नही दी जाती है।

 

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उदाहरण देते हुये बताया कि सऊदी अरब में स्थित अल्लाह के आखिरी तथा रसूल के  मुसलमानों की बेटी और सुन्नू मुसलमानों के तीसरे खलीफा तथा रसूल के परिवार के अन्य महत्वपूर्ण लोगों की कब्रें है। उक्त जगह पर एक भव्य रौज़ा मकबरा बना हुआ था, जिसे जन्नतुल बकी के नाम से जाना जाता था । उक्त रौज़े को 21 अप्रैल 1925 को इस्लामिक मान्यता न देते हुये सऊदी अरब इस्लामिक शासक द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था। इसको नजीर मानते हुए हुमायूँ के मकबरे को ध्वस्त किये जाने में उन मुस्लमानों कोई आपत्ति नही होनी चाहिए

 

जो कि हुमायूँ द्वारा मानने वाले मुस्लिम फिरके से संबंधित है। बोर्ड का साफ कहना है कि सरकार को इससे कोई खास वित्त्तीय फायदा तो नही है लेकिन इसके रख रखाव देखभाल में जरुर सरकार को लाखों रुपया खर्च हो रहा है। इन्होने कहा कि ये भारतवासियों का पैसा है और ये भारत के विकास के लिये उपयोग होना चाहिये। लुटेरे और बेगैरतों पर ये पैसा नही खर्च होना चाहिये।

 

इसलिये बोर्ड द्वारा दिया गया पीएम को प्रस्ताव दिल्ली में रहने वाले लाखों मुसलमानों की परेशानियों को हल करने में सार्थक साबित होगा। अगर सरकार इस प्रस्ताव से सहमत होती है तो आने वाले सौ सालों तक दिल्ली के मुसलमानों को कब्र के लिये कोई परेशानी नही होगी। इसलिये सरकार से पूरे मुस्लिम भाईयों द्वारा की गयी निवदेन की स्वीकृति दी जाये।