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Sunday ,22 Sep 2019

भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार का कदम

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Reported by Knews

Updated: Sep 10-2019 04:38:12pm

केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले घपले व भ्रष्टाचार को रोकने लिये नकेल कसनी शुरू हो गयी है. इसके लिए सरकार ने पंचायत स्तर पर नई व्यवस्था लागू की है, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम कसी जा सकेगी और उसकी शुरुआत भी हो चुकी है. पचास हजार से भी ज्यादा ग्राम पंचायतों के खाते किए गए ठप कर दिया गया है...केंद्र सरकार के निर्देश पर प्रदेश के पंचायतीराज विभाग ने इन खातों के संचालन पर रोक लगाई है. पंचयतों में ऑनलाइन भुगतान के लिए पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम यानि कि PFMS लागू न करने की वजह से यह कार्यवाई की गयी है. बता दें कि सरकार ने 15 अगस्त से पूरे देश की ग्राम पंचयतों में  PFMS अनिवार्य कर दिया है. इस कारण प्रदेश में 56 हजार से भी ज्यादा खाते ठप हो गए हैं. जिससे प्रधानों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

बताते चलें कि संचालन ठप होने की वजह से ग्राम सभाओं के जरूरी काम नहीं हो पा रहे हैं. संगठन ने हाल ही में पंचायती राज निदेशक को एक पत्र भी लिखा गया था. इसमें कहा गया था कि पीएफएमएस को लागू करने के लिए ग्राम प्रधान व पंचायत सचिवों के साथ पंचायतों के काम कराने वाले वेंडरों व ठेकेदारों के डिजिटल सिग्नेचर अनिवार्य किये गये हैं मगर इनमें से अधिकांश लोग कम्प्यूटर का संचालन ही नहीं जानते यही नहीं अधिकांश पंचायतों में कम्प्यूटर ही नहीं हैं.

इससे पहले केन्द्र और प्रदेश सरकार से पंचायतों को मिलने वाली धनराशि कहां कितनी खपाई गई और जमीनी हकीकत क्या है इसके लिए हर जिले में टास्क फोर्स के गठन के लिए प्रक्रिया शुरू किये जाने के भी निर्देश सरकार दे चुकी है वर्तमान प्रधानों की माली हालत उनके प्रधान बनने से पहले क्या थी और आय का सोत्र क्या था, पांच साल में प्रधानों के पास क्या क्या संसाधन आए और उसका जरिया क्या था, प्रधानों के व्यक्तिगत खातों से पहले कितनी जमा निकासी थी और प्रधान बनने के बाद अब तक क्या रही, लग्जरी गाड़ी और जमीन खरीद कितनी हुई. इन सब बिंदुओं को जांच में शामिल किया जाएगा.. सूत्रों के अनुसार पांच साल में अधिकतर प्रधानों की सम्पत्तियों में कई गुना इजाफा हुआ है इसका भी जरिया पता लगाया जाएगा.

केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं में पंचायतों को मिली धनराशि की भी जांच इस दायरे में शामिल है. विकास कार्य कितना हुआ, गुणवत्ता है कि नहीं और पंचायतों के खातों से हुए लेनदेन का ब्यौरा भी जुटाया जाएगा. माना जा रहा है कि आय से अधिक और बेनामी सम्पत्ति वाले प्रधानों को आगामी पंचायत चुनाव लड़ने से भी वंचित किया जा सकता है. कुल मिलाकर सरकार अब भ्र्ष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए एक्टिव हो चुकी है. जिसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या सरकार का ये कदम लाएगा रंग? क्या सरकार इस तरह लगा पाएगी ग्राम पंचायतों के भ्रष्टाचार पर अंकुश?

कानपुर से नीतिका श्रीवास्तव की रिपोर्ट