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Saturday ,19 Oct 2019

ऑपरेशन ‘रामा’

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Reported by Knews

Updated: Sep 19-2019 03:35:02pm

कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस की सरकार गिरने और भाजपा की सरकार बनने के बाद  बीजेपी की निगाहें अब राजस्थान और मध्यप्रदेश पर  टिक गई हैं. मध्यप्रदेश की परिस्थितियां भी कर्नाटक के जैसी ही हैं. जहाँ कुल 231 सीटों में कांग्रेस और बीजेपी के बीच काफ़ी कम अंतर है. साल 2018 में हुए विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को जहां 114 सीटें मिलीं, वहीं बीजेपी के पास 108 सीटें हैं. ऐसे में बहुजन समाज पार्टी के दो, समाजवादी पार्टी के एक और निर्दलीय चार विधायकों की अहमियत काफ़ी बढ़ गई है. इनमें से एक निर्दलीय विधायक को तो मंत्रिमंडल में शामिल भी कर लिया गया है.

कर्नाटक की कामयाबी के बाद बीजेपी की महत्वकाँक्षा कांग्रेस शासित राज्यों में काफ़ी बढ़ गई है. इसलिए कांग्रेस ने इन राज्यों में अपने विधायकों को बचाये रखने की क़वायद शुरू कर दी है. वहीं राजस्थान में हालात थोड़े मुश्किल हैं क्योंकि सत्तारूढ़ कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीटों का अंतर ज़्यादा है. यहाँ कांग्रेस के पास 112 सीटें हैं. जबकि बीजेपी के पास महज 72 सीट हैं. हां, इस अंतर को कम करने के लिए अगर दूसरे दलों के विधायक भी बीजेपी के पाले में शामिल हो गए तो वहां भी बीजेपी की आंधी को रोक पाना मुश्किल होगा

बात मध्यप्रदेश की करें तो कहा जाता है कि यहां कांग्रेस के अंदर ही कई ख़ेमे हैं. एक मुख्यमंत्री कमलनाथ का, दूसरा दिग्विजय सिंह का. कमलनाथ अभी भी मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बने हुए हैं. यहां आधिकारिक तौर पर इस प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का कोई मुखिया नहीं है. कांग्रेस की अंदरूनी सांगठनिक खींचा तानी से कोई प्रदेश नहीं बचा हुआ है. चाहे वो पंजाब हो, राजस्थान हो या फिर मध्यप्रदेश. यहाँ तक कि छत्तीसगढ़ में प्रदेश अध्यक्ष रहे भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया गया. काफ़ी महीनों के बाद नए प्रदेश अध्यक्ष को नियुक्त किया गया. लेकिन अब बीजेपी का सारा ध्यान मध्यप्रदेश में सत्ता हासिल करने पर लगा हुआ है.ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या ऑपरेशन 'लोटस' के बाद ऑपरेशन 'रामा' हो पाएगा सफल? क्या बीजेपी को  मिलेगा इसका फायदा? इसका जवाब तो आने वाला समय ही देगा