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Saturday ,19 Oct 2019

एक देश एक कानून

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Reported by Knews

Updated: Sep 20-2019 04:20:16pm

एक देश एक कानून' यानी समान नागरिक संहिता फिर चर्चा में है. संविधान में समान नागरिक संहिता लागू करने की स्पष्ट मंशा और उद्देश्य के बावजूद राजनैतिक रूप से संवेदनशील इस मुद्दे पर पिछले कई वर्षो से सरकारें सीधे तौर पर कोई कदम उठाने से बचती रही हैं. हिंदुस्तान में एक यूनिफॉर्म सिविल कोड यानि की एक देश, एक कानून की मांग लंबे समय से चल रही है.देश की सर्वोच्च अदालत भी सरकार से यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाने को कह चुकी है. लेकिन अभी तक देश के नागरिकों को यूनिफॉर्म सिविल कोड नहीं मिला है. वहीं, गोवा में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है.

गोवा हिंदुस्तान का एक ऐसा अकेला राज्य है, जहां पर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है. भारतीय संविधान में गोवा को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है साथ ही संसद ने कानून बनाकर गोवा को पुर्तगाली सिविल कोड लागू करने का अधिकार दिया था.यह सिविल कोड आज भी गोवा में लागू है. इसको गोवा सिविल कोड के नाम से भी जाना जाता है.आपको बता दें कि गोवा साल 1961 में भारत में शामिल हुआ था.

गौरतलब है कि गोवा को छोड़कर पूरे देश में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई धर्म के लोगों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं. हिंदुओं की शादी के लिए हिंदू मैरिज एक्ट मुस्लिमों की शादी मुस्लिम पर्सनल लॉ एप्लीकेबल एक्ट और ईसाइयों के लिए इंडियन क्रिश्चियन मैरिज बनाए गए हैं. इसी तरह उत्तराधिकार और तलाक को लेकर भी सभी धर्मों के लिए अलग-अलग कानून हैं. हालांकि एक देश एक कानून को पूरे देश के अन्य राज्यों में लागू करने को लेकर कई लोगों को आपत्ति है. लेकिन कुछ लोग अभी भी इसकी मांग को लेकर अडिग हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है की क्या पूरे देश में लागू होना चाहिए एक सा कानून? देश में लागू हो सामान नागरिक संहिता या नहीं?