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Monday ,16 Dec 2019

इस मेले में पान खिलाकर करेंगे प्रपोज तो चुटकी में बनेगी जोड़ी

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Reported by Knews

Updated: Mar 14-2019 04:35:18pm
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प्रेमी जोड़ों के म‍िलन के ल‍िए प्रस‍िद्ध भगोर‍िया उत्सव १४ मार्च से शुरू हो गया है। मेले में झूलों से लेकर आइस्क्रीम और गोलगप्पों का बाजार सजा रहता है। इस मेले में आने वाले युवा, युवत‍ियों को पान खाने को देते हैं, यद‍ि वह पान खा लेती है तो माना जाता है क‍ि युवती ने उस युवक को पसंद कर ल‍िया है। 

मजदूरी के लिए बाहर गए ग्रामीणों की आमद के साथ ही अब अंचल में भी ढोल-मांदल की गूंज के साथ उत्साह की कुर्राटी सुनाई देने लगी है। मजदूरी कर आए ग्रामीण अब होली तक यहीं रहेंगे। 

इस बार भगोरिया हाट राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनाव प्रचार का जरिया भी बनेगा। बाहर से आए ग्रामीणों को अपने पक्ष में करने के लिए के कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियां अपना पूरा जोर लगाएंगी। 

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भगोरिया उत्सव की हलचल पिछले एक सप्ताह से देखी जा रही है। बुधवार को छतरी चौक से लगाकर मुख्य बाजार तक के हिस्से में बड़ी संख्या में ग्रामीण खरीदारी करते नजर आए। गुरुवार को पारा, समोई, सारंगी, हरिनगर और चेनपुरा में भगोरिया हाट लग रहे हैं, जहां ग्रामीणों की कुर्राटी और ढोल-मांदल की थाम सुनाई देगी

आदिवासी संस्कृति के भगोरिया पर्व को लेकर अलग-अलग मत हैं। कुछ लोगों के अनुसार भगोरिया एक उत्सव है जो होली का ही एक रूप है। यह प्रदेश के मालवा निमाड़ अंचल के आदिवासी इलाकों में धूमधाम से मनाया जाता है। होली के १ सप्ताह पहले लगने वाले हाट-बाजार यहां मेले का रूप ले लेते हैं। 

भगोरिया मेले को लेकर मान्यता है कि इस मौके पर युवक-युवती एक दूसरे को पान खिला दें या एक दूसरे के गाल पर गुलाल लगा दें तो मान लिया जाता है कि दोनों में प्रेम हो गया है। इसके बाद वे दोनों मौका पाकर भाग जाते हैं और विवाह बंधन में बंध जाते हैं। भाग कर शादी करने के कारण ही इस पर्व को भगोरिया पर्व कहा जाता है। 

एक मान्यता ये भी है क‍ि झाबुआ जिले के भवन नामक स्थान से यह पर्व शुरू हुआ था इसलिए इसे भगोरिया कहा जाता है। 

वहीं एक मान्यता के अनुसार, पुराने समय में रिश्ता तय होने के बाद आमतौर पर दोनों परिवार के लोग मिल नहीं पाते थे। ऐसे में भगोरिया मेले के माध्यम से वर और वधू पक्ष के लोग एक-दूसरे को मिलते थे और विवाह की तैयारियां की जाती थीं।