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Saturday ,19 Oct 2019

यादव कुल में एकता के अंकुर की अकुलाहट

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Reported by Knews

Updated: Sep 21-2019 04:20:06pm

पूरे देश में चल रही मोदी की आंधी का असर कहे या लोकसभा चुनाव के बाद बसपा सुप्रीमों मायावती से मिले कड़वे सबक का नतीजा कि अब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और संप्रग अध्यक्ष शिवपाल यादव को फिर पारिवारिक एकता याद आने लगी है. कल तक एक-दूसरे को फूंटी आंख न सुहाने वाले चाचा-भतीजे को एक बार फिर परिवार की एकता की फिक्र होने लगी है.चाचा शिवपाल ने जहां मैनपुरी में कहा कि कुछ षड़यंत्रकारी लोग परिवार की एकता में बाधक है और उनकी तरफ से सुलह की पूरी गुंजाइश है. तो इधर लखनऊ में भतीजे अखिलेश ने भी चाचा को निराश नहीं किया. अखिलेश ने कहा कि सबके लिए दरवाजे खुले है, जो आना चाहे, आ सकता है. आंख बंद करके पार्टी में शामिल कर लेंगे.

दरअसल पूरे देश में चल रही बीजेपी की प्रचंड आंधी का मुकाबला करने के लिए अब विपक्षी दलों ने अपनी रणनीतियां बदलनी शुरू कर दी है. यूपी में आगामी विधानसभा उपचुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए ही अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल ने एक बार फिर साथ आने के संकेत दिए है. लोकसभा चुनाव के बाद अखिलेश यादव और शिवपाल यादव दोनों के सामने अपने-अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने की चुनौती है. यही वजह है कि दोनों के बीच जमी कड़वाहट की बर्फ पिघलनी शुरू हो गई है. हालांकि खुलकर न तो अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव का नाम लिया और न ही शिवपाल ने षड्यंत्रकारी के तौर पर किसी का नाम लिया. ऐसे में अब देखना यह है कि क्या चाचा-भतीजे अपने-अपने सारे गिले शिकवे भुलाकर एक होंगे? या नहीं.

कानपुर से ऋषभ कांत छाबड़ा की रिपोर्ट