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Friday ,15 Nov 2019

किसके मुसलमान?

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Reported by Knews

Updated: Sep 11-2019 03:54:25pm

देश में इस साल के सबसे बड़े चुनाव खत्म हो चुके हैं..बीजेपी समेत सभी विपक्ष पार्टियां अपनी अगली रणनीति बनाने में जुट गई हैं. जहां एक तरफ कुछ पार्टियों को हार का सामना करना पड़ा तो वहीं वो अब तक अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सकी हैं.ऐसे में अगर बात अब अगली रणनीति की करें तो देश के 20 प्रतिशत मुसलमानों को अपना बनाने की जंग अब तक बदस्तूर जारी है.देश के तकरीबन 20 प्रतिशत मुसलमानों को रिझाने के लिए राजनीतिक पार्टियां कोई कोर कसार नहीं छोड़ना चाहती 

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आज भारतीय राजनीति एक ऐसे दौर में है जहां कोई भी राजनीतिक पार्टी मुस्लिम समुदाय की बात नहीं करना चाहती. अब उनका इस्तेमाल बहुसंख्यक आबादी को वोट बैंक में तब्दील करने के लिए किया जा रहा है. हालांकि ऐसा भी नहीं है कि इससे पहले मुसलमान राजनीति की मुख्यधारा में शामिल थे लेकिन वे एक ऐसा ‘वोट बैंक’ ज़रूर माने जाते थे, जिसे हासिल करने के लिए तथाकथित सेक्युलर पार्टियां ख़ासा ज़ोर लगाती थीं पांच साल पहले जो मुसलमान वोट बैंक थे आज वे राजनीतिक रूप से अछूत बना दिए गए हैं. ख़ास बात यह है कि इन दोनों ही परिस्थितियों में ‘सुरक्षा’ ही उनके लिए केंद्रीय मुद्दा रही है.

देश की ज़्यादातर सियासी पार्टियां मुसलमानों का हितैषी होने का दावा करती रही हैं, लेकिन हक़ीक़त में इन्होंने मुसलमानों को ‘वोट बैंक’ से ज़्यादा कभी कुछ समझा नहीं हैं. मुस्लिम समुदाय के वास्तविक मुद्दे कभी उनके एजेंडे में रहे ही नहीं... ऐसे में देश के 20 प्रतिशत मुसलमानों को अपना बनाने की जंग तेज हो गयी है. सपा और बसपा के बाद अब RSS ने भी मुलसमानों को अपनी तरफ लाने के लिए डोरे डालना शुरू कर दिया है. ऐसे में सवाल यही उठता है कि किसके होंगे मुसलमान?