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कासगंज घटना पर गृह मंत्रालय ने मांगी यूपी सरकार से रिपोर्ट

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Reported by KNEWS

Updated: Jan 30-2018 04:17:54pm

नई दिल्ली : 26 जनवरी के मौके पर कासगंज में हुई सांप्रदायिका हिंसा को लेकर यूपी सरकार से गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट मांगी है। गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट में जवाब तलब करते हुए सवाल पूछा है कि हिंसा क्यों फैली और प्रशासन इसकों रोकने में क्यूं नाकाम साबित रहा। समय रहते ही प्रशासन ने हिंसा पर काबू क्यों नही पा पाई। जिससे स्थिती इतनी भयावह हो गई। ये सब तमाम सवाल है जो गृह मंत्रालय ने योगी सरकार से पूछा है।

 

वहीं इस घटना राजनीति थमने का नाम नही ले रही है। घटना पर केन्द्रिय राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने प्रशासन को ही कड़घरे में खड़ा कर दिया है। अब सूबे के मुखिया योगी आदित्य नाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बड़ा बयान दिया है, बरेली के डीएम ने इस हिंसा में आग में घी डालने का काम किया है। इसे लेकर बरेली जिले के जिलाधिकारी राघवेंद्र विक्रम सिंह ने सवाल पूछा है, उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा है कि मुस्लिम मोहल्लों में जबरदस्ती जुलूस ले जाने और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाने का अजीब रिवाज बन गया है। इस के बाद यह मामला और तूल पकड़ लिया।

 

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पोस्ट को लेकर विवादों में घिरे बरेली के डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह के मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लखनऊ में तलब किया है। वही डिप्टी सीएम बरेली के डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह की फेसबुक पोस्ट पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह पोस्ट किसी सियासी दल के प्रवक्ता जैसी है। एक डीएम द्वारा इस तरह का पोस्ट करना शोभा नहीं देता। वह एक जिम्मेदार पद पर हैं और उन्हे अपने पद का ख्याल रखते हुए पद की गरिमा बनाये रखनी चाहिये। उधर बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने कहा, कासगंज दंगा कांग्रेस की साजिश है गौरतलब है कि सोमवार को योगी सरकार के ही मंत्री ने अजीबो गरीब बयान दे दिया है मंत्रिमण्डल के वरिष्ठतम कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने चार दिन से जल रहे कासगंज की हालातों को ‘‘एक छोटी सी घटना’’ कहा है और मीडिया को सलाह दी है कि इसे अनावश्यक तूल न दिया जाये।

 

इसके पहले आज ही एक अन्य मंत्री मनोहर लाल पंथ ने मीडिया सवालो से उलट  पूछ लिया था कि कासगंज में क्या कोई बात हो गयी है? वहीं उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कासगंज हिंसा को सूबे के लिए कलंक बताया है। नाईक ने हिंसा को शर्मनाक बताते हुए राज्य सरकार से कहा कि प्रशासनिक मशीनरी को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे ऐसी घटनाएं फिर से ना हो। वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने हिंसा को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। गौरतलब है कि एक तरफ जहां पूरा देश गणतंत्र दिवस की खुशी मना रहा था वही कासगंज में शुक्रवार का दिन मनहुस रहा।

 

शुक्रवार  की शाम हिंसा उस वक़्त शुरू हुई जब कुछ युवक तिरंगा यात्रा निकाल रहे थे उसी दौरान बड्डूनगर इलाक़े में मुस्लिम समुदाय के कुछ युवकों के साथ उनकी झड़प हो गई। झड़प के बाद दोनों पक्षों के बीच पथराव और आगजनी की घटनाओं के अलावा गोलीबारी भी हुई। जिसमें चंदन गुप्ता नाम के एक युवक की मौत हो गई और नौशाद नाम के एक युवक गोली से गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसके बाद कासगंज में इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया और पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया। हालांकि गुस्साएं लोगों ने सार्वजनिक संपत्ति का भी नुकसान किया और शहर की कई जगह आग में सुलग रहा था।