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Sunday, 18 November 2018

हस्तशिल्प कला को पुनः संरक्षित करने की पहल

Reported by KNEWS | Updated: Mar 01-2018 12:06:24pm


रुद्रप्रयाग : उत्तराखण्ड के पहाड़ी गांवों में अनुसूचित जाति द्वारा किये जाने वाली परंपरागत दस्तकारों एवं हस्त शिल्पियों के लिए भले ही अनेक योजनाएं चलाई जा रहीं हैं, बावजूद इसके लोग इस कार्य से मुंह मोड़ रहे हैं और इसकी संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। यही कारण है कि आज परम्परागत शिल्प विलुप्त होने के कगार पर है।

 

प्रदेश के उन गांवों में बड़ी तेजी से पलायन हो रहा है जो इन दस्तकारों से जुड़े हुए हैं। अब पुनः हस्त शिल्प को संरक्षित करने और उसे नई तकनीक में उतारकर रोजगार के नये आयाम स्थापित करने की पहल शुरू हो गई है

 

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रुद्रप्रयाग जनपद में हस्त शिल्प व हथकरघा कला को संरक्षण व संवर्द्धन के साथ ही रोजगार से जोड़ने की दिशा में उद्योग विभाग द्वारा हस्त शिल्प विकास प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत यात्रा से जुडे विकासखण्ड ऊखीमठ के दस्तकारों को रोजगार की दिशा में स्वरोजगार अपनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यही नहीं चारधाम सहित 625 मंदिरों में उत्तराखण्ड के उत्पादों से बना प्रसाद योजना का भी शुभारंभ कर दिया है। यह प्रसाद रिंगाल की टोकरियों में देश, विदेश से आने वाले तीर्थ यात्रियों को दिया जायेगा। इस योजना से दस्तकारों को लाखों टोकरियां बनाने की डिमांड मिल चुकी हैं, जिससे विलुप्त होने के कगार पर यह दस्तकारी एक बार फिर पुनर्जीवित हो गई है। 

 

आधुनिक तकनीकी में हस्तशिल्प कला को संरक्षित करने और इसे रोजगार से जोड़ने की दिशा में चलाई जा रही यह योजना वास्तव में कारगर साबित होने वाली है। एक ओर जहां इस योजना में तीन माह के प्रशिक्षण के दौरान ही प्रत्येक दस्तकार को 11 हजार की प्रोत्साहन राशि दी गई। साथ ही हस्त शिल्प के उपकरण भी वितरित किए गए। वहीं अब प्रसाद योजना से इन दस्तकारों के पास लाखों टोकरियां बनाने की डिमांड मिल चुकी है। 

 

उत्तराखण्ड की पूर्ववर्ती सरकारों ने हस्तशिल्प को संरक्षित करने के लिए न जाने कितनी योजनाएं चलाई और इन योजनाओं के नाम पर लाखों-करोड़ों रूपयों के वारे-न्यारे किए गए। लेकिन हस्तशिल्प कला को संरक्षित करने में नाकाम साबित हुई, बल्कि उसके उलट यह कलाकारी विलुप्त की दहलीज पर पहुंच गई।

 

इसके चलते बड़ी मात्रा में पलायन भी हो गया। लेकिन एक बार फिर सरकार ने इसे आधुनिक तकनीक में उतारकर इसके संरक्षण और संवर्द्धन का बीड़ा उठाया है जो कारगर साबित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

                                                                                    रुद्रप्रयाग से रोहित डिमरी 


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