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Monday, 19 November 2018

शीशमबाड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर आर पार की लड़ाई को तैयार ग्रामीण

Reported by KNEWS | Updated: Mar 12-2018 06:46:49pm


विकासनगर : सियासी खींचतान और उच्च स्तर की सांठगांठ के चलते शीशमबाड़ा साॅलिड वेस्ट मेनेजमेंट प्लांट की नींव हालांकि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पड़ी लेकिन इसका श्रीगणेश मौजूदा भाजपा सरकार द्वारा किया गया। तब से लेकर अब तक दावे किये जा रहे हैं कि यह साॅलिड वेस्ट मेनेजमेंट प्लांट बेहद ही नायब व लाभदायक है।

 

लेकिन स्थानीय जनता और जानकारों के मुताबिक सभी नियमों को दरकिनार कर और जनता के यहां की ग्रामीण जनता के हितों का ध्यान न रखते हुये इसको यहां बनाया गया। जिस वजह से यहां के लोगों की इस कूड़ाघर के चलते रोजाना नई नई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसके चलते विभिन्न संगठनों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं और यहां की जनता सड़क से लेकर न्यायालय तक पहुंच सरकार से आरपार की लड़ाई का मूड बना चुकी है।

 

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इन लोगों का सीधे तौर पर आरोप है कि प्रदेश की सरकार ने न केवल करोड़ों के इस खेल में वारे न्यारे करने के लिये नियमों को ताक पर रख ब्लेकलिस्टेड कम्पनी को काम दिया, बल्कि क्षेत्र की जनता के साथ खिलवाड़ करते हुये यहां की आवोहवा में धीमा जहर घोलने का काम किया है। जिसके खिलाफ वह लोग बिगुल फुंक चुके है, जिसको लेकर वह इस आंदोलन को सड़कों पर उतरने के साथ ही अपनी लड़ाई को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने वाले हैं। इसी रणानीति को तैयार करने के लिये बीते रविवार विभिन्न संगठनों के सहयोग से एक बैठक कर चर्चा की गई, जिसमें व्यापारी वर्ग का भी सहयोग रहा और उन्होनें अपनी दुकानें बंद रखी।

 

जहां इस प्लांट के विरोध में इन लोगों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुये प्रदर्शन भी किया। हालांकि जहां एक ओर शीशमबाड़ा साॅलिड वेस्ट मेनेजमेंट प्लांट से निकलने वाली बदबू के कारण खराब हो रहे वातावरण और अन्य परेशानियों को लेकर विभिन्न संगठन लामबंद हो आंदोलन की राह अपनाने की बात कर रहे है, जो इन समस्याओं को देखकर शायद होना भी चाहिए। मगर यह आंदोलन कब परवान चढ़ेगा और इसका हल कब तक निकलेगा कुछ कहा नहीं जा सकता। तो वहीं दूसरी ओर इस प्लांट से निकलने वाली बदबू और इसकी वजह से लगातार पर्यावरण में आ रहे बदलाव के चलते प्लांट से लगते सिंघनीवाला, हसनपुर, सेलाकुई और बहादुरपुर सहित आसपास के तमाम ग्रामीण क्षेत्रों की हजारों की संख्या में रहने वाले लोगों का जीना दुश्वार होता जा रहा है।

 

जिसमें सबसे ज्यादा इस प्लांट से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित सेलाकुई की बायांखाला बस्ती प्रभावित हो रही है। जिस वजह से यहां के लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है, और उन्हें घरों में कैद होने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यहां तक की यहां के मासूम बच्चों को भी घरों में मास्क लगाकर पढ़ाई लिखाई और अन्य काम करने पड़ रहे है, साथ ही उनका बाहर खेलना कूदना तक बंद हो गया है। आलम यह हो चला है कि यहां की घरेलु महिलाओं को न केवल खाना बनाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उनकी परेशानी रोजाना बढ़ती ही जा रही है। जिस वजह से यहां की महिलाएं व बच्चे तो बीमार हो ही रहे हैं, वहीं बुजुर्ग लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

ऐसा हम खुद नहीं कह रहे बल्कि यहां रह रही इन महिलाओं के दुःख व परेशानी भरे बयान साफ बयां करते हैं कि इन लोगों को किस तरह घुट घुट कर जीना पड़ रहा है। इतना ही नहीं करीब 2500 से अधिक जनसंख्या और 300 परिवार वाली इस बस्ती में जहां पहले कभी काफी चहलकदमी हुआ करती थी, वहां अब संनाटा पसरा रहता है। इस बस्ती के बेहद करीब बने शीशमबाड़ा वेस्ट मेनेजमेंट प्लांट की वजह से यहां के लोगों का रहना तो दुभर हो रही रहा है, बल्कि अब तो यहां पर इन लोगों के यहां आने वाले मेहमान तक कतराने लगे हैं। वहीं सैना व पुलिस की तैयारियों में लगे युवाओं को भी अपनी तैयारियां करने में दिक्कते आ रही है।

 

यहां के इन प्रभावित लोगों का यहां तक कहना है कि जहां सरकार खुद पलायन रोकने की बात करती है, वहीं लोगों की जिन्दगी में धीमा जहर घोलने वाले प्लांट लगाकर न केवल उनकी व उनके मासूम बच्चों की जिन्दगी से खिलवाड़ कर रही है, बल्कि उन्हें खुद ही यहां से पलायन करने को मजबूर कर रही है। अब बड़ा सवाल यह कि सरकार ने इस प्लांट को लगाने से पहले यहां के पर्यावरण और हजारों की संख्या में रहने वाली जनता के हितों का ध्यान क्यों नहीं रखा? और क्यों प्रदेश में पहले से ही ब्लेक लिस्टेड कम्पनी को इस प्लांट को बनाने और चलाने का जिम्मा दिया गया? और सवाल यह भी करोड़ों की लागत से बने इस प्लांट की आधी अधुरी तैयारी के साथ शुरूआत क्यों की गई?

                                                                                   विकासनगर से तबरेज खान


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