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Wednesday, 15 August 2018

6.25 लाख भारतीय बच्चे हर रोज फूंकते है सिगरेट : रिपोर्ट में खुलासा

Reported by KNEWS | Updated: Mar 17-2018 04:23:07pm


नई दिल्ली : देश में बढ़ती बिमारियां किस तरह से पैर पसार रही है। ये हम आप सभी बहुत अच्छे से जानते है। आज के दौर में अधिकतर मनुष्य किसी न किसी गंभीर बिमारी से जूझ रहा है। वहीं देश में धूम्रपान का इस्तेमाल में भी लगातार इजाफा हो रहा है। वहीं 2016 में, भारत में अनुमानित 82.12 अरब सिगरेट का उत्पादन किया गया था। 2016 में दुनिया की छह सबसे बड़ी तम्बाकू कंपनियों की संयुक्त आय 346 अरब डॉलर से ज्यादा थी, जो कि भारत की सकल राष्ट्रीय आय का 15% के बराबर है।

 

वहीं ग्लोबल टोबैको एटलस की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 10-14 साल की आयु के 625,000 बच्चे धूम्रपान करने वालों का घर है। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी (एसीएस) और यूएस आधारित महत्वपूर्ण रणनीतियाँ द्वारा तैयार किए गए तम्बाकू एटलस के मुताबिक, हर साल तंबाकू से संबंधित बीमारियों से 932,600 भारतीय जीवित रह जाते हैं, जो हफ्ते में 17,887 लोगों की मृत्यु का दावा करते हैं। 103 मिलियन वयस्कों (15 साल और उससे ऊपर) के साथ अब भी दैनिक धूम्रपान करते हैं,

 

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भारत में धूम्रपान करने की आर्थिक लागत 1,818,691 मिलियन है। इसमें प्रारंभिक मृत्यु और बीमारी से स्वास्थ्य सेवा की प्रत्यक्ष लागत और खो उत्पादकता की अप्रत्यक्ष लागत शामिल है। 2016 में, भारत में अनुमानित 82.12 अरब सिगरेट का उत्पादन किया गया था।  हालांकि, भारत में मध्यम मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) देशों की तुलना में भारत में सिगरेट कम धूम्रपान करते हैं, लेकिन देश में 429, 500 से ज्यादा लड़के और 195,500 लड़कियां रोजाना पफ लेती हैं। अधिक पुरुष रोजाना महिलाओं की तुलना में सिगरेट का धुआं करते हैं, जिनकी संख्या क्रमशः 90 लाख और 13 मिलियन है।

 

नवीनतम ‘तम्बाकू एटलस‘ में भारत दुनिया भर में महिला धूम्रपान करने वाली आबादी के शीर्ष 20 में से तीसरे स्थान पर हैं। भारत में धूम्रपान करने वाली महिलाओं की मौत धूम्रपान नहीं करने वाली महिलाओं की तुलना में औसतन आठ साल पहले हो जाती है।

 

एक और 171 मिलियन लोग धुएं रिहत तंबाकू का उपयोग करते हैं, जो मुंह और गले के कैंसर का प्रमुख कारण है। 2007 की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक वर्ष दुनिया भर में 4.9 मिलियन लोग धूम्रपान की वजह से मरते हैं। तम्बाकू में और भी कई विषाक्त यौगिक हैं जिनसे दीर्घ अवधि तक धूम्रपान करने वालों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं जिनमे से कई संवहनी आसामान्यताएं जैसे स्टेनोसिस, फेफड़ों का कैंसर, दिल का दौरा, स्ट्रोक, नपुंसकता, धूम्रपान करने वाली माताओं द्वारा जन्मे गये शिशु का कम वज़न आदि शामिल हैं।

 

दीर्घकालीन धूम्रपान करने वालों के चेहरे में एक विशेष परिवर्तन आता है जिसे डॉक्टरों द्वारा स्मोकर्स फेस (smoker's face) कहा जाता है। हालांकि चीन, भारत और इंडोनेशिया दुनिया में सबसे ज्यादा पुरुषों के धूम्रपान करने के मामले में आगे है। महिलाओं की भी अगर बात करें तो 2015 में सबसे ज्यादा महिला धूम्रपान करने वाले देशों में यू.एस. (17 मिलियन धूम्रपान करने वालों) में सबसे आगे था। इसके बाद चीन (14 मिलियन धूम्रपान करने वाले) और भारत (13.5 मिलियन धूम्रपान करने वाले) थे। आपको बता दें कि दुनिया भर में 11 प्रतिशत से ज्यादा मौतें 2015 में धूम्रपान करने के कारण से ही हुई थी।

 

भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के तम्बाकू के खतरे को नियंत्रित करने के प्रयासों के बावजूद, भारत में तम्बाकू के इस्तेमाल की व्यापकता बच्चों और किशोरों के बीच खतरनाक अनुपात में बढ़ रही है। भारत सरकार के ‘राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन‘ द्वारा किये गये एक सर्वेक्षण में यह चौकाने वाला तथ्य सामने आया है कि 10-14 वर्ष के बीच 200000000 (20 करोड़) बच्चे तम्बाकू का सेवन करते हैं, और प्रतिदिन 5500 नये लोग (20 लाख हर साल) इसमें जुड़ रहे हैं।

                                                                           नई दिल्ली से ज्योति सिंह

 


 

 


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