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"कत्लेआम" मगर हम ख़ामोश हैं

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Reported by KNEWS

Updated: Mar 21-2018 05:41:45pm

नई दिल्ली : इराक के मोसुल से लापता हुए 39 भारतीय की मौत की पुष्टि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कर दी। सुषमा स्वराज कहा कि 4 साल पहले अगवा हुए 39 भारतीय के शवों की शिनाख्त इराक में डीएनए के आधार पर की गई है।

 

बहरहाल इराक मे जारी गृहयुद्ध मे अल कायदा से भी खतरनाक संगठन 'आईएसआईएस' ने हजारों इराकी सैनिकों के साथ-साथ वहां के हजारो निर्दोष नागरिको की हत्या कर दी है।

 

 

जिसे खत्म करने के लिए इराक मे इस समय 52 मित्र देशो की गठबंधन सेनाएं वहां के आतंकी संगठन आईएसआईएस लड़ाई लड़ रही है जिस में हर दिन सैकड़ो निर्दोष लोगो की जान जारही है। आलम ये है कि इस सुलगते हुए इराक को देखकर पूरी दुनिया तपिश महसूस कर रही है।

 

कत्लेआम की तस्वीरों को देखकर दुनिया के कई मुल्कों की नींदें उड़ चुकी है। खासतौर पर हिन्दुस्तान की क्योंकि इराक के मोसुल मे 39 भारतीयों की 'आईएसआईएस' ने निर्मम हत्या कर दी है। ये महज इराकियों पर आतंकियों के जुल्मों सितम की कहानी नहीं बयां कर रही, बल्कि दुनिया के तमाम छोटे बड़े देशों को खून के आंसू रुलाने की दास्तां भी सुना रही है।

 

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पूरे इराक में रॉकेट लांचरों से हमला करते, टैंकों से रौंदते और ताबड़तोड़ गोलियां बरसाते इस संगठन के आतंकवादी दिखने लगे हैं। साथ ही दिखने लगा है इराक की सड़कों पर मौत का तांडव.और वीराने में बिछी बेकसूरों की लाशें। अगर बात करे 39  भारतीय नागरीको के मौत की, तो भारत सरकार लगातार कोशिश कर रही थी की लापता हुए 39  भारतीय नगरीको का पता लगाया जा सके।

 

लेकिन कुछ पता नही चल पा रहा था, क्यों कि वहां पर जा पाना किसी के लिए संभव नही था। लेकिन फिर भी भारत सरकार के विदेश राज्य मंत्री जरनल वि. के. सिंह खुद ईराक के मोसुल शहर के आस-पास के क्षेत्रो मे लापता 39 भारतीयों नागरीको की फोटो को दिखा-दिखा कर जानकारियां जुटा रहे थे।

 

 

लेकिन अब जा कर इस का पता चल पाया कि सभी 39  भारतीय नागरीको की आईएसआईएस ने 4 साल पहले हत्या कर दी थी और मोसुल के एक खंडर में सभी के लाशो को दफ़ना दिया था। जिसकी पुष्टी डीएनए के आधार पर हो पाई।

 

बता दे कि इराक मे आईएसआईएस के आतंकवादी गैर मुसलमानो को चुन-चुन कर मार रहे थे जिसमे हिंदू, कुर्द, ईसाई जो भी गैर मुस्लिम मिला उसे आतंकी मारते चले गए।                                       

                                                                                           नई दिल्ली से अंशु रंजन