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Wednesday, 20 June 2018

पहाड़ो में रोता विकास

Reported by KNEWS | Updated: Mar 24-2018 12:46:08pm


जोशीमठ : उत्तराखंड राज्य बने 17 साल हो चुके है जिसमें प्रदेश की दो राजनैतिक पार्टियों ने पांच पांच साल राज किया भाजपा ने तो न जाने कितने सीएम बदले तो कांग्रेस ने भी विकास के नाम केवल बयान बाजी की और पहाडों में विकास रोता रहा।

 

सड़क, स्वास्थय, शिक्षा, रोजगार ,पलायन जैसे बडे मुद्दों पर सरकार केवल एक आपसे में ही उलझती रही सीमान्त विकासखंड जोशीमठ का आज इतना बूरा हाल है कि यहां सरकारी विद्यालय में बच्चों की संख्या हर वर्ष घटती जा रही गांवों में स्वास्थय सुविधायएं आजतक मुहिया नहीं हो पाई।

 

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सडकें स्वीकृत हुई पर आज तक उनका काम पूरा नही हो पाया है। सरकारी मशीने विकास कार्यों को प्रगति पर लाने में हर साल विफल रही है सडकों की फाइलें सरकारी दफ्तरों में धूल फाक रही है  आज भी जोशीमठ के नीति घाटी के गांव सडकों के न होने से हर दिन खाली हो रहे है। घाटी के सुखी, तोलमा, लाता, रिंगी आदि गांवों को सड़क से जोडने की योजना फाइलों में पास हुई पर सरकारी तंत्र के सामने पूरी योजनाएं विफल ही साबित हुई है। सरकारों ने केवल सडकों के जाल बिछाने की घोषणा की पर आज तक इन पर काम नही हो पाया है।

 

सीमान्त सुखी गांव की स्तिथि इतनी खराब है कि यहां के लोगों को पैदल चलने में भी खतरा पैदा हो रहा है पहाडों से लगातार पैदल मार्ग पर पत्थर गिर रहे है वही अगर कोई बडा हादसा हुआ तो लोग धौली गंगा में गिर भी सकते है क्यूकि पैदल मार्ग इतना खतरनाक है कि पैर फिसलने का खतरा बना रहता है। वही हर रोज बाजार आने जाने वाले ग्रामीण पीठ में बोझा लेकर  सफर करते है और अपनी जान झोखिम में डालकर पैदल मार्ग से आते जाते है।

 

बडे बुर्जुग से लेकर स्कूली बच्चे भी अपनी जान हथेली में रखकर आवाजाही कर रहे है। बात केवल सुखी गांव की नहीं हैं पहाडों में अनेक गांव है। जहां हर दिन लोगों को सडक के अभाव में दो चार होना पड रहा है पर सरकारे कब इन सड़कों को बनायेगी यह सब देखने वाली बात है।

                                                                                        जोशीमठ से नितिन सेमवाल
 


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