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खनन माफिया उड़ा रहे नियम कानून की धज्जियां

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Reported by KNEWS

Updated: Mar 24-2018 01:50:34pm

लखनऊ : सपा सरकार के बाद बीजेपी सरकार में भी अफसरों से मिली भगत कर खनन माफिया बालू खनन में नियम कानून की धज्जियां उड़ा रहे है। लखनऊ से लेकर सूबे के उन जनपदों में जहा से नदी निकलती है वहां नियम - कानून को ताक पर रखकर खनन जारी है।

 

बालू खनन से जुड़ा ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जनपद से सामने आया है। यहां पर अधिकारियों की नाक के नीचे खनन जारी है और सब कुछ जानने के बाद भी कौशाम्बी से लेकर राजधानी के हुक्मरान तक चुप्पी साधे है।

 

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सीएम योगी ने अवैध खनन करने पर सीधे अधिकारियों की जवाबदेही तय कर रखी है। इसके बाद भी बालू के माफिया सरकारी अफसरों से मिली भगत कर सरकार को पलीता लगाने में जुटे है। सेमी मशीन की आड़ में हैवी मशीन पोकलैंड यमुना नदी तल से बालू निकाल रही है। मामला यही तक सीमित नहीं है यहां बड़े पैमाने पर बालू की ओवरलोडिंग भी की जा रही है।

 

उद्योगपतियों की पहुंच और रसूख के आगे सिस्टम घुटने टेक चुका है। इतना ही नहीं इस पूरे मामले पर जिले के अधिकारी सिर्फ और सिर्फ कड़ी कार्रवाई का भरोसा देकर अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड रहे है। यमुना नदी तल की तस्वीरें हैरान कर देन वाली हैं। बालू घाटों का नजारा साफ इशारा कर रहा है कि उद्योगपतियों के आगे सिस्टम पूरी तरह से फेल है।

 

या यूं कहें कि कारोबारियों के हिसाब से सिस्टम चल रहा है। स्थानीय मजदूरों का खुला आरोप है कि कारोबारियों ने व्यवस्था को हाईजैक कर रखा है। बालू घाटों पर बड़ी-बड़ी मशीन रात - दिन चलती है ऐसे में उन्हें दिन भर कोई काम नहीं मिलता है। इतना ही नियम और शर्तों के तहत बालू खनन न होने से राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।

 

जबकि करोड़ों रुपये उद्योगपति कमा रहे हैं। यहां एक - एक बालू घाट से प्रतिदिन 20 से 25 लाख रुपये की बालू निकासी हो रही है। ओवरलोड गाड़ियां करोड़ों की लागत से बनी सड़कों को नुकसान पहुंचा रही हैं लेकिन जिम्मेदार हैं कि कार्रवाई करने के बजाय पूरे मामले से किनारा करने की कोशिश में हैं।

                                                   

                                                                      लखनऊ से अनूप चौधरी