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बुजुर्ग ने वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट बना कर पेश की मिसाल

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Reported by KNEWS

Updated: Apr 06-2018 09:39:52am

कानपुर : गर्मियों के मौसम आते ही जहां लोग पानी के लिए त्राहि -त्राहि कर रहे है और गाड़ियों की धुलाई और पानी की बर्बादी खुले आम हो रही है। जिसको देखते हुए कानपुर जिला अधिकारी ने 5 अप्रैल से शहर के सभी गाड़ियों की धुलाई सेंटरो का संचालत करने पर रोक लगा दी है।

 

कानपुर के गुजैनी एच ब्लाक में रहने वाले 65 वर्षीय बुजुर्ग अहिबरन सिंह वर्मा ने अपने घर मे एक ऐसा वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट बनाया है जिससे पानी की 100 प्रतिशत बचत होगी।

 

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इस प्लांट में सबसे अनोखी बात ये है कि उन्होंने अपने ही घर मे पहले एक टैक बनाया है जिसके ऊपर गाड़ियों की धुलाई हो सकेगी और सारा पानी उस टैक में चला जायेगा। शहर के पहले 100 प्रतिशत वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट का उद्घाटन करने उत्तर प्रदेश के सिचाई मंत्री धर्मपाल सिंग पहुंचे और उन्होंने फीता काटकर वासिंग वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट का शुभारंभ किया और इस पहेल की सराहनीय कार्य बताया।

 

इसमे अपर लोवर दो टैंक बनाये गये है जिसमे दो मोटरों का इस्तेमाल भी किया गया है। उसमे से एक मोटर प्रेसर बनाने के लिये है और दूसरी पानी को उठाने के लिए इस्तेमाल की गयी है, जिसके बाद वो पानी मोटर के द्वारा रिजर्व बार में चला जाता है और उसके बाद वो पानी अपर टैंक में डाल दिया जाता है।

 

अपर टैंक में मकैनिकल आयल सेपरेटर लगाया गया है। जिसके द्वारा टैंक में मिक्स पानी से आयल और पानी को अलग -अलग किया जाता है l वही तेल को दो तीन स्टेज में साफ कर के नीचे लाया जाता है और फिर से उस तेल चाहे वो डीजल हो या पेट्रोल या फिर कैरोसिन हो सभी का इस्तेमाल किया जा सकता है। अहिबरन  सिंह की माने तो उन्होंने बताया कि इस टैक्नोलॉजी के उपयोग से लाखों लीटर बर्बाद हो रहे पानी को बचाया जा सकता है।

 

धुलाई में उपयोग में लाये गये पेट्रोल,डीजल,और कैरोशिन आयल को भी दुबारा सेव कर स्तेमाल किया जा सकता है। उनका ये दावा है कि उनके इस उपयोग से देश मे वाटर रीसाइक्लिंग की क्रांति आ सकती है और देश मे बर्बाद होने वाले पानी को भी बचाया जा सकता है।

         
                                   

                                                                  कानपुर से मधुर मोहन