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Sunday, 21 October 2018

जंगल में कैसे रुकेगी आग

Reported by KNEWS | Updated: Apr 06-2018 12:58:42pm


हरिद्वार : गर्मी आते ही जंगलों में आग का सीजन शुरू हो गया है। तेज हवाएं चलने से हर साल इस सीजन में हजारों हेक्टेयर वन संपदा जल कर खाक हो जाती है लेकिन आज तक सरकारों ने जैव विविधता से भरे जंगलों को इस आग से बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। हरिद्वार जनपद में हर साल वनाग्नि से ना केवल जंगल धधकते हैं।

 

बल्कि वन्य जीवों पर भी इसका बडा असर पडता है लेकिन इस बार भी वन विभाग ने जंगलों में आग के रोकथाम के कोई उपाय नहीं किये हैं। हर साल की तरह इस बार भी हरिद्वार में जंगल वनाग्नि की भेंट चढने को तैयार हैं। पहले से ही कर्मचारियों के वेतन भुगतान समेत तमाम समस्याओं से जूझ रहे वन विभाग के पास वनाग्नि से निपटने के लिए अभी तक कोई बजट की फूटी कौडी नहीं आई है।

 

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आलम ये है कि सीजनल फायर वाचर्स की तैनाती भी अभी तक शुरू नहीं हुई है। हरिद्वार में जंगलों में लगने वाली आग से ना केवल अमूल्य वन संपदा खाक होती है बल्कि वन्य जीवों को भी खासा नुकसान उठाना पडता है। जंगलों में आग लगने के बाद वन्य जीव आबादी क्षेत्र की ओर रूख करते हैं। ऐसे में जंगलों में जगह जगह आग से निपटने के लिए बनाये जाने वाले क्रू स्टेशन भी बजट का रोना रो रहे हैं।

 

हरिद्वार में सबसे ज्यादा आग मंसा देवी और चंडी देवी के जंगलो में लगती है। पहाडों पर लगने वाली इस वनाग्नि को बुझाना वन विभाग के लिए कडी चुनौती है.. क्योंकि संसाधनों के अभाव में केवल परंपरागत तरीके से ही आग को बुझाया जाता है। जंगलों में वाटर टैंक की स्थापना और वन कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए चलाये जाने वाले कार्यक्रम अभी तक नदारद हैं। ऐसे में विपक्ष को भी बैठे बिठाये एक मुद्दा मिल गया है।

 

उत्तराखंड अपने जंगलों और वन्य जीवों के लिए जाना जाता है लेकिन आज तक इन जंगलो के संरक्षण और संवर्धन के लिए किसी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया.. ऐसे में सरकारों की मंशा भी सवालों के घेरे मे हैं।

                                                                                     हरिद्वार से पुलकित शुक्ला

                                                                              


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