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Wednesday, 15 August 2018

अनाज मंडी में करोड़ों का काला कारोबार

Reported by KNEWS | Updated: Apr 08-2018 09:45:45am



मेवात : नूंह मेवात की सबसे बड़ी अनाज मंडी पुन्हाना में करोड़ों का काला कारोबार हो रहा है। काले कारोबार में एक नहीं बल्कि कई एजेंसियां आढ़तियों से मिलीभगत कर बड़ी सफाई से मोटी कमाई कर रहे हैं।

 

कमाई में से कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारियों को मोटा चढ़ावा चढ़ाया जा रहा है। चढ़ावे और गबन का यह खेल कोई नया नहीं है बल्कि वर्षों से गेंहू , सरसों इत्यादि फसलों की खरीद में काला कारोबार हो रहा है।

 

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किसान की जेब पर अनाज मंडी में भी कैंची चलाई जा रही है। अनाज मंडी में हजारों क्विंटल गेंहू पड़ा हुआ है।  लेकिन मार्केट कमेटी के दफ्तर में सीजन में भी सचिव मौजूद नहीं है। कारोबार में इतने लोग शामिल हैं की छोटी - मोटी शिकायत को दबा दिया जाता है। पुन्हाना अनाज मंडी के गबन की अगर निष्पक्ष जांच किसी आला ईमानदार अधिकारी से कराई जाये, तो करोड़ों का गड़बड़झाला सामने आ सकता है। आढ़तियों और अधिकारियों के इस गौरखधंधे का खुलासा करने वाला कोई आम आदमी नहीं बल्कि निगरानी समिति पुन्हाना का उपाध्यक्ष भाजपा नेता उत्तम चंद आर्य ही नहीं बल्कि पडोसी गांव पटाकपुर का पूर्व सरपंच हाजी इसलाम और पुन्हाना मंडी के 88 नंबर के आढ़ती का पिता भी शामिल है।

 

मीडिया कर्मियों का कैमरा जब अनाज मंडी नूंह के गड़बड़झाले को लेकर चला तो आढ़तियों की हवा निकल गई। आढ़ती सेटिंग के लिए तिलमिलाते रहे ,लेकिन इस सच्चाई को उजागर करना बेहद जरुरी था। भाजपा नेता ने अपनी ही सरकार के कुछ चैयरमेन की नियत पर भी सवाल उठाये। उन्होंने हज कमेटी चैयरमेन ओरंगजेब, गौसेवा आयोग चैयरमेन भानीराम मंगला, निगरानी समिति चेयरमैन पुन्हाना धर्मेंद्र सोनी को जानकारी दी, लेकिन किसी ने मामले में दिलचस्पी नहीं दिखाई। निगरानी समिति का पार्ट होने के नाते उन्होंने सीएम मनोहर लाल के ईमानदारी के मिशन को आगे बढ़ाने की पहल की, लेकिन सबसे पहले अपनों ने ही साथ नहीं दिया।

 

मंडी सुपरवाइजर जीतराम इसका मास्टर माइंड है, जो पिछले कई सालों से इसी अनाज मंडी में तैनात है। पटाकपुर गांव के सरपंच और आढ़ती के पिता के अलावा भाजपा नेता उत्तम चंद आर्य ने जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद गंभीर हैं। एसडीएम पुन्हाना तक इस काले कारोबार में शामिल बताये जा रहे हैं। यूपी - राजस्थान राज्यों से उस समय गेंहू के बैग से भरे वाहन जब पुन्हाना में प्रवेश करते हैं, जब लोग रात सुबह करीब तक गहरी नींद में सोये हुए होते हैं। फर्जी तरीके से इस गेंहू को हरियाणा या मेवात का बनाने के पीछे फर्जी किसानों की गेट पास से लेकर इंट्री तक सब का खेल बड़ी चालाकी से खेला जा रहा है। किसान का पता -  नाम और गांव अनाप - शनाप दर्शाकर चूना लगाया जा रहा है।

 

पीड़ितों के मुताबिक अगर मुसलमान आढ़ती के हाथ पर कुरान और हिन्दू आढ़ती के हाथ पर गीता रखकर पूछा जाये , तो खेल उजागर होने से कोई नहीं रोक सकता। मौजिज लोगों के मुताबिक आढ़तियों से प्रधान या अन्य लोग चौथ उगाकर चढ़ावा चढ़ाते हैं। कुछ लोग देने से इंकार करते हैं, तो उन पर दवाब या गबन में शामिल कर्मचारी - अधिकारी से दवाब देकर चुप करा दिया जाता है। बता दें कि अभी सरकारी खरीद को शुरू हुए महज 4 दिन हुए हैं। मेवात का किसान अभी गेंहू कटाई में लगा हुआ है। चंद किसानों ने चारे के अभाव या मौसम के बदले मिजाज की वजह से गेंहू की कुटाई कराई है। 90 फीसदी गेंहू अभी कटाई या कुटाई के इंतजार में है। उससे पहले ही मंडी गेंहू से लबालब है।

 

कई - कई फीट ऊंचाई तक मंडी में गेंहू पड़ा है। ध्यान रखने लायक बात यह है कि जब तक मेवात का किसान अनाज मंडी में अपने गेंहू की फसल को लेकर पहुंचेगा , तब तक सरकारी खरीद लगभग कम्प्लीट हो जाएगी। आरोप है कि यूपी - राजस्थान के गांवों से व्यापारी 1680 रुपये प्रति क्विंटल में गेंहू की खरीद कर रहे हैं और उसे 1735 रुपये में बेचा जा रहा है। दूसरे राज्यों से सस्ते और गलत तरीके से गेंहू की खरीद कर आढ़ती मिलीभगत कर मोटी कमाई कर रहा है। किसानों को लेकर बड़ी - बड़ी बातों से लेकर भ्र्ष्टाचार को खत्म करने वाली मनोहर लाल खट्टर सरकार के कृषि मंत्री और बड़े अधिकारी सोये हुए हैं। कुछ मोटी रकम कमाने में जुटे हैं।

 

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अगर मनोहर सरकार हकीकत में किसानों और गरीबों की हितैषी है, तो उसे ईमानदारी के साथ अनाज मंडी पुन्हाना में फसल खरीद की गहनता से जांच करानी चाहिए। तभी जाकर अनाज मंडी में धरती पुत्र के साथ हो रहे भद्दे मजाक से उसे मुक्ति मिल सकती है। खास बात तो यह है कि पुन्हाना अनाज में ऑनलाइन खरीद दूरबीन से भी नजर नहीं आती। नकद रकम में फसल खरीदी जा रही है। चैक से फसल खरीदी जाये और लिस्ट में दर्शाये गए किसान को चैक या खाते में रकम मिले, तो परत दर परत चढ़ी भ्र्ष्टाचार की पोल खुल सकती है। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर न केवल मामला दर्ज होना चाहिए बल्कि उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर देना चाहिए, साथ ही आढ़तियों और बिचौलियों के खिलाफ ठोस क़ानूनी कार्रवाई हो।

 

ताकि भ्र्ष्टाचार किसान से करने से पहले कोई लाख बार सोचने पर मजबूर हो जाये। मार्केट कमेटी में सचिव राहुल यादव तो नहीं मिले, लेकिन कर्मचारियों की जुबान पर मानो ताला लगा हुआ है। खास बात तो यह है कि यूपी - राजस्थान से रात में आने वाले गेंहू की गाड़ियों - ट्रैक्टर इत्यादि पर कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है। निगरानी समिति की निगरानी से सामने आया गड़बड़झाला :- निगरानी समिति पुन्हाना उपाध्यक्ष उत्तम चंद आर्य की मेहनत ,लग्न और हिम्मत की वजह से यह करोड़ों का गड़बड़झाला सामने आया है।

 

उत्तम चंद भाजपा से कई दशक से जुड़े हुए हैं और अनाज मंडी पुन्हाना में ही बारदाना की दुकान चलाते हैं। पहले तो उत्तम चंद आर्य ने अपने सीनियर नेताओं से यह मामला सांझा किया,लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्होंने इस गड़बड़झाले को उजागर करने के लिए मीडिया की मदद ली। हम उत्तम चंद की मेहनत ,लग्न और ईमानदारी को सलाम करते हैं, जिसकी बदौलत अनाज मंडी में गड़बड़झाले की हकीकत को पूरे देश और खासकर मनोहर लाल खट्टर सरकार को जरूर देखना चाहिए। 

                                                               

                                                                           मेवात से वकील 

                                                                                           


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