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Friday, 17 August 2018

पानी बिना सब सूना

Reported by KNEWS | Updated: Apr 08-2018 10:00:36am


मेवात : जल ही जीवन है। जल है तो कल है। जनस्वास्थ्य विभाग कागजों में भले ही इन नारों को सही साबित कर रहा हो ,लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। मौसम आग उगल रहा है ,पारा 37 डिग्री को पार कर रहा है।

 

तालाब ,नहर ,कुआं सब सूख चले हैं। इंसान तो इंसान अब तो मवेशियों की भी जान पर बन आई है। करीब 225 करोड़ रुपये की रैनीवेल परियोजना ही एक उम्मीद है ,लेकिन उसमें भी गांव तक पानी नहीं पहुंचाया गया।

 

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मेवात जिले के नगीना खंड के गांव खेडली में पीने का पानी नहीं होने के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव को रेनीवेल योजना से जोड़ना था लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी इस योजना का गांव के लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। बता दें कि यमुना से माहोली और रहीमपुर गांव में बोरिंग कर जिले के तथा पलवल जिले के हथीन खंड के तीन सौ से अधिक गांवों को रैनीवेल परियोजना का पानी मिल रहा है।

 

नगीना खण्ड के 50 गांवों को नई योजना से जोड़ा गया है। दो दशक पहले जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा पानी की लाइने गांव में डाली गई थी लेकिन अभी तक विभाग द्वारा गांव को पानी उपलब्ध नहीं कराया गया है। गांव के लोगों का कहना है कि पहले दूसरे गांव से 3 किलोमीटर दूर से पीने का पानी लाया जाता था। लेकिन अब लोगों ने घरों में ही पानी के कुंडे बनवा रखे हैं।

 

जिनमें पानी स्टोर किया जाता है उसी पानी से अपनी और पशुओं के पीने के काम में लिया जाता है। गांव के लोगों ने बताया कि खेड़ली गांव में अभी तक जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा पानी उपलब्ध नहीं कराया गया है। कई बार मंत्री से लेकर अधिकारियों तक पानी की समस्या रख चुके हैं। लेकिन सिर्फ कागजों में ही पानी दिखाया गया है। जमीनी स्तर पर पानी नहीं पहुंचा है वैसे तो करोड़ों रुपए की लागत से रेनीवेल योजना का पानी मेवात में लाया गया तथा नगीना ब्लॉक जिसमें पानी की सबसे अधिक कमी थी।

 

इस ब्लॉक को ही पीने के पानी से दूर रखा गया है। गांव के लोगों का कहना है कि पहले पानी दूसरे गांव से लाया जाता था लेकिन अभी घरों में पानी के कुंडे बना रखे हैं .उन्हीं में टैंकरों के द्वारा पीने का पानी डलवाया जाता है। एक टैंकर पानी की कीमत 1000 रुपये से लेकर 1200 सौ रुपए तक है उसी टैंकर के पानी को कई कई दिनों तक इस्तेमाल में लाया जाता है।

 

गांव के लोग हजारों रुपए का पानी रोजाना टैंकरों के द्वारा डलवाते हैं। गांव की बुजुर्ग महिला ने बताया कि जब से वह इस गांव में आई हैं तभी से पानी की समस्या उन्होंने देखी है और अभी भी यह समस्या जस की तस बनी हुई है। पानी की समस्या को लेकर जब उच्च अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो उच्च अधिकारी कुछ भी बोलने से कतराते रहे। रेनीवेल योजना के अधिकारी राणा से जब नगीना खंड के खेड़ली गांव में पीने के पानी की समस्या के बारे में बात करने की कोशिश की गई तो वे मीडिया से बचते हुए नजर आए। 

                                                       

                                                                                                मेवात से वकील


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