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Sunday ,16 Dec 2018

संकट में सरयू नदी

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Reported by KNEWS

Updated: Apr 10-2018 02:02:52pm

बागेश्वर : बहुत सी नदियो के उदगम स्त्रोत के लिये जाने जाने वाले उतराखण्ड मे नदियां सूख रही है। एक के बाद एक नदियो के सूखने का सिलसिला जारी है। मगर अभी तक कोई भी सरकार इनके प्रति संवेदनशील नही रही है। पिछले पांच दशको में 300 नदियां पांच हजार चाल -खाल विलुप्त हो गये है। यह देवभूमि के लिये बहुत बडे खतरे का संकेत है।

 

जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है। अपने भयावह रूप व सदाबहार पानी से छलछलाती बागेश्वर की सरयू नदी अब धीरे -धीरे सूखने की कगार पर आ रही है। सरयू के सूखने का कारण सरयू मे हो रहे अवैध रूप से चल रहे खनन को माना जा रहा है। प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे मे चल रही है। प्रशासन अवैध खनन पर कोई ठोस कार्यवाही कर नही रहा है।

 

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अगर कार्यवाही करनी भी पडी तो  केवल एक लिपापोती मात्र ही  हो रही है। आये दिन प्रशासन के पास अवैध खनन की शिकायतो के ढेरो ज्ञाापन ग्रामीणो अन्य समाजसेवी संगठनो के माध्यम से आते है। कोई सुनवाही नही होती है।  सरयू पर अवैध खनन नेताओ के संरक्षण मे अधिक हो रहा है। लोगो का साफ तौर पर कहना है कि अवसरवादी राजनीती जब तक रहेगी। तब तक सरयू का विनाश होता रहेगा। अवैध खनन के बाद अवैध  अतिक्रमण भी सरयू के लिये खतरा बने हुये है। 2013 मे हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका मे फैसला देते हुये कहा था कि नदी तट से 200 मी0 तक निर्माण कार्य न करने के आदेश जारी हुये थे। लेकिन प्रशाशन के हाथ नेताओ के आगे बधे हुये है।

 

प्रशासन के अधिकारीयो का भी रवयया नेताओ जैसा है। जिसकी सरकार हो उसका गुडगान करना शुरू कर दो। ये हालत हो चली है। प्रशाशन की बागेश्वर जनपद में सरयू नदी में मशीनो से खनन किया जा रहा है। जिससे सरयू  नदि का भूमिगत होने का खतरा बना हुआ है। सरयू के सूखने का कारण परियोजनाओ द्वारा नियमित रूप से पानी को नही छोड़ना भी है।

 

सरयू के सूखने का कारण सरकार की उदासीनता है। जहाॅ मशीनो से खनन नही होना चाहिये वहाॅ मशीनो से खनन किया जा रहा है। उद्योगपति सरयू का दोहन कर रहे है। सरयू हमाारी आस्ता का केन्द्र है। लेकिन हमारी आस्था पर कठोराघात करते हुये सरयू किनारे शौचालय बनाये गये है। जिससे सरयू गन्दी हो रही है। प्रशाशन की मिली भगत के बिना अवैध खनन हो पाना यह संभव नही है। 

 

पूरन सिह कपकोटी का कहना है। कि सरयू का जल स्तर सूखने का कारण यह है। कि अतियाधिक मात्रा मे अवैध खनन हो रहा है। और उत्तर भारत हाइडोपावर कम्पनी  ने कम्पनी निर्माण के समय जितना पानी छोडने की बात कही थी । उतना पानी नही छोडा जा रहा है। प्रशासनिक बयानो में जिलाधिकारी का बयान हैरंत अंगेज करने वाला दिखा। पहले  बयान मे जिलाधिकारी का कहना है। कि उत्तर भारत और ग्रामीणो के साथ कुछ तो अनुबंन्ध हुआ होगा। उत्तर भारत द्वारा दर्ज करायी गयी शिकायत का वर्णन करते हुये।

 

जिलाधिकारी का कहना है कि उत्तर भारत के कर्मचारीयो ने एक पत्र दिया है। और आरोप लगाये है। कि गा्रमीण जबरन परेशान कर रहे हैं यह एक जाॅच का विषय है। इसमे भी जांच की जायेगी । अवैध अतिक्रमण पर भी प्रशाशनिक बयानो मे जिलाधिकारी नगर पंचायत को ही कटघरे मे खडा करके कह रही है। कि  यदि अतिक्रमण कि जा रही जमीन पर नगर पंचायत शाशन और प्रशासन के नियमो को ताक मे रख कर कार्य करती है।

 

तो नगर पंचायत के उपर भी कार्यवाही कि जायेगाी। प्रशासन कितने ही दावे कर ले कि हर समस्या की जाॅच की जायेगी लेकिन वास्तिकता के आधार पर कोई  ठोस जांच हो पायेगी यह बागेश्वर की जनता देखना चाहती है। 

                                                                                      बागेश्वर से जगदीश पाण्डे