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मानव रहित रेलवे क्रासिंग दुर्घटनाओं को दे रहे है खुला निमंत्रण

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Reported by KNEWS

Updated: Apr 27-2018 02:05:03pm

 
कासगंज : कासगंज, जनपद कुषीनगर के मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर ट्रैन की चपेट में आई स्कूली बच्चों से भरी वेन के हादसे के बाद भी रेलवे विभाग अब तक सोया हुआ है।

 

जनपद कासगंज के  कासगंज जक्षन क्षेत्र में अव भी लगभग 6 से 7 मानव रहित क्रासिंग है, जो गंभीर हादसा दोहराने के लिये खुला निमंत्रण दे रही है। जनपद कासगंज पूर्व में मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर ही विगत वर्षों में सैकडों लोगों की जाने जा चुकी है।

 

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कासगंज के मानव रहित रेलवे क्रासिंग चांडी और अडूपुरा पर टैªन की चपेट में आकर बसे कटीं थी, जिसमें लगभग 70 लोगों की जान चली गई थी। इसके पश्चात आनन- फानन में रेलवे विभाग ने मानव रहित क्रासिंगों को वेरियर लगा कर सुचारू रूप से चालू कराया था। रेलवे के विभागीय सूत्रों के अनुसार अब भी जनपद में लगभग आधा दर्जन से अधिक मानव रहित क्रासिंग है, जिन पर रोजाना हजारों वाहन गुजरते है। बताते चलें कि मामला जनपद के असमतगंज के क्रासिंग संख्या 257 सी का है जो मानव रहित रेलवे क्रासिंग है।

 

यह मानव रहित रेलवे क्रासिंग एटा जनपद से कासगंज जनपद को जोडने का कार्य भी करता है। इस मानव रहित क्रासिंग पर रोजना सैकडों वाहन गुजरते है। गांव असमतगंज के बीचोबीच से गुजरने वाली रेलवे लाइन से ग्रामीण बुरी तरह से दहशत में है।  ग्रामीणों के अनुसार उनके गांव का बना प्राथमिक विद्यालय, पड़ोसी कस्बा मारहरा के विद्यालयों में करीव 15 से 20 गांव के वच्चे रोजाना पढ़ने जाते है, लेकिन उन्हे हर समय डर लगा रहता है कि कहीं उनके बच्चे भी किसी हादसे का शिकार न हो जायें।

 

वहीं ग्रामीणो ने रेलवे विभाग पर आरोप लगाते हुये कहा है कि विभागीय अधिकारियों ने अपनी आफिसों में ही बैठकर चन्द कदमों की ही दूरी पर क्रासिंग संख्या 256 सी पर फाटक बना दिया है, जो कि पूरी तरह से रेलवे विभाग की नकामी को दर्शाता है।  ग्रामीणों में अब भी जनपद कुशीनगर के दुदही घटना को लेकर भय का माहोल व्याप्त है। 

                                             

                                                                 कासगंज से शिव प्रताप शौलंकी