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Saturday ,15 Dec 2018

मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा ये रेलवे स्टेशन

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Reported by KNEWS

Updated: May 01-2018 11:52:20am


रेवाड़ी : आजादी के 71 वर्ष बाद  देश बुलेट ट्रेन के सपने जरूर देख रहा है ,लेकिन दिल्ली मुख्यालय से मात्र लगभग 110 किलोमीटर दूरी पर स्थित जयपुर रेलवे डिवीजन का माजरी नांगल रेलवे स्टेशन अभी भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

 

जहां सरकार रेल मंत्रालय में सुधार के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं वही यह रेलवे स्टेशन 62 वर्ष बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है।  जयपुर रेलवे डिवीजन का माजरी नांगल का रेलवे स्टेशन,  यह स्टेशन अपने आप में अनोखा है।

 

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अनोखा इसलिए कि इसकी खासियत ही ऐसी है। बताया जाता है कि इस रेलवे स्टेशन पर पहली बार 15 अगस्त 1956 को एक पैसेंजर ट्रेन का ठहराव हुआ था। तब से लेकर अब तक यहां पूरे दिन में 4 ट्रेनों का ठहराव होता है। आसपास के 4 दर्जन से अधिक गांवों के लोग इस स्टेशन से यात्रा करते हैं क्योंकि यह रेलवे स्टेशन राजस्थान की सीमा से लगता हुआ है। इस क्षेत्र के लोगों की रिश्तेदारियां अधिकतर राजस्थान में है, इसलिए यहां से सैकड़ों की संख्या में रोजाना यात्रा करते हैं इतने वर्षों बाद भी स्टेशन पर पानी और शौचालय तक उपलब्ध नहीं है।

 

ऐसे में महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।  यहां यह भी अजीब है कि आपको यात्रा करनी  है तो अपने रिक्स पर करें क्योंकि यहां टिकट के लिए टिकट घर तक नहीं है। एजेंट द्वारा टिकट का वितरण होता है। जब कभी एजेंट स्टेशन पर नहीं आता है तो लोगो  को टिकट नहीं मिलती। ऐसे में लोगो को अपनी जिम्मेदारी पर ही यात्रा  करनी पड़ती है। स्टेशन पर जब मीडियाकर्मी पहुंचे तो लोगों ने कहा कि पहले टिकट एजेंट स्टेशन पर आता ही नहीं था। ऐसे में उन्हें बिना टिकट यात्रा करनी पड़ती थी। अब टिकट एजेंट तो आता है लेकिन टिकट उसके पास भी पूरी नहीं है। जब लोग उससे अलवर की टिकट मांगते हैं तो वह खैरथल की टिकट हाथ में थमा देता है और यह गारंटी भी दे देता है कि उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा।

 

एजेंट ने बताया कि आगे से अलवर का टिकट ही नहीं आ रहा है। बार-बार अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं लेकिन टिकट नहीं पहुंच पा रही है।  एक तरफ तो हम बुलेट ट्रेन चला रहे हैं। वहीं दूसरी और दिल्ली मुख्यालय से मात्र कुछ दूरी पर ही विकास की बयार नहीं पहुंच पाई। क्या रेल मंत्रालय स्टेशन पर स्वच्छ  पीने का पानी ,शौचालय का उचित  प्रबंध कर पाएगा यह तो समय ही बताएगा। लेकिन इतना जरूर है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी विकास के कदम कुछ कदम चल कर ही दम तोड़ गये ।

                                                 

                                                                           रेवाड़ी से प्रेम भारद्वाज