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Thursday ,13 Dec 2018

लकड़ी माफियाओं की ढाल बना किसान यूनियन

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Reported by KNEWS

Updated: May 01-2018 01:00:29pm


बिजनौर : बिजनौर में जिले के सबसे बड़े अफसरों डीएम और एसपी के आदेश पर लकड़ी माफियाओ पर पुलिस का हंटर चला तो चालाक लकड़ी माफियाओ ने भाकियू को अपनी ढाल बना लिया और माफियाओ की ढाल बनी भारतीय किसान यूनियन के आगे जिला प्रशासन बौना साबित हो गया और पुलिस द्वारा पकड़े गए जिन अवैध लकड़ी से भरे 15 ओवर लोड ट्रालो को बिना किसी कार्रवाई के ही  छोड़ दिया है।

 

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सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब ट्राले सही थे तो पकड़े क्यो थे और पकड़े थे तो छोड़े क्यो गए है। यहां इतना तो तय है कि लकड़ी माफियाओ के साथ भाकियू का गठजोड़ जरूर दिखाई दे रहा है। अक्सर किसानों की समस्याओं को लेकर धरने प्रदर्शन करने वाली भारतीय किसान यूनियन अब लकड़ी माफियाओं के साथ खड़ी दिखाई दे रही है।

 

ये बात इसलिए कहा जा रहा है क्योकि बिजनौर जिले में लकड़ी माफिया  धड़ल्ले से रात के अंधेरे में काला कारोबार कर रहे है।  जिले से रोजाना लकड़ी माफिया 100 से 150  अवैध ट्रेक्टर ट्राले पापुलर और यूकेलिप्टिस से भरकर ले जा रहे है । ये  लकड़ी माफिया पुलिस विभाग, परिवहन विभाग और सेलटैक्स विभाग के रहमो करम पर काम कर रहे है।

 

लेकिन बिजनौर जिले के एसपी उमेश कुमार और डीएम अटल राय को सूचना मिली थी कि जिले में धड़ल्ले से लकड़ी का अवैध कारोबार किया जा रहा है।  उसके बाद भी पुलिस कोई कार्यवाही नही करती है , लेकिन जिले के पुलिस अधीक्षक को दोबारा सूचना मिली तो पुलिस अधीक्षक ने शहर कोतवाल और सीओ सिटी को आदेश दिया और दोनों ने 15 अवैध ट्रेक्टर ट्राले पकड़े जो लकड़ी से भरे थे।

 

लेकिन दिन निकलते ही लकड़ी माफियाओ को भाकियू का साथ मिल जाता है और भाकियू ने नुमाइश चौकी पर धरना दे दिया और किसानों के नेता राकेश टिकेत भी मोके पर पहुंच जाते है। किसानों ने जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की है भाकियू का कहना है कि ये लकड़ी किसानों की है इनको बिना किसी कारवाही के छोड़ा जाए। जिले की पुलिस ने जब लकड़ी माफियाओ के ट्राले कार्रवाई करने की मंशा से पकड़े थे फिर बिना कार्रवाई के क्यो छोड़ दिया गया।

 

जिले के एसपी सिटी का कहना है कि ये किसानों की लकड़ी है और किसान अपने कागज लाकर दिखाए तो छोड़ देंगे। जिले के एसपी सिटी ने सभी अवैध ट्रेक्टर छोड़ भी दिए है।  सबसे हैरत की बात तो ये रही कि ये सभी ट्रेक्टर माफियाओं के थे और बिना जांच पड़ताल के ही छोड़ दिया गया है वो भी दबाव में। सबसे बड़ी बात ये थी कि चलो मान भी लिया जाए कि ये लकड़ी किसानों की थी तो क्या किसानों को ओवरलोड ले जाने की अनुमति किसने दी है। ओवरलोड में क्यो नही चालान किया गया है। ये कहना गलत नही है कि योगिराज में माफियाराज हुआ हावी और माफियाओ को मिला भाकियू का साथ। 

                                                   

                                                                              बिजनौर से जहीर अहमद