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Tuesday, 19 June 2018

सरकारी अस्‍पतालों की दुर्दशा

Reported by KNEWS | Updated: May 03-2018 09:53:39am


उन्नाव : भले ही राज्य एवं केंद्र सरकार स्वास्थ्य सेवा को आम लोगों तक पहुंचाने का दावा करती रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

 

जिला अस्‍पाताल जहां पर करोड़ो का बजट प्रतिवर्ष दवा और सफाई पर खर्च होता है लेकिन सुविधायें देने के नाम पर यहां बेतरतीब खडे वाहन, वार्डो से लेकर परिसर में फैली गंदगी, खाने के नाम पर पानी मिली दाल, इलाज के नाम पर कमीशन की बाहर से लिखी जा रही दवायें, मरीजो के लिये परेशानी का रोज सबब बनती है।

 

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प्राइवेट अस्पताल में इलाल का खर्च न उठा पाने वाले गरीब इस आशा से सरकार के दावे को सच मानकर सरकारी अस्‍पताल पहुंचते है कि यहां तो उनका इलाज फ्री में हो जायेगा, लेकिन यहां पर उन्‍हें दवा से लेकर अन्‍य सभी प्रकार की जांचों के लिये बाहर पर ही निर्भर रहना पडता है। शुरुआत जिले के मुख्‍य अस्पताल  उमा शंकर दीक्षित संयुक्‍त चिकित्‍साल से की गई। इसके बाद नवाबगंज सीएचसी, पुरवा सीएचसी के साथ ही अन्‍य अस्‍पतालों का जायजा लिया गया।

 

 जहां पर परिसर में एक दो स्‍थानों पर नहीं कयी जगहों पर गंदगी दिखी। वहीं पर हाथ में इलाज का पर्चा लिये हजारों की संख्‍या में पुरूष महिलायें डाक्‍टरों से फ्री इलाज के लिये मिलते दिखे लेकिन जैसे ही डॉक्‍टर के पास पहुंचे तो पहले से ही तैयार पर्ची चिकित्‍सको ने यह कहते हुये थमा दी, कि यहां दवाये उपलब्‍ध नहीं है इस स्थित में उसके सामने  फ्री में इलाज पाने का सपना सपना बनकर ही रह जाता है।

                                                 

                                                                                    उन्नाव से अरुण अवस्थी


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