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Friday, 17 August 2018

अवैध खनन का खुला खेल

Reported by KNEWS | Updated: May 04-2018 11:20:14am


बांदा : बुंदेलखण्ड के बांदा में अवैध खनन का खुला खेल खेला जा रहा है। बालू मफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद है कि केन नदी की जलधारा के बीच से बकायदा लिफटर और पोक लैण्ड मशीन लगा कर खनन किया जा रहा है।

 

ताजा मामला नरैनी क्षेत्र के कोलावल रायपुर खदान की है। जिसका पट्रटा स्टार नेट प्र लि के नाम है। जहां एन जी टी व सुप्रीम कोर्ट के नियमों को ताक पर रखकर बेखैफ तरीके से खनन किया जा रहा है।

 

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बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या जिला प्रशासन की शह के बिना इतने बडे पैमाने पर अवैध खनन किया जा सकता है। अफसोस की बात है कि जलते बुंदेलखण्ड में जिले से लेकर लखनउ तक में बैठे माफियाओं के आका मलाई काट रहे है और यहां का किसान, मजदूर, गरीब खून के आंसू रो रहा है। साफ दिख रहा है कि लिफटर और पोकलैण्ड मशीन एक साथ लगाकर अवैध खनन हो रहा है।

 

नदी की जल धारा में लिफटर लगा कर धरातल से बालू निकाली जा रही है। खनन के इस खेल के आगे जहां जिला प्रशासन नतमस्तक है तो वही माफिया भी लखनउ तक साट गांठ होने का दम भरते हैं। योगी सरकार की साख पर बालू माफिया काल बनते नजर आ रहे हैं। एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुंदेलखण्ड के पेयजल संकट को दूर करने की  बात कह रहे है तो दूसरी ओर बालू माफिया बुंदेलखण्ड की रीढ कही जाने वाली केन नदी का आस्तित्व झकझोरने में लगे हुए है। खनन के इस खुले खेल में माफिया चांदी काट रहे है।

 

औसतन रोजाना करोड़ो का लाल सोना जनपद से बाहर जा रहा है। बुंदेलियों की खनिज सम्पदा पर ही डाका डाला जा रहा है। कलकत्ता, हरियाणा, इंदौर तक की कम्पनियां बुंदेलखण्ड के लाल सोने पर दांव लगाए हुए हैं। नदी की जलाधारा से लेकर सडकों तक पूरे खेल को खुली आंखों से देखा जा सकता है। ओवरलोड बालू लदे ट्रक जहां एक ओर लोगो के लिए काल बन रहे है तो दूसरी ओर सडको को बर्बाद कर रहे हैं।

 

पर अफसोस सडकों पर बेखौफ फर्राटा भरते बालू से लदे ओवर लोड ट्रक न तो परिवहन विभाग के अधिकारियों को दिखते है और ना ही जिला प्रशासन को। बांदा के गिरवां, नरैनी चिल्ला, मटौंध में ओवरलोड ट्रक धडल्ले से चल रहे है। वहीं अधिकारी कैमरे के सामने तो कुछ नहीं बोलते पर आफ द रिकार्ड, लखनउ से मौखिक परमीशन की बात कही जाती है। बुंदेलखंड के बांदा में अवैध खनन जल संकट के प्रमुख कारणों में से एक है गर्मी की शुरूआत में ही तालाबों में पानी सूख गया है।

 

जनपद के दो बड़े बांध बरियारपुर और रनगवां में नाम मात्र ही पानी बचा है। केन नदी का मध्यप्रदेश में आने वाला हिस्सा सूख चुका है तो यूपी के हिस्से में आनी वाली केन नदी की जलधारा भी सिकुड़ती जा रही है और उस पर खनन माफियाओं का दोहन कोढ में खाज साबित हो रहा है। अगर जल्द ही प्रदेश सरकार नहीं चेती तो वो दिन दूर नहीं जब बुंदेलखण्ड रेगिस्तान बनने की ओर अग्रसर हो उठेगा। 

                                               

                                                                                         बांदा से अनवर रज़ा


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