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31 अगस्त को हो सकती है अनुच्छेद 35A पर अगली सुनवाई

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Reported by KNEWS

Updated: Aug 27-2018 02:58:54pm

सुप्रीम कोर्ट आज सिर्फ वकील और बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय की ओर से अनुच्छेद 35ए के खिलाफ दायर ताजा याचिका पर सुनवाई करने वाला था।अब इस केस की अगली सुनवाई 31 अगस्त को हो सकती है। तीन हफ्तों से स्थगन के बाद देश के उच्त्तम न्यायालय ने जम्मू कश्मीर में लागू अनुच्छेद 35A  को हटाने की याचिका पर ३१ अगस्त को सुनवाई करेगी। जम्मू कश्मीर ने आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को मद्देनज़र रखते हुए इसकी सुनवाई टालने की मांग की है। जहाँ संविधान में अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देता है, वही अनुच्छेद 35A राज्य में बाहरी लोगों को संपत्ति खरीदने व बेचने के अधिकार से वंचित करता है। 
दिल्ली के गैर सरकारी एनजीओ " वि द सिटिज़न" ने 2014 में आर्टिकल को भेदभावपूर्ण बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है साथ ही इसको खत्म करने की मांग रखी थी। स्थानीय लोगो में ये दर बैठा है की अगर ये कानून खत्म हुआ या इसमें कोई बदलाव आया तो बाहर के लोग उनके राज्य में आ कर बस जायेंगे।  

आखिर क्या है ये अनुच्छेद 35A ?

  • अनुच्छेद 35 A, जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को यह अधिकार देता है कि वह राज्य के “स्थायी नागरिक” की परिभाषा तय कर सके।
  • जम्मू-कश्मीर राज्य के संविधान के मुताबिक, स्थायी नागरिक वह व्यक्ति है, जो 14 मई, 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या उससे पहले के दस सालों से राज्य में रह रहा हो, और उसने वहाँ संपत्ति हासिल की हो।
  • इसके अंतर्गत कोई भी दूसरा नागरिक, जम्मू-कश्मीर में न तो संपत्ति खरीद सकता है और न ही वहाँ का स्थायी नागरिक बन सकता है।
  • वर्तमान में इस अनुच्छेद को असंवैधानिक घोषित किये जाने की मांग की जा रही है।
  • देश के विभाजन के समय पश्चिमी पाकिस्तान से बड़ी संख्या में शरणार्थी जम्मू-कश्मीर में आए। इनमें वाल्मीकि, गोरखा आदि समुदायों के लाखों लोग थे। वहाँ निवासरत इन समुदायों की चौथी पीढ़ी को भी स्थायी नागरिक अधिकार प्राप्त नहीं हो पाए हैं।
  • शरणार्थियों में लगभग 85% पिछड़े और दलित समुदाय से हैं,जो मूल नागरिक अधिकारों से अब तक वंचित हैं।
  • कई वर्षों से जम्मू-कश्मीर में रह रहे गैर-स्थायी नागरिक लोकसभा चुनावों में तो वोट दे सकते हैं, परंतु जम्मू-कश्मीर के स्थानीय निकायों के चुनावों में वोट नहीं दे सकते।
  • इस संवैधानिक प्रावधान के कारण इन गैर-स्थायी नागरिको के बच्चों को वहाँ के सरकारी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और वज़ीफे का अधिकार प्राप्त नहीं है।
  • एक अन्य तर्क के अनुसार, संविधान में नया अनुच्छेद जोड़ देना सीधे-सीधे संविधान को संशोधित करना है। यह अधिकार सिर्फ भारतीय संसद को प्राप्त है। इसलिये 1954 के राष्ट्रपति का यह आदेश असंवैधानिक घोषित किया जाना चाहिये।
  • धरती की जन्नत का नागरिक वो ही माना जाएगा जो कि 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या उससे पहले के 10 वर्षों से राज्य में रह रहा हो या इससे पहले या इसके दौरान वहां पहले ही संपत्ति हासिल कर रखी हो। उदाहरण के तौर पर इसके साथ ही अगर जम्मू-कश्मीर की लड़की किसी बाहरी लड़के से शादी करती है तो उसके सारे अधिकार समाप्त हो जाएंगे। इसके साथ ही उसके बच्चों को भी किसी तरह के अधिकार नहीं मिलेंगे।

क्यों हटाया जा रहा है अनुच्छेद 35A ?
इसे खत्म करने की बात इसलिए हो रही है क्योंकि इस अनुच्छेद को संसद के जरिए संवैधानिक तौर पर लागू नहीं किया गया है, दूसरा कारण ये है कि इसके अंतर्गत कोई भी दूसरा नागरिक, जम्मू-कश्मीर में न तो संपत्ति खरीद सकता है और न ही वहाँ का स्थायी नागरिक बन सकता है।