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Monday, 19 November 2018

भारत बंद को लेकर बैठक

Reported by KNEWS | Updated: Sep 06-2018 01:13:38pm


के. न्यूज़, ऋचा ओझा: केंद्र सरकार के द्वारा संसद में पास कराये गए एस सी - एस टी क़ानून के विरोध में सवर्ण समाज के द्वारा बुलाये गए भारत बंद का असर रूड़की में भी देखने को मिल सकता है। इसी के चलते रूड़की के एक होटल में सवर्ण समाज के द्वारा एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमे सवर्ण समाज के राजपूत,ब्राह्मण,त्यागी और वैश्य समाज के लोगो के अलावा अन्य समाज के भी कई लोग शामिल रहे। बैठक में एस सी-एस टी क़ानून को काला क़ानून बताते हुए इसके खिलाफ महाराणा प्रताप चौक पर बड़ी संख्या में इकठ्ठा होने की बात तय की गई थी। वहाँ से पैदल ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन देने का कार्यक्रम तय किया गया है।

बैठक में व्यापार मंडल के अध्यक्ष अरविन्द कश्यप को भी आमंत्रित किया गया। जिनसे सवर्ण समाज के लोगो ने सभी व्यापारियों से बात कर आज बाजार बंद रखने का निवेदन किया। जिसके बाद अरविन्द कश्यप ने व्यापरियों से मीटिंग बुलाने के बाद फैसला लेने का आश्वासन दिया।

इस सवर्ण समाज की बैठक के आयोजक अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष उदय सिंह पुंडीर ने बताया की "आज हजारो की संख्या में सवर्ण ही नहीं बल्कि पूरा सर्व समाज इकठ्ठा होगा और इस काले क़ानून का विरोध करेगा। इसका कोई राजनितिक कारण नहीं है बल्कि यह विरोध हम इसलिए कर रहे है क्योंकि ऐसे कानून बना कर सर्व समाज का उत्पीड़न किया जा रहा है"। बैठक में शामिल ब्राह्मण नेता जे पी शर्मा ने बताया की "हमारा विरोध बिलकुल शांति प्रिय होगा हम सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग करेंगे"। त्यागी समाज के नेता मनोज त्यागी ने बताया की "हमारा विरोध इस क़ानून के खिलाफ होगा विरोध में शामिल लोग सभी पढ़े लिखे है इसीलिए शान्ति के साथ होगा, और यह आज ही नहीं जब तक यह क़ानून वापस नहीं लिया जाता तब तक हम आंदोलन करते रहेंगे सरकार ने इस कानून का पास करके हमारे और दूसरे लोगो के बीच खाई खोदने का कार्य किया है। उन्होंने यह भी कहा की इसी कारण भाजपा की सरकार का 2019 का सपना पूरा नहीं हो पायेगा"। 

दरअसल देश भर में सवर्ण समाज के द्वारा सोशल मिडिया पर 6 सितम्बर को भारत बंद करने का अभियान चलाया जा रहा है। जिसके चलते कई राज्यों में भाजपा और कांग्रेस के नेताओ को सवर्ण समाज का भारी विरोध झेलना पड़ रहा है।
 


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