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भगवान राम के बाद अब ”रामभक्त“ हनुमान बने वोट का आधार,इटावा मे 25 सिंतबर को निकाली जा रही है श्री हनुमान शोभायात्रा

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Reported by KNEWS

Updated: Sep 13-2018 02:29:03pm

2019 के संसदीय चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं वैसे वैसे मतदाताओं को लुभाने के लिए नए-नए तरीके राजनेता निकालने में जुट गए हैं। इस बार रामभक्त पवनपुत्र हनुमान के नाम पर शोभा यात्रा का आयोजन समाजवादी पार्टी के प्रमुख केंद्र उत्तर प्रदेश के इटावा शहर में किया जा रहा है। यह शोभा यात्रा 25 सितंबर को इटावा में ऐतिहासिक टिक्सी मंदिर से पक्का तालाब स्थित साईं मंदिर तक निकाली जाएगी।

देश में पहली बार निकाली जा रही इस यात्रा को लेकर के तरह-तरह की बातें भी कही जा रही है। कई लोग इस तरीके के सवाल भी उठाते हुए दिखाई दे रहे हैं जिनका तर्क है कि राजनेताओं ने महापुरुषों के नाम पर यात्राओं को वोट लेने के इरादे से निकाली हुई है हालांकि वह यात्राए काफी पहले से निकलती रही है लेकिन रामभक्त हनुमान की यात्रा पहली दफा निकलने से तमाम तरह के सवाल खड़े होते हुए नजर आ रहे हैं। 

राम भक्त हनुमान की शोभायात्रा के नाम पर एक नई परंपरा का शुभारंभ किया जा रहा है जिसको लेकर के लोग आश्चर्यचकित हैं हालांकि इस यात्रा को निकालने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संचालित हिन्दू युवा वाहिनी के पदाधिकारी इससे साफ इंकार करते है कि उनका कोई इरादा वोट के लिहाज से है।

श्री हनुमान शोभा यात्रा को लेकर इटावा शहर के कई हिस्सों में बैनर  गए है जिसकी चर्चाये पूरे शहर भर में रही है । इटावा के एसएसपी चौराहे पर 25 सितम्बर ( बुढ़वा मंगल ) हनुमान शोभा यात्रा निकाले जाने का पोस्टर देख आश्चर्यचकित बने हुए । इस यात्रा के मुख्य अतिथि इटावा सदर की भाजपा एमएलए श्रीमती सरिता भदौरिया और भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष शिवमहेश दुबे है। 

इटावा के नगर मजिस्टेट कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक श्री हनुमान शोभा यात्रा को लेकर पुलिस रिर्पोट आ गयी है जो इस यात्रा के पक्ष मे आई है फिर भी अभी तक इस प्रस्तावित हनुमान यात्रा को प्रशासनिक अनुमति नही मिली है लेकिन जिस तरीके के पोस्टर लगाए गए है। उस से स्पष्ट है कि इस यात्रा को अनुमति मिली जाएगी।  अगर ऐसा होता है तो यह देश और प्रदेश की पहली हनुमान शोभायात्रा मानी जाएगी । इससे पहले देश के किसी भी हिस्से में हनुमान शोभा यात्रा को निकाले जाने का कोई आयोजन ही नही हुआ है।

हिन्दू युवा वाहिनी के जिला प्रभारी राजेन्द्र प्रजापित का कहना है कि "हम हिंदु युवा वाहिनी के तहत यह पहला कार्यक्रम कर रहे है। श्री हनुमान शोभा यात्रा का कार्यक्रम रख रहे है। कई शोभा यात्राएं निकलती है लेकिन हनुमान शोभा यात्रा का यह आयोजन जिले में पहली दफा हो रहा है। इस यात्रा का मुख्य मकसद जाति छोड़ो हिन्दू जोड़ो है। यात्रा के आयोजन के सबंध में पूरे जिले भर से लोगो को जोड़ने के लिहाज से 40 टीमें भ्रमण पर है । जो ब्लाक, तहसील ओर विधानसभा स्तर पर जुटी हुई है।" 

हिन्दु युवा वाहिनी के जिला महामंत्री शैलेंद्र तोमर का कहना है कि "श्री राम जी के भक्त हनुमान जी है हमेशा उनका साथ है। बाल ब्रहमचारी राम भक्त हनुमान जी हिंदुत्व के सबसे बड़े पुजारी है इस वजह से हनुमान शोभा यात्रा निकालने का निर्णय लिया गया है।" 

इसके ठीक विपरीत समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष गोपाल यादव का कहना है कि "ऐसा पता चला है कि एक नई यात्रा,जो आज तक कभी भी नही हुई वो हिन्दू युवा वाहिनी संगठन की ओर से निकली जा रही है। यह यात्रा हम समझते है कि कही से भी आस्था से प्रेरित नही है पूरी तरह से इसका उद्देश्य राजनीतिक है। हमारा मानना है कि आस्था तो बहुत अच्छी बात है लेकिन आस्था व्यतिगत होती है आस्था का राजनीतिक करण नही होना चाहिये।"

इटावा के.के कालेज के जंतु विज्ञान विभाग के पूर्व प्रमुख और वरिष्ठ लेखक दिनेश पालीवाल का कहना है कि "मेरा ऐसा खयाल है पुरानी जो भी यात्राये चल रही है वो सब मजबूरी से चल रही है लेकिन नई यात्राओं से खामखा हमारी जनता को तकलीफ ही होती है तमाम जगह घिर जाती है सड़को की व्यवस्था बिगड़ जाती है। इस तरह के प्रचार तंत्र को व्यर्थ में बढ़ावा नही देना चाहिये।" 

इटावा के वरिष्ठ साहित्यकार नेम सिंह रमन का कहना है कि अगर इसी तरह से शोभा यात्राओं की तादाद बढ़ाते रहें तो आगे आने वाले वक्त में विभिन्न प्रकार की कठनाईयों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए इस तरह की यात्राओं को बढ़ावा नही दिया जाना चाहिये। 

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मंत्री प्रेम शंकर यादव का कहना है कि "किसी भी तरह की धार्मिक यात्रा के हम पूरी तरह से खिलाफ है। अगर यात्रा निकालनी है तो उन महापुरुषों की निकालो जिन्होंने समाज के लिए कुछ किया है। समाज मे फैली कुरीतियों को खत्म करने की दिशा में इन युवाओं को काम करना चीहिये ना कि इस तरह से भ्रमित करने वाली यात्राएं निकालनी चाहिए।

चंबल आकाइव से जुड़े किशन पोरवाल का कहना है कि "जो यात्रा पहले से निकल रही हैं वही सही ढंग से नहीं निकल पा रही लेकिन नई यात्राओं के जरिए वोट की खातिर राजनीतिक घु्रवीकरण करने की कोशशि है फिलहाल जो समय है यह उसमे आग में घी का काम करेगा । ऐसी यात्राओं पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। इन यात्राओं का असर दूसरे समुदाय पर भी पड़ रहा है।"

इटावा के पूर्व प्रोफेसर वी.पी.शर्मा का कहना है कि इस तरह की यात्राएं सांप्रदायिक तनाव पैदा करती हैं । हमारे समाज में सारे धर्म के लोग रहते हैं इन यात्राओं के जरिए पता नहीं दूसरे धर्म के लोगों को क्या संदेश देना चाहते हैं। नतीजा यह होता है कि कही ईंट पत्थर फेंके जाते हैं तो कही दंगा भड़क जाता है। कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ जाती है तमाम तरह की मुश्किल में लोग पड जाते है। इस किस्म की यात्राओं का कोई औचित्य नहीं है ओर पहले से निकाली जा रही यात्राओं पर भी प्रोत्साहन की प्रक्रिया को रोकना चाहिए।