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Monday, 19 November 2018

पूर्वांचल जितने के लिए मोदी काशी के दुर्ग से फूंका चुनावी बिगुल

Reported by KNEWS | Updated: Sep 18-2018 03:47:38pm


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर से काशी के दुर्ग से पूर्वांचल को साधते  हुए  लोकसभा चुनाव के प्रचार का बिगुल अपने 68 वें जन्मदिन पर ही शुरु कर दिए। कहा जाता है की दिल्ली की गद्दी पर बैठना  है तो आप को उत्तर प्रदेश से होकर गुजरना होता है.यूपी जीतना है तो पूर्वांचल जीतना जरुरी है। इसलिए उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल का भाग को लोकसभा चूनाव  2014 से मोदी ज्यादा फोकस कर रहे है। इसी फॉर्मूले से भाजपा ने लोकसभा 2014 और विधानसभा 2017 में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई थी।अब 2019 की जंग जीतने के लिए फिर से भाजपा मिशन पूर्वांचल पर अपनी निगाहें जमाई है। 

पूर्वांचल को साधने के लिहाज से पीएम मोदी दो दिवसीय दौरे पर सोमवार को काशी पहुंचे. इस दौरान अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी को 500 करोड़ के विकास परियोजनाओं के तोहफे से नवाजा. इसमें इलेक्ट्रिकल काम (बिजली ) ओल्ड काशी 36200 लाख, 33 इन टू 11 केवी विद्युत सब स्टेशन बेटावर -279 लाख, अटल इंक्यूबेशन सेंटर 2000 लाख, नागेपुर ग्राम पेयजल योजना -275 लाख, 33 इन टू 11 विद्युत सब स्टेशन कुरुसातो निर्मा -260 लाख का लोकार्पण शामिल है.  

नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी से उतरकर विपक्ष का सफाया कर दिया था. उन्होंने यूपी के वाराणसी से बिहार तक के चुनावी नतीजों पर असर डाला था. आजमगढ़ पूर्वांचल की इकलौती सीट थी, जहां बीजेपी नहीं जीत सकी थी. बाकी पूर्वांचल की सभी लोकसभा सीटें बीजेपी के खाते में गई थीं.2017 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने यही रणनीति अपनाई और पीएम नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के आखिरी के तीन दिन वाराणसी में रहकर विपक्ष को धराशायी कर दिया था. अब एक बार फिर मोदी ने 2019 फतह करने के लिए काशी को अपना रणक्षेत्र बनाने की कवायद शुरू कर दी है.

जहा मोदी पूर्वांचल साधने के लिए वाराणसी में अपना जन्मदिन मानाने आये वही दूसरी तरफ विपक्षी दल एकजुट होकर मोदी के खिलाफ मैदान में उतर रहे है. पूर्वांचल के गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा-बसपा की एकता से बीजेपी चारों खाने चित हो गई थी. इसके बाद विपक्ष की एकता की ताकत की अजमाइश पश्चिम यूपी के कैराना में भी दिखी, जहां आरएलडी ने बीजेपी को शिकस्त दी. 

 यूपी के उपचुनाव के नतीजे से उत्साहित सपा,बसपा और कांग्रेस 2019 लोकसभा चुनाव में महा गठबंधन बनाकर सियासी मैदान में उतरेंगे।तीनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर मंथन जारी है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव तो बीजेपी को रोकने के लिए हर समझौता करने को तैयार है. आजतक के माइंड रॉक्स प्रोग्राम में उन्होंने कहा था कि 2019 में बीजेपी को रोकने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे और सीटों के समझौते के लिए दो कदम पीछे भी हटना पड़ा तो हम तैयार हैं.

2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष महागठबंधन बनाकर उतरता है, तो बीजेपी के लिए 2014 जैसे नतीजे दोहराना आसान नहीं होगा. काशी जैसी लोकसभा सीट छोड़ दें तो पूर्वांचल की ज्यादातर सीटें बीजेपी के हाथों से निकल सकती हैं. बीजेपी के हाथों से पूर्वांचल खिसका तो फिर देश की सत्ता तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।यूपी के बदले सियासी मिजाज के तहत बीजेपी के लिए पूर्वांचल को साधना काफी अहम हो गया है. इसी कड़ी में पीएम मोदी ने पूर्वांचल में मिशन-2019 का तानाबाना काशी से बुनने का आगाज कर दिया है. इससे पहले मुलायम के गढ़ आजमगढ़ में उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी परियोजना पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की नींव रखी थी. ये देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे होगा. पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे गोरखपुर इलाहाबाद और बुंदेलखंड के लिंक एक्सप्रेस वे से भी जुड़ेगा.


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