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Sunday, 18 November 2018

राहुल ने रक्षा मंत्री को राफेल मंत्री कहा ,माँगा इस्तीफा

Reported by KNEWS | Updated: Sep 20-2018 12:21:37pm


राफेल डील को लेकर सियासी गर्मी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक बार फिर कांग्रेस अध्यछ राहुल गाँधी ने इस मामले पर ट्वीट कर के राफेल डील पर सवाल खड़े कर दिए.इस बार उन्होंने केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर हमला बोला है.उन्होंने कहा की सीतारमण रक्षा मंत्री नहीं राफेल मंत्री है.राहुल गाँधी ने विमान के सौदे का ठेका सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरनॉटिक्स लिमटेड को नहीं मिलने पर रक्षा मंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है.

कांग्रेस का कहना है कि ,इस सौदे में राफेल विमानों का मूल्य यूपीए सरकार में किए गए समझौते की तुलना में बहुत ज्यादा है जिससे सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है .पार्टी ने यह भी दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौदे को बदलवाया जिससे एचएएल से कॉन्ट्रैक्ट लेकर एक निजी समूह की कंपनी को दिया जा सके.वही दूसरी तरफ रक्षा मंत्री निर्मला सीतारामण ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि, एचएएल के साथ डील क्यों नहीं हो सकी, इसका जवाब यूपीए को देना चाहिए. उन्होंने केवल 36 विमानों की ही डील क्यों की गई, इसके जवाब में कहा कि स्क्वॉर्डन्स की आदर्श क्षमता 42 विमानों की है. यूपीए के शासनकाल में ही यह क्षमता कम होने लगी थी और 2013 तक यह घटकर 33 पर आ गई थी.

राहुल गाँधी ने सीतारमण के इस्तीफे की बात कहते हुए कहा कि,भ्रष्टाचार का बचाव करने का काम संभाल रही राफेल मिनिस्टर का झूठ एक बार फिर पकड़ा गया है. एचएएल के पूर्व प्रमुख टीएस राजू ने उनके इस झूठ की कलई खोल दी है कि एचएएल के पास राफेल बनाने की क्षमता नहीं है.राजू ने कहा की एचएएल के पास भारत में राफेल  विमान बनाने की  क्षमता  है. कांग्रेस मोदी सरकार पर आरोप लगते हुए कैग से इस डील की जाँच की मांग कर रही है.

मंगलवार को एक प्रेस वार्ता में पूर्व रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी का कहना है की 136 राफेल विमान के खरीद के डील को कम कर के 36 विमान क्यों किया गया? उन्होंने कहा कि हमारी मांग पहले दिन से स्पष्ट है कि संयुक्त संसदीय समिति इस मामले की जांच करे. सीवीसी का संवैधानिक दायित्व है कि वो पूरे मामले के कागजात मंगवाएं और जांच कर पूरे मामले की जानकारी संसद में रखें.एंटनी ने कहा कि यूपीए शासनकाल के दौरान, एचएएल मुनाफा कमाने वाली कंपनी थी. मोदी सरकार के समय इतिहास में पहली बार एचएएल ने अलग-अलग बैंकों से लगभग 1000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है. 

 

 

 

 

 

 


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