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Thursday ,17 Jan 2019

राफेल डील के विवाद के बिच भारतीय वायु सेना प्रमुख नाम्बियार ने विमान की क्षमता को भापा

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Reported by KNEWS

Updated: Sep 21-2018 03:53:21pm

राफेल डील को लेकर जहा पक्ष विपक्ष दोनों बयान बाजी कर रहे और एक दूसरे पर आरोप लगा रहे है। इस लड़ाकू विमानों की सरकारी खरीद से जुड़े समझौते पर विवाद अभी चल ही रहा था की अचानक यह  खबर आई कि भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल रघुनाथ नम्बियार ने फ्रांस जा कर राफेल लड़ाकू विमान को उड़ने में सफलता हासिल किया। उन्होंने गुरुवार को दसाल्ट एविएशन के राफेल लड़ाकू विमान को उड़ाया.उन्होंने बताया कि चार दिन पहले पेरिस पहुंचे नंबियार ने इसकी क्षमता का आकलन करने के लिए फ्रांस में यह विमान उड़ाया. दसाल्ट एविएशन द्वारा राफेल विमान बनाए जाने की प्रगति का आकलन करने के लिए वह फ्रांस गए हैं. सूत्रों  से पता चला की, इन विमानों को भारत को सौंपने का काम अगले साल सितंबर से शुरू होगा.भारत के लिहाज से विमान तैयार करने और उसमें हथियार प्रणाली शामिल करने में दसाल्ट एविएशन की मदद करने के लिए भारतीय वायु सेना की एक टीम पहले से ही फ्रांस में मौजूद है.

 राफेल डील के समझौते पर विवाद यहाँ तक बढ़ गया की एम एल शर्मा ने इस डील को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका हाजिर किया। उन्होंने याचिका किया है की इस पर पहले  अच्छी तरीके से जाँच हो ,तब जाकर यह डील फाइनल किया जाये। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई ही टाल दिया। बताया जा रहा है की याचिकाकर्ता एम एल शर्मा की सुनवाई टालने पर सुप्रीम कोर्ट ने अर्जी टाली  है.अब 10 अक्टूबर को सुनवाई होगी. याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि वह कुछ अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करना चाहते हैं. इससे पहले याचिकर्ता ने कल लेटर देकर कहा था कि वो बीमार हैं. आज सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि फिर आप क्यो आए हैं? मामले की सुनवाई  रंजन गोगोई, जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस के एम जोसेफ की बेंच ने की. 

याचिकाकर्ता एम एल शर्मा ने अपनी अर्जी में फ्रांस के साथ लड़ाकू विमान सौदे में विसंगतियों का आरोप लगाया है और उस पर रोक लगाने की मांग की है. याचिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहला प्रतिवादी बनाया गया है.सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दाखिल की गई है, उसमें डील को रद्द करने और  एफआईआर दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि दो देशों के बीच हुई इस डील में भ्रष्टाचार हुआ है और ये रकम इन्हीं लोगों से वसूली जाए क्योंकि ये अनुच्छेद 253 के तहत संसद के माध्यम से नहीं की गई है.