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Monday, 19 November 2018

ओलांद के बयान से राफेल ने लिया नया मोड़,सियासत हुई तेज़

Reported by KNEWS | Updated: Sep 22-2018 10:09:36am


फ्रांस से हुए राफेल डील को लेकर सियासत में उठापटक लगी हुई है.पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान के बाद वर्तमान फ्रांस  राष्ट्रपति ने राफेल डील में हुए भारतीय उद्योग भागीदारी में अपना कोई हाथ नहीं होने का खुलासा किया।सरकार ने जोर देते हुए कहा कि फ्रांसीसी कंपनियों को करार करने के लिए भारतीय कंपनियों का चयन करने की पूरी आजादी है.फ्रांस  सरकार का बयान तब सामने आया जब ओलांद ने कहा की राफेल डील में भारत की तरफ से प्रस्तावित अनिल अम्बानी की रिलायंस कंपनी का नाम प्रस्तावित किया गया था तो दशा  एविएशन के पास और कोई विकल्प नहीं था?

ओलांद के इस बयान के बाद देश की राजनीति ने फिर एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी  को केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोलने का एक और कारण मिल गया. राहुल ने ओलांद के इस बयान को दोनों हाथों से लपका और बिना देरी किए पीएम मोदी पर जोरदार हमला बोला.उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने बंद दरवाजे के पीछे निजी तौर पर राफेल डील पर बात की और इसमें बदलाव कराया.  उन्होंने फ्रांस्वा ओलांद को धन्यवाद भी बोला , हम अब जानते हैं कि उन्होंने दिवालिया हो चुके अनिल अंबानी के लिए बिलियन डॉलर्स की डील कराई. प्रधानमंत्री ने देश को धोखा दिया है. उन्होंने हमारे सैनिकों की शहादत का अपमान किया है.

वही दूसरी तरफ फ्रांस सरकार ने अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए कहा कि,भारत की अधिग्रहण प्रक्रिया के अनुसार,भारतीय कंपनियों को साझेदार चुनने की पूरी आजादी है. वे जिसे सबसे प्रासंगिक मानती हैं वे उसको चुन सकती हैं.फ्रांस सरकार ने कहा कि 36 राफेल विमानों की आपूर्ति के लिए भारत के साथ किए गए अंतर-सरकारी समझौते से विमान की डिलीवरी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के संबंध में पूरी तरह से उसे अपने दायित्वों की चिंता है.राफेल के निर्माता दसॉ एविएशन कंपनी  ने सौदे के ऑफसेट दायित्वों को पूरा करने के लिए रिलायंस डिफेंस को अपने साथी के रूप में चुना था. सरकार इस बात पर कायम  है कि दसॉ द्वारा ऑफ़सेट पार्टनर के चयन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी.


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