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Sunday, 18 November 2018

तीन मिनट की सुनवाई 3 महीने तक टली

Reported by KNEWS | Updated: Oct 29-2018 12:35:09pm


अयोध्या में राम मंदिर बनवाने को लेकर देश की राजनितिक पार्टिया अपनी रोटी सेंकने का काम कई दशकों से करती आ रही है. जिसके चलते यह मामला कोर्ट में चला गया था. सोमवार को इस मामले पर सुप्रीम कोर्टब अपना अहम फैसला सुनाने वाला था. लेकिन कोर्ट ने इस मामले को 3 मिनट में ही टाल दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने अब इस मामले के लिए जनवरी, 2019 की तारीख तय की है. यानी अब ये मामला करीब 3 महीने बाद ही कोर्ट में उठेगा.

 

सोमवार की सुनवाई में विवादित भूमि को तीन भागों में बांटने वाले 2010 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर होनी थी. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि ये मामला अर्जेेंट सुनवाई के तहत नहीं सुना जा सकता है.सोमवार की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई समेत जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के. एम जोसफ की पीठ ने की.वही बता दे की इससे पहले 27 सितंबर 2018 को कोर्ट 'मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं' वाले फैसले के खिलाफ याचिका पर पुनर्विचार से इनकार कर दिया था और कहा था कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में दीवानी वाद का निर्णय साक्ष्यों के आधार पर होगा और पूर्व का फैसला इस मामले में प्रासंगिक नहीं है. 27 सितंबर को ही कोर्ट ने 29 अक्टूबर की तारीख तय की थी.

 

इस मामले में 30 सितम्बर 2010 को इलाहबाद हाइकोर्ट के तीन सदस्यीय पीठ ने 2:1 के बहुमत से इस जमीं को तीन भागो में बाटने का फैसला लिया था. जिसमे कहा गया था की, 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर-बराबर बांट दिया जाए. इस फैसले को किसी भी पक्ष ने नहीं माना और उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी थी. इलाहाबाद हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में ये केस बीते 8 साल से है. 2019 के आम चुनाव से पहले इस मसले ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है. हालांकि, इस मामले में कोर्ट का फैसला कब तक आ पाएगा ये नहीं कहा जा सकता, लेकिन राम मंदिर निर्माण के पक्षकारों और इसका समर्थन करने वाले दलों ने स्वर तेज कर दिए हैं. बीजेपी नेता इस मामले की जल्दी सुनवाई का आह्वान कर रहे हैं.


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