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Sunday ,17 Feb 2019

70वां गणतंत्र दिवस होगा खास,पहली बार परेड में राजपथ पर नजर आएगी नेताजी की आजाद हिंद फौज

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Reported by KNEWS

Updated: Jan 25-2019 04:27:03pm

 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के परेड के मौके पर पहली बार इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) के चार वेटरन भी राजपत  पर नजर आएंगे। आईएनए को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने लीड किया था। आजादी के बाद से यह पहला मौका है जब आईएनए के वेटरन परेड में हिस्‍सा ले रहे हैं। आईएनए ने देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन किसी भी सरकार की ओर से परेड में आईएनए को शामिल होने का सम्‍मान नहीं दिया जा सका था। आईएनए को आजाद हिंद फौज कि नाम से भी जानते हैं। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजाद हिंद फौज की स्‍थापना के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर लाल किले पर तिरंगा फहराया था। इस दौरान उन्‍होंने कार्यक्रम में इस सेना की टोपी पहने हुए पीएम मोदी ने कुछ वेटरंस के साथ बातचीत भी की थी। राजनीति के जानकारों की मानें तो आईएएन को परेड में हिस्‍सा बनने की मंजूरी देकर बोस की विरासत को आगे बढ़ाया जा रहा है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने साल 1939 में कांग्रेस का अध्‍यक्ष पद छोड़ दिया था। यहां से वह जर्मनी गए थे और यहीं पर आजाद हिंद फौज की स्‍थापना हुई। अक्‍टूबर 1943 को आजाद हिंद का ऐलान आईएनए की शुरुआत रास बिहारी बोस और मोहन सिंह ने द्वितीय विश्‍व युद्ध के दौरान सन् 1942 में साउथ ईस्‍ट एशिया में शुरू किया था। इसका मकसद देश को ब्रिटिश शासन से आजादी दिलाना था।

 

अक्‍टूबर 1943 :

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आजाद हिंद का ऐलान अक्‍टूबर 1943 को आजाद हिंद का ऐलान आईएनए की शुरुआत रास बिहारी बोस और मोहन सिंह ने द्वितीय विश्‍व युद्ध के दौरान सन् 1942 में साउथ ईस्‍ट एशिया में शुरू किया था। इसका मकसद देश को ब्रिटिश शासन से आजादी दिलाना था। लेकिन इसी वर्ष कुछ मतभेदों के चलते दिसंबर में आईएनए का पतन हो गया। फिर रास बिहारी बोस ने आईएनए का जिम्‍मा नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सौंप दिया। इसके बाद 21 अक्‍टूबर 1943 को जर्मनी में नेताजी ने आजाद हिंद फौज का ऐलान किया। इसका मतलब था आजाद भारत की आजाद सेना।

परेड में शामिल नेताजी के सिपाही :

गणतंत्र दिवस की परेड के डिप्‍टी कमांडर मेजर जनरल राजपाल पूनिया ने इस बारे में बताया कि आईएनए के चार वेटरंस को परेड में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है। आईएनए जिसकी शुरुआत रास बिहारी बोस ने की और बाद में नेताजी ने इसे आगे बढ़ाया। मेजर जनरल पूनिया ने कहा कि यह एक नई शुरुआत है और हम आजादी की लड़ाई में आईएनए के योगदान की सराहना करते हैं। पंचकुला के 98 वर्षीय ललित राम, नरनौल से 97 वर्षीय हीरा सिंह, मानेसर से 100 वर्ष के भागमल और चंडीगढ़ से 95 वर्षीय परमानंद यादव, परेड में हिस्‍सा लेंगे।राजपथ पर परमवीर चक्र विजेताओं के गुजरने के बाद चारों वेटरन एक खुली जीप में गुजरेंगे। 

                                                                                                                   तनूजा रावत