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Sunday ,17 Feb 2019

महासचिव बनने के बाद लखनऊ में ज्योतिरादित्य सिंधिया संग प्रियंका गांधी का पहला रोड शो

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Reported by KNEWS

Updated: Feb 11-2019 10:10:09am
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लोकसभा चुनाव २०१९ से पहले उत्तर प्रदेश में वेंटिलेटर पर पड़ी कांग्रेस में जान फूंकने की जिम्मेदारी पूरी तरह से कांग्रेस की नई महासचिव प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंपी गई है। सूबे की सियासी नब्ज को टटोलने और कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ सोमवार को सूबे की राजधानी लखनऊ पहुंचकर शो के जरिए सियासी माहौल बनाने की कवायद करेंगे। 

प्रियंका का रोड शो

कांग्रेस का महासचिव पद संभालने के बाद पहली बार सोमवार को प्रियंका गांधी लखनऊ में रोड शो करने जा रही हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर के मुताबिक यह कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का स्वर्णिम दिन होगा। लखनऊ अमौसी एयरपोर्ट से लेकर कांग्रेस कार्यालय तक प्रियंका गांधी के स्वागत में सड़कें पोस्टर और बैनरों से भरी हुई नजर आ रही हैं।सुबह ११ बजे लखनऊ एयरपोर्ट मोड़ से प्रियंका-राहुल का रोड शो शुरू होगा और प्रदेश कांग्रेस दफ्तर तक पहुंचेगा। कानपुर, उन्नाव, सीतापुर, लखीमपुर, फैजाबाद, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, अमेठी, रायबरेली, बाराबंकी, फैजाबाद जैसे आसपास के जिलों के कार्यकर्ता प्रियंका और राहुल के स्वागत के लिए पहुंच रहे हैं। 

कांग्रेस का यूपी में बुरा हाल 

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पास २ सांसद, एक एमएलसी और ६ विधायक हैं। इसके अलावा वहाँ कांग्रेस पार्टी का वोट प्रतिशत सिंगल डिजिट में है। सूबे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नाम के सिवा लोगों को और किसी के बारे में कुछ पता ही नहीं है। इसी से पार्टी की बदतर हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी का सत्ता पर ३११ विधायकों के साथ प्रचंड बहुमत से कब्ज़ा है और मौजूदा समय में उनके ६८ सांसद हैं। ऐसे चुनौती भरे दौर में कांग्रेस की कमान प्रियंका गांधी को सौंपी गई है। 

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प्रियंका के सामने कड़ी चुनौतियां

उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यूपी के संगठन को फिर से खड़ा करने की है। अब जब लोकसभा चुनाव करीब हैं तो इतने कम समय में संगठन को नए तरीके से खड़ा करना बहुत मुश्किल नजर आ रहा है। इतना ही नहीं, कांग्रेस के पास अपना कोई मजबूत वोट बैंक भी नहीं है। इसी वजह से सपा-बसपा ने कांग्रेस को अपने गठबंधन में शामिल नहीं किया। प्रियंका गांधी को सूबे की ८० लोकसभा सीटों में से ४२ सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं और बाकी ३८ सीटें ज्योतिरादित्य सिंधिया को दी गई हैं। प्रियंका के जिम्मे जो ४२ सीटें हैं, २००९ के लोकसभा चुनाव में इनमें से १८ सीटें कांग्रेस जीतने में सफल रही थी। यही वजह है कि कांग्रेस को प्रियंका से काफी उम्मीदें है। प्रियंका गांधी जिस तरह से चार दिन लखनऊ में रह कर पार्टी संगठन और नेताओं से मुलाकात कर सियासी नब्ज टटोलने का काम करेंगी, इससे माना जा रहा है कि सूबे की सियासत को वे गंभीरता से ले रही हैं। 

बीजेपी का गढ़ है पूर्वांचल

देश की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर जाता है, इसके लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश को जीतना सबसे जरूरी माना जा रहा है। विशेषकर पूर्वांचल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर जैसी अहम सीटें हैं। मौजूदा समय में पूर्वांचल बीजेपी का गढ़ बना हुआ है, ऐसे में पूर्वांचल की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी को सौंपकर कांग्रेस ने एक बड़ा दांव खेला है। हालांकि प्रियंका के राजनीति में कदम रखने के साथ पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश नजर आ रहा है।

पूर्वांचल में वाराणसी, गोरखपुर, इलाहाबाद, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, जौनपुर, भदोही, गाजीपुर, बलिया, चंदौली, कुशीनगर, मऊ, आजमगढ़, देवरिया, महराजगंज, बस्ती, सोनभद्र, संत कबीरनगर, सिद्धार्थनगर जैसे कई जिले आते हैं। इन इलाकों में ब्राह्मण मतदाता भी अच्छे खासे हैं, जो एक दौर में कांग्रेस का मूल वोटबैंक रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रियंका के सहारे कांग्रेस इन्हीं वोटों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।